{"_id":"67e306e04fcf2eaf3b0d955b","slug":"increasing-demand-for-cultivation-of-medicinal-plants-hisar-news-c-21-hsr1020-591879-2025-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"अश्वगंधा की खेती फायदेमंद विकल्प, कम पानी-कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य : प्रो. कांबोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अश्वगंधा की खेती फायदेमंद विकल्प, कम पानी-कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य : प्रो. कांबोज
Wed, 26 Mar 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Wed, 26 Mar 2025 01:11 AM IST
विज्ञापन
हिसार में कार्यक्रम को संबोधित करते एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती की बढ़ती मांग को देखते हुए किसानों के लिए अश्वगंधा की खेती फायदेमंद विकल्प बनती जा रही है। अश्वगंधा को बहुत कम पौषक तत्वों की जरूरत होती है। कम पानी, कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह फसल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
उन्होंने बताया कि किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वे मंगलवार को विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में अश्वगंधा दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, युनानी और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में भी अश्वगंधा का उपयोग बढ़ता जा रहा है। यह मानसिक तनाव, शारीरिक कमजोरी, हृदय रोग, मधुमेह और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक है। बाजार में अश्वगंधा की जड़ों, पाउडर और कैप्सूल की बढ़ती मांग के कारण किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने विश्वविद्यालय की ओर से अश्वगंधा को लेकर किए जा रहे कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मौके पर अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, डॉ. भूपेंद्र, डॉ. पवन कुमार, डॉ. राजेश गेरा, डॉ. जीएस दहिया, डॉ. राजेश आर्य आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर औषधीय पौधों की खेती करके अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वे मंगलवार को विश्वविद्यालय के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में अश्वगंधा दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, युनानी और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में भी अश्वगंधा का उपयोग बढ़ता जा रहा है। यह मानसिक तनाव, शारीरिक कमजोरी, हृदय रोग, मधुमेह और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक है। बाजार में अश्वगंधा की जड़ों, पाउडर और कैप्सूल की बढ़ती मांग के कारण किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है। कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने विश्वविद्यालय की ओर से अश्वगंधा को लेकर किए जा रहे कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मौके पर अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग, डॉ. भूपेंद्र, डॉ. पवन कुमार, डॉ. राजेश गेरा, डॉ. जीएस दहिया, डॉ. राजेश आर्य आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन