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हॉकी इंडिया लीग : 38 लाख में कलिंगा लांसर्स के हुए डाबड़ा के संजय
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संजय कालीरावणा।
हिसार। हॉकी इंडिया लीग के लिए खिलाड़ियों की नीलामी में हिसार के डाबड़ा गांव के संजय कालीरावणा को कलिंगा लांसर्स ने 38 लाख में खरीदा है। इनके अलावा डाबड़ा के ही रोहित 40 लाख और उमरा के पवन 15 लाख व जोगेंद्र सिंह 5 लाख 20 हजार रुपये में बिके हैं। हिसार के रहने वाले चारों खिलाड़ी 27 दिसंबर से होने वाली लीग में दमखम दिखाएंगे। लीग के लिए चयन होने पर गांव डाबड़ा और उमरा में खुशी का माहौल है। सोमवार को डाबड़ा के हॉकी ग्राउंड में खिलाड़ियों ने लड्डू बांटकर खुशी मनाई। रोहित, पवन और जोगेंद्र दिल्ली एसजी पाइपर्स टीम का हिस्सा बने हैं।
संजय कालीरावणा ने सात साल की उम्र में हॉकी थाम ली थी। शुरुआत में आर्थिक तंगी के कारण वह हॉकी तक नहीं खरीद सका। एक माह तक सीनियर्स की हॉकी से अभ्यास किया। फिर डाबड़ा के ही हॉकी कोच राजेंद्र सिहाग ने उसे हॉकी दिलाई। इसके बाद संजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम में शामिल डिफेंडर संजय ने कांस्य पदक जीता था। हॉकी लीग में पवन गोलकीपर तो संजय कालीरावणा, रोहित और जोगेंद्र डिफेंडर की भूमिका निभाएंगे।
रोहित ने चार साल तक गांव में प्रशिक्षण लिया
कोच राजेंद्र सिहाग ने बताया कि रोहित ने चार साल तक गांव डाबड़ा में उनसे हॉकी का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद वह चंडीगढ़ हाॅकी अकादमी में चला गया। वहां प्रशिक्षण के बाद रोहित का भारतीय टीम में चयन हो गया। रोहित पांच साल से भारतीय टीम के साथ कैंप में भाग ले रहा है। अब तक कई प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुका हैं। रोहित से प्रेरित होकर कई खिलाड़ियों ने गांव में हॉकी की शुरुआत की। आज रोहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत नाम चमका रहा है।
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सीनियर खिलाड़ियों को खेलते देख पवन ने थामी थी स्टिक
उमरा के 23 वर्षीय पवन ने 12 साल पहले गांव में सीनियर खिलाड़ियों का खेलते देख हॉकी खेलना शुरू किया था। पवन नेशनल स्तर पर सात पदक जीत चुका हैं। फिलहाल वह बंगलूरू कैंप में प्रशिक्षण ले रहा है। उनके पिता रामपाल मलिक किसान हैं। पवन ने बताया कि गांव में उन्होंने कोच सुरेंद्र मलिक से प्रशिक्षण लेकर हॉकी में कॅरिअर की शुरुआत की थी।
आर्थिक तंगी के कारण बड़े भाई ने छोड़ी हॉकी तो जोगेंद्र ने सपना किया पूरा
उमरा के 25 वर्षीय जोगेंद्र सिंह बताते हैं कि सबसे पहले उनके बड़े भाई रविंद्र सैनी ने हॉकी की शुरुआत की थी। भाई कॉलेज समय तक खेला। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन हॉकी छोड़नी पड़ी। उस समय भाई ने कहा कि मैं तो आगे नहीं खेल पाया। अब आप हॉकी खेलना शुरू कर दो। जोगेंद्र ने बताया कि उन्होंने 2012 में हॉकी खेलना शुरू किया था। उन्होंने हॉकी एकेडमी लुधियाना से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी।
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खुशी की बात है कि हॉकी इंडिया लीग में दो खिलाड़ी डाबड़ा और दो खिलाड़ी उमरा से खेलेंगे। डाबड़ा से संजय कालीरावणा व रोहित, उमरा से जोगेंद्र सिंह और पवन शामिल हैं। खुशी की बात ही कि गांव के खिलाड़ी देशभर में नाम कमा रहे हैं।
- राजेंद्र सिहाग, हॉकी कोच, डाबड़ा निवासी
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संजय कालीरावणा ने सात साल की उम्र में हॉकी थाम ली थी। शुरुआत में आर्थिक तंगी के कारण वह हॉकी तक नहीं खरीद सका। एक माह तक सीनियर्स की हॉकी से अभ्यास किया। फिर डाबड़ा के ही हॉकी कोच राजेंद्र सिहाग ने उसे हॉकी दिलाई। इसके बाद संजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम में शामिल डिफेंडर संजय ने कांस्य पदक जीता था। हॉकी लीग में पवन गोलकीपर तो संजय कालीरावणा, रोहित और जोगेंद्र डिफेंडर की भूमिका निभाएंगे।
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रोहित ने चार साल तक गांव में प्रशिक्षण लिया
कोच राजेंद्र सिहाग ने बताया कि रोहित ने चार साल तक गांव डाबड़ा में उनसे हॉकी का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद वह चंडीगढ़ हाॅकी अकादमी में चला गया। वहां प्रशिक्षण के बाद रोहित का भारतीय टीम में चयन हो गया। रोहित पांच साल से भारतीय टीम के साथ कैंप में भाग ले रहा है। अब तक कई प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुका हैं। रोहित से प्रेरित होकर कई खिलाड़ियों ने गांव में हॉकी की शुरुआत की। आज रोहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत नाम चमका रहा है।
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सीनियर खिलाड़ियों को खेलते देख पवन ने थामी थी स्टिक
उमरा के 23 वर्षीय पवन ने 12 साल पहले गांव में सीनियर खिलाड़ियों का खेलते देख हॉकी खेलना शुरू किया था। पवन नेशनल स्तर पर सात पदक जीत चुका हैं। फिलहाल वह बंगलूरू कैंप में प्रशिक्षण ले रहा है। उनके पिता रामपाल मलिक किसान हैं। पवन ने बताया कि गांव में उन्होंने कोच सुरेंद्र मलिक से प्रशिक्षण लेकर हॉकी में कॅरिअर की शुरुआत की थी।
आर्थिक तंगी के कारण बड़े भाई ने छोड़ी हॉकी तो जोगेंद्र ने सपना किया पूरा
उमरा के 25 वर्षीय जोगेंद्र सिंह बताते हैं कि सबसे पहले उनके बड़े भाई रविंद्र सैनी ने हॉकी की शुरुआत की थी। भाई कॉलेज समय तक खेला। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरन हॉकी छोड़नी पड़ी। उस समय भाई ने कहा कि मैं तो आगे नहीं खेल पाया। अब आप हॉकी खेलना शुरू कर दो। जोगेंद्र ने बताया कि उन्होंने 2012 में हॉकी खेलना शुरू किया था। उन्होंने हॉकी एकेडमी लुधियाना से अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी।
खुशी की बात है कि हॉकी इंडिया लीग में दो खिलाड़ी डाबड़ा और दो खिलाड़ी उमरा से खेलेंगे। डाबड़ा से संजय कालीरावणा व रोहित, उमरा से जोगेंद्र सिंह और पवन शामिल हैं। खुशी की बात ही कि गांव के खिलाड़ी देशभर में नाम कमा रहे हैं।
- राजेंद्र सिहाग, हॉकी कोच, डाबड़ा निवासी

संजय कालीरावणा।

संजय कालीरावणा।

संजय कालीरावणा।