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फ्लैट आवंटी मामले में हाउसिंग बोर्ड ने हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं को दिए 3 ऑफर
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हिसार। हाउसिंग बोर्ड फ्लैट आवंटियों की याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को सेक्टर 1-4 और सेक्टर-24 में फ्लैट देने को तैयार हैं। याचिकाकर्ता अगर फ्लैट नहीं चाहते हैं तो उनका ब्याज सहित पैसा लौटा दिया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने हाउसिंग बोर्ड के ऑफर का बहिष्कार किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सेक्टर-24 में बने फ्लैट काफी पुराने व जर्जर हालत में हैं। इसके अलावा शहर से काफी बाहर हैं। यहां जाने के लिए व्यक्ति के पास खुद के वाहन का होना जरूरी है। वह ये फ्लैट कभी नहीं लेंगे।
उधर, कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), हाउसिंग बोर्ड, टाउन प्लानिंग व सचिव हाउसिंग बोर्ड से दायर याचिका पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी 2023 को होगी। बता दें कि एचएसवीपी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए फ्लैट बनाने को लेकर सेक्टर-14 पार्ट टू में करीब 20 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड को दी थी। हाउसिंग बोर्ड को यहां फ्लैट बनाकर देने थे। इसे लेकर वर्ष 2016 में ड्रॉ सिस्टम के माध्यम से फ्लैट आवंटित किए गए थे। फ्लैट आवंटन के करीब छह साल बाद भी हाउसिंग बोर्ड ने फ्लैट नहीं बनाकर दिए। अब अचानक से एचएसवीपी ने हाउसिंग बोर्ड से यह जमीन वापस ले ली और इस पर प्लॉट काट दिए और इन्हें बोली के माध्यम से बेचने का फैसला किया। आखिरकार पीड़ित वर्ग को अदालत की शरण लेनी पड़ी। इस मामले में हाईकोर्ट में ममता रानी व अन्य बनाम सरकार व अन्य और अनूप सिंह व अन्य बनाम सरकार व अन्य के नाम से दो केस विचाराधीन हैं।
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इस आधार पर लगाई याचिका
इस मामले में सात लोगों की तरफ से याचिका दायर कई बिंदुओं को आधार बनाया गया है। इनमें हाउसिंग बोर्ड एक संवैधानिक संस्था है। बिना एक्ट में संशोधन किए इसे किसी अन्य विभाग में मर्ज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2014 में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए फ्लैट स्कीम की घोषणा की गई थी। उस समय बैंकों को इन लोगों को ऋण उपलब्ध करवाने को कहा गया था। उस समय लोगों ने बैंकों से ऋण लेकर इस स्कीम के लिए आवेदन किया था। साथ ही यह शपथ पत्र भी दिया था कि उनके पास हरियाणा, पंजाब व दिल्ली में खुद का कोई मकान नहीं है। एचएसवीपी एक प्रॉपर्टी डीलर बन गया है। गरीबों की जगह पर प्लॉट काटकर बोली के माध्यम से बेच रहा है। ऐसे तो गरीबों को कभी मकान ही नहीं मिलेगा। हाउसिंग बोर्ड आवंटियों को फ्लैट देने का वादा कर चुका है, जिसे अब वह तोड़ रहा है। आवंटियों को हाउसिंग बोर्ड की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया और उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। एचएसवीपी की तरफ से कोई अन्य जगह भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जहां इन फ्लैट का निर्माण किया जा सके।
याचिका कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। हाउसिंग बोर्ड ने याचिकाकर्ताओं को तीन विकल्प दिए हैं। साथ ही हाउसिंग बोर्ड, एचएसवीपी, टाउन प्लानिंग व सचिव हाउसिंग बोर्ड से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को तय की गई है। - केके गोयल, याचिकाकर्ता के वकील
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याचिकाकर्ताओं ने हाउसिंग बोर्ड के ऑफर का बहिष्कार किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सेक्टर-24 में बने फ्लैट काफी पुराने व जर्जर हालत में हैं। इसके अलावा शहर से काफी बाहर हैं। यहां जाने के लिए व्यक्ति के पास खुद के वाहन का होना जरूरी है। वह ये फ्लैट कभी नहीं लेंगे।
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उधर, कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), हाउसिंग बोर्ड, टाउन प्लानिंग व सचिव हाउसिंग बोर्ड से दायर याचिका पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी 2023 को होगी। बता दें कि एचएसवीपी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए फ्लैट बनाने को लेकर सेक्टर-14 पार्ट टू में करीब 20 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड को दी थी। हाउसिंग बोर्ड को यहां फ्लैट बनाकर देने थे। इसे लेकर वर्ष 2016 में ड्रॉ सिस्टम के माध्यम से फ्लैट आवंटित किए गए थे। फ्लैट आवंटन के करीब छह साल बाद भी हाउसिंग बोर्ड ने फ्लैट नहीं बनाकर दिए। अब अचानक से एचएसवीपी ने हाउसिंग बोर्ड से यह जमीन वापस ले ली और इस पर प्लॉट काट दिए और इन्हें बोली के माध्यम से बेचने का फैसला किया। आखिरकार पीड़ित वर्ग को अदालत की शरण लेनी पड़ी। इस मामले में हाईकोर्ट में ममता रानी व अन्य बनाम सरकार व अन्य और अनूप सिंह व अन्य बनाम सरकार व अन्य के नाम से दो केस विचाराधीन हैं।
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इस आधार पर लगाई याचिका
इस मामले में सात लोगों की तरफ से याचिका दायर कई बिंदुओं को आधार बनाया गया है। इनमें हाउसिंग बोर्ड एक संवैधानिक संस्था है। बिना एक्ट में संशोधन किए इसे किसी अन्य विभाग में मर्ज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2014 में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए फ्लैट स्कीम की घोषणा की गई थी। उस समय बैंकों को इन लोगों को ऋण उपलब्ध करवाने को कहा गया था। उस समय लोगों ने बैंकों से ऋण लेकर इस स्कीम के लिए आवेदन किया था। साथ ही यह शपथ पत्र भी दिया था कि उनके पास हरियाणा, पंजाब व दिल्ली में खुद का कोई मकान नहीं है। एचएसवीपी एक प्रॉपर्टी डीलर बन गया है। गरीबों की जगह पर प्लॉट काटकर बोली के माध्यम से बेच रहा है। ऐसे तो गरीबों को कभी मकान ही नहीं मिलेगा। हाउसिंग बोर्ड आवंटियों को फ्लैट देने का वादा कर चुका है, जिसे अब वह तोड़ रहा है। आवंटियों को हाउसिंग बोर्ड की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया और उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। एचएसवीपी की तरफ से कोई अन्य जगह भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जहां इन फ्लैट का निर्माण किया जा सके।
याचिका कोर्ट ने स्वीकार कर ली है। हाउसिंग बोर्ड ने याचिकाकर्ताओं को तीन विकल्प दिए हैं। साथ ही हाउसिंग बोर्ड, एचएसवीपी, टाउन प्लानिंग व सचिव हाउसिंग बोर्ड से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को तय की गई है। - केके गोयल, याचिकाकर्ता के वकील