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समय पर विला न देने पर उपभोक्ता फोरम ने दिए मूलराशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश
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रेवाड़ी के समीप खजूरी गांव में गोल्डन विला नाम से हाउसिंग सोसायटी में विला बुक कराने वाले ग्राहकों को समय पर पजेशन न देने पर उपभोक्ता फोरम ने सोसायटी मालिकों को पीड़ित की मूल राशि 14 लाख रुपये 8 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्हें 20 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर देने होंगे।
उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में सेक्टर-15 निवासी रविंद्र चहल और माजर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नियों क्रमश: मनजीत चहल और शारदा के नाम से रेवाड़ी के खजूरी में हाउसिंग सोसायटी गोल्डन विला में वर्ष 2012 में एक विला बुक कराया था। इसके लिए उन्होंने 14 लाख रुपये कंपनी के पास एडवांस जमा कराए थे। रविंद्र ने बताया कि कंपनी मालिकों ने उन्हें 12 माह में प्रोजेक्ट पूरा होने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद वे बार-बार कंपनी के ऑफिस में गए, लेकिन हर बार उन्हें जल्द शुरू करने का आश्वासन मिलता रहा। कंपनी ने छह साल के बाद 15 जून 2018 से जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराया। पीड़ितों ने शिकायत में कहा कि उनका पैसा इस कंपनी में फंस गया, जिस कारण वे किसी अन्य स्थान पर भी जमीन नहीं खरीद सके, ताकि मकान बना सकें। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से 24 प्रतिशत ब्याज सहित उनका पैसा वापस देने के लिए कहा तो उन्होंने देने से साफ मना कर दिया। इसके बाद पीड़ित उपभोक्ता फोरम पहुंचे। पांच अप्रैल 2019 को फोरम में दी शिकायत में पीड़ितों ने 14 लाख रुपये 24 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने और एक लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
ये दिया फोरम ने फैसला
फोरम के अध्यक्ष रघबीर सिंह और सदस्य रजनी गोयत व तृप्ति पानू ने सुनवाई के बाद कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-1986 की धारा 12 के तहत मेघा मॉल गुरुग्राम की कंपनी गोल्डन विलाज को मूल राशि 14 लाख रुपये 8 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए। यह राशि जिस समय दी गई थी, उस समय से इस राशि का ब्याज देना होगा। इसके साथ ही कंपनी को 20 हजार रुपये मुआवजा देने के भी आदेश दिए।
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उपभोक्ता फोरम को दी शिकायत में सेक्टर-15 निवासी रविंद्र चहल और माजर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नियों क्रमश: मनजीत चहल और शारदा के नाम से रेवाड़ी के खजूरी में हाउसिंग सोसायटी गोल्डन विला में वर्ष 2012 में एक विला बुक कराया था। इसके लिए उन्होंने 14 लाख रुपये कंपनी के पास एडवांस जमा कराए थे। रविंद्र ने बताया कि कंपनी मालिकों ने उन्हें 12 माह में प्रोजेक्ट पूरा होने का भरोसा दिलाया था। इसके बाद वे बार-बार कंपनी के ऑफिस में गए, लेकिन हर बार उन्हें जल्द शुरू करने का आश्वासन मिलता रहा। कंपनी ने छह साल के बाद 15 जून 2018 से जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कराया। पीड़ितों ने शिकायत में कहा कि उनका पैसा इस कंपनी में फंस गया, जिस कारण वे किसी अन्य स्थान पर भी जमीन नहीं खरीद सके, ताकि मकान बना सकें। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से 24 प्रतिशत ब्याज सहित उनका पैसा वापस देने के लिए कहा तो उन्होंने देने से साफ मना कर दिया। इसके बाद पीड़ित उपभोक्ता फोरम पहुंचे। पांच अप्रैल 2019 को फोरम में दी शिकायत में पीड़ितों ने 14 लाख रुपये 24 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने और एक लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
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ये दिया फोरम ने फैसला
फोरम के अध्यक्ष रघबीर सिंह और सदस्य रजनी गोयत व तृप्ति पानू ने सुनवाई के बाद कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट-1986 की धारा 12 के तहत मेघा मॉल गुरुग्राम की कंपनी गोल्डन विलाज को मूल राशि 14 लाख रुपये 8 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए। यह राशि जिस समय दी गई थी, उस समय से इस राशि का ब्याज देना होगा। इसके साथ ही कंपनी को 20 हजार रुपये मुआवजा देने के भी आदेश दिए।
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