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Hisar News: दाखिले की दौड़ में पिछड़े तो तय होगी जवाबदेही
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हिसार। जिले के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए चल रही दाखिला प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी होते ही सभी स्कूलों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों का नामांकन कम पाया गया वहां संबंधित स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार इस बार नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। स्कूलों के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह देखा जाएगा कि किस संस्थान में कितने विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। अपेक्षा से कम नामांकन वाले स्कूलों के हेड टीचर और स्टाफ से सीधे जवाब मांगा जाएगा।
विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि किसी स्कूल में नामांकन कम रहता है तो इसे लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकारियों ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि दाखिला प्रक्रिया के दौरान अधिक से अधिक अभिभावकों से संपर्क किया जाए। घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अभियान चलाया जाए और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की सुविधाओं के प्रति जागरूक किया जाए। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है जहां हर वर्ष नामांकन कम रहता है।
दाखिला प्रक्रिया के बाद होने वाले सर्वे में केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा जाएगा बल्कि जमीनी हकीकत का भी आकलन किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में संसाधनों या स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं तो उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
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अधिकारियों के अनुसार इस बार नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। स्कूलों के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह देखा जाएगा कि किस संस्थान में कितने विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। अपेक्षा से कम नामांकन वाले स्कूलों के हेड टीचर और स्टाफ से सीधे जवाब मांगा जाएगा।
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विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, मिड-डे मील, छात्रवृत्ति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि किसी स्कूल में नामांकन कम रहता है तो इसे लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकारियों ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि दाखिला प्रक्रिया के दौरान अधिक से अधिक अभिभावकों से संपर्क किया जाए। घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अभियान चलाया जाए और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों की सुविधाओं के प्रति जागरूक किया जाए। खासतौर पर उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है जहां हर वर्ष नामांकन कम रहता है।
दाखिला प्रक्रिया के बाद होने वाले सर्वे में केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा जाएगा बल्कि जमीनी हकीकत का भी आकलन किया जाएगा। यदि किसी स्कूल में संसाधनों या स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं तो उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।