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Hisar News: आयुष्मान का पूरा भुगतान न होने तक हड़ताल पर अडिग आईएमए, आज पानीपत में राज्य स्तरीय बैठक में बनेगी रणनीति
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हिसार में प्रेसवार्ता करते आईएमएके पदाधिकारी।
हिसार। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) बकाया भुगतान मिलने तक आयुष्मान कार्ड धारकाें को उपचार न देने पर अडिग है। आईएमए की राज्य स्तरीय बैठक रविवार को पानीपत में होगी जिसमें आंदोलन की समीक्षा कर आगामी रणनीति तय की जाएगी। आईएमए की जिलाध्यक्ष डॉ. रेनू भाटिया ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मांग पूरी होने तक इस योजना का बहिष्कार जारी रहेगा। सरकार समस्या सुलझाने के बजाय चिकित्सकों का शोषण और उत्पीड़न करने पर उतर आई है जिसको किसी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
आईएमए की जिलाध्यक्ष डॉ. रेनू भाटिया ने कहा कि बकाया करीब 500 करोड़ रुपये देने के बजाय अपनी कमियां छिपाने के लिए सरकार नोटिस दे रही है। जिले के 10 सदस्यों को नोटिस देकर एक अस्पताल को पैनल से हटा दिया गया है। चिकित्सकों की ओर से सभी नोटिसों का जवाब दिया जा चुका है। इसके बावजूद अंबाला और पानीपत में छापे के दौरान अस्पताल संचालकों से अभद्रता तक की गई। आईएमए इसकी निंदा करता है। उन्होंने बताया कि हड़ताल से पहले 28 जून और पांच अगस्त को सरकार को मांग पूरी न होने पर योजना के बहिष्कार की चेतावनी दी गई थी। तब से 17 दिन बीतने के बावजूद सरकार ने महज 30 प्रतिशत भुगतान किया है। करीब 70 प्रतिशत का भुगतान बकाया है।
उन्होंने बताया कि पहले 90 प्रतिशत इलाज नकद और 10 प्रतिशत इलाज सरकारी योजना के तहत होता था। तब देर से विलंब भी अस्पताल संचालन में बाधा नहीं बनता था। अब आयुष्मान का विस्तार कर इसमें चिरायु भी शामिल की गई है। जिले में करीब 14 लाख से अधिक लोग इसके दायरे में हैं। ऐसे में आयुष्मान कार्ड व चिरायु कार्ड से इलाज लेने वाले सबसे अधिक हैं। सरकार की ओर से भुगतान नहीं किए जाने के कारण हमें अस्पताल संचालन में दिक्कत आ रही है। अस्पतालों के सत्यापन से संबंधित सरकार की प्रक्रिया भी तर्कसंगत नहीं है। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
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आईएमए की जिलाध्यक्ष डॉ. रेनू भाटिया ने कहा कि बकाया करीब 500 करोड़ रुपये देने के बजाय अपनी कमियां छिपाने के लिए सरकार नोटिस दे रही है। जिले के 10 सदस्यों को नोटिस देकर एक अस्पताल को पैनल से हटा दिया गया है। चिकित्सकों की ओर से सभी नोटिसों का जवाब दिया जा चुका है। इसके बावजूद अंबाला और पानीपत में छापे के दौरान अस्पताल संचालकों से अभद्रता तक की गई। आईएमए इसकी निंदा करता है। उन्होंने बताया कि हड़ताल से पहले 28 जून और पांच अगस्त को सरकार को मांग पूरी न होने पर योजना के बहिष्कार की चेतावनी दी गई थी। तब से 17 दिन बीतने के बावजूद सरकार ने महज 30 प्रतिशत भुगतान किया है। करीब 70 प्रतिशत का भुगतान बकाया है।
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उन्होंने बताया कि पहले 90 प्रतिशत इलाज नकद और 10 प्रतिशत इलाज सरकारी योजना के तहत होता था। तब देर से विलंब भी अस्पताल संचालन में बाधा नहीं बनता था। अब आयुष्मान का विस्तार कर इसमें चिरायु भी शामिल की गई है। जिले में करीब 14 लाख से अधिक लोग इसके दायरे में हैं। ऐसे में आयुष्मान कार्ड व चिरायु कार्ड से इलाज लेने वाले सबसे अधिक हैं। सरकार की ओर से भुगतान नहीं किए जाने के कारण हमें अस्पताल संचालन में दिक्कत आ रही है। अस्पतालों के सत्यापन से संबंधित सरकार की प्रक्रिया भी तर्कसंगत नहीं है। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
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