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थाम लो वो हाथ जिनकी उंगलियां पकड़कर चलना सीखा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2022 12:03 AM IST
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Hold the hands whose fingers learned to walk
टीबी से ग्रस्त मरीजों को प्रोटीन युक्त पोष्टिक आहार देते जेके डांग व वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्? - फोटो : Hisar
हिसार। अपने लिए तो हर कोई जीता है, मगर आज भी समाज में ऐसे बुुजुर्ग लोग हैं, जो दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। कोई वृद्ध टीबी से ग्रस्त मरीजों को प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार बांट रहा है तो कोई जरूरतमंदों को बेड से व्हीलचेयर उपलब्ध करवा रहा है। वहीं 61 वर्षीय सुनीता रहेजा शहर को हरा-भरा करने से लेकर लोगों को खाद तैयार कर बांट रही हैं।
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जेके डांग, डॉ. राजेंद्र कुमार जैन ने कहा कि आज नौकरी के लिए लोग बाहर जा रहे हैं, ऐसे में एकल परिवार बढ़ रहे हैं, इस कारण बुजुर्ग घरों में अकेले रहने को मजबूर हैं। युवाओं से अपील है कि वे अपने मां-पिता का सम्मान करें। उनका हाथ कभी न छोड़े, जिनकी उंगली पकड़कर उन्होंने चलना सीखा। बुजुर्गों को प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने के लिए हर वर्ष एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। चाहे हमारे घर के बुजुर्ग हों या फिर बाहर के, हमें हमेशा अपने मन में बुजुर्गों के प्रति आदर और सम्मान की भावना रखनी चाहिए।
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प्रत्येक महीने की 10 तारीख को टीबी से ग्रस्त मरीजों को गंगवा के हेल्थ सेंटर में बुलाया जाता है। उन्हें वानप्रस्थ सीनियर सिटिजन क्लब की ओर से 25 मरीजों को प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार दिया जाता है। इसमें गुड़, प्रोटीन पाउडर, भूने हुए चने, 1 किलो बेसन शामिल है। प्रत्येक व्यक्ति को 500 रुपये का सामान दिया जाता है। समय-समय पर बीमारी से पीड़ित लोगों के घर जाकर उनका हाल-चाल जानते हैं और उन्हें जागरूक करते हैं। - जेके डांग, 78 वर्षीय, सेक्टर-15ए
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पिछले सात साल से प्लांटेशन पर काम कर रही हूं। अब तक शहर में 15 हजार फलदार से लेकर फूलदार पौधे लगा चुकी हूं। किचन के वेस्ट और पतों से खाद बनाकर निशुल्क देती हूं। मेरे पास बर्तन बैंक है। मुझ से काफी लोग बर्तन भी इस्तेमाल करने के लिए ले जाते हैं। इसके लिए मैं कोई चार्ज नहीं लेती। मैं हरी-भरी वसुंधरा एनजीओ की संचालिका हूं। प्लांटेशन पर काम करने के लिए मुझे हरियाणा सरकार ने 15 अगस्त को 1 लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया था। - सुनीता रहेजा, 61 वर्षीय, सेक्टर-14 निवासी

वानप्रस्थ सीनियर सिटीजन क्लब से जुड़े बुजुर्ग जो आ और जा नहीं सकते हैं, उनका घर जाकर ख्याल रखा जाता है। यदि उन्हें कोई समस्या आती है तो उसका समाधान कराया जाता है। उन्हें व्हीलचेयर से लेकर बेड की सुविधा मुहैया करवाई गई है। क्लब की ओर से समय-समय पर मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। कोरोनाकाल के समय में मास्क से लेकर बॉडी बैग निशुल्क बांटे गए। मैं क्लब से तीन साल से जुड़कर सेवा कर रहा हूं।
- डॉ. राजेंद्र कुमार जैन, 65 वर्षीय, सेक्टर-15 ए
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