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चुनावों में 57600 पेड़ों बचाने निकली हिसार की बहू संजना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Oct 2022 12:15 AM IST
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Hisar's daughter-in-law Sanjana goes out to save 57,600 trees in elections
गांव सलेमगढ़ में उपचुनाव के दौरान लगाई गई बिजली की लाइन - फोटो : Hisar
हिसार। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान प्रत्याशियों को निशुल्क में मतदाता सूची दी जाती है। सूचियों की छपाई के लिए हर पांच साल में 57 हजार 600 पेड़ों का काटा जाता है। इनको बचाने के लिए हिसार की बहू एडवोकेट संजना सातरोड़ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त से 28 नवंबर तक जवाब तलब किया है। इन मतदाता सूचियों की छपाई पर हर बार देश पर करीब 48 करोड़ रुपये का भार भी पड़ता है
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दिल्ली के हरज्ञान सिंह गहलोत के अलावा हिसार की बहू संजना सातरोड़ ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। संजना सातरोड़ ने अपनी जनहित याचिका में उन्होंने बताया कि निर्वाचनों का संचालन नियम 1961 के नियम 85-डी के तहत मान्यता प्राप्त राजनीति पार्टी के प्रत्याशियों को मतदाता सूची की दो हार्ड कॉपी व दो सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध करवाई जाती हैं। इसी प्रकार निर्वाचक पंजीकरण नियम के नियम 11-सी व 22-सी के तहत भी राजनीति पार्टियों को निर्वाचन नामावलियों की दो हार्ड कॉपी प्रदान की जाती हैं।
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वहीं सूचना का अधिकार कानून के तहत विभिन्न निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि एक विधानसभा क्षेत्र में इन हार्ड कॉपी को तैयार करने में औसतन 58 हजार रुपये का खर्च आ जाता है। वहीं लोकसभा क्षेत्र में यह खर्च चार लाख, 50 हजार रुपये आता है। उन्होंने कहा कि देशभर के विभिन्न राज्यों में 4036 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें यह कॉपी तैयार करने के लिए 23 करोड़, 40 लाख, 88 हजार रुपये का खर्च आता है। इसी प्रकार 543 लोकसभा क्षेत्रों में यह खर्च 24 करोड़, 43 लाख, 50 हजार रुपये का आता है। यह कुल खर्च 47 करोड़, 84 लाख, 38 हजार रुपये का हर पांच साल में होता है और इसके लिए 57 हजार, 600 पेड़ों की कटाई होती है।
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संजना सातरोड़ ने इससे पूर्व दिल्ली नगर निगम चुनाव के प्रत्याशियों की फोटो मतपत्रों पर प्रकाशित करने के लिए लिए जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने वर्ष 2017 के आम चुनाव में भी इस नियम को लागू किया। इसी प्रकार संजना सातरोड़ ने दिल्ली में बिजली के बिलों पर फिक्स चार्ज अलग से जोड़ने के खिलाफ भी जनहित याचिका दायर की थी।
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