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कपास से तौबा कर धान पर खेले रहे दांव
ब्यूरो / अमर उजाला , हिसार
Updated Sat, 25 Jun 2016 12:32 AM IST
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सफेद सोना कही जाने वाली कपास की फसल से तौबा करके किसानों ने धान और अन्य फसलों को प्रमुखता देते हुए दांव खेला है। इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इस बार केवल 90 हजार हेक्टेयर में ही कपास की बुआई की गई है। जो टारगेट 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर का 60 फीसदी है। यानी कपास की निर्धारित लक्ष्य से 40 फीसदी कम बुआई हुई है। बहरहाल अच्छे मानसून की संभावनाओं के चलते जिले में धान की रोपाई का काम जोरों पर है। अब तक अनुमानित पांच हजार हेक्टेयर पर धान की रोपाई हो चुकी है। कृषि विभाग ने 50 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है। वहीं किसान मूंग, हरड़, ग्वार, बाजरा, सब्जी आदि की भी बुआई कर रहे हैं।
जिले में धान का टारगेट और रकबा
- जिले में पिछली बार धान का टारगेट था 46 हजार हेक्टेयर और रकबा था 62 हजार हेक्टेयर
- इस बार टारगेट 50 हजार हेक्टेयर और रकबा 15 से 20 फीसदी बढ़ने की संभावना
- यानी कि इस बार रकबा 60 हजार हेक्टेयर से अधिक पहुंचने की उम्मीद
जिले में कपास का टारगेट और रकबा
- जिले में पिछली बार कपास का टारगेट था एक लाख 56 हजार और रकबा था एक लाख 30 हजार हेक्टेयर
- इस बार टारगेट है एक लाख 50 हजार, अभी तक 90 हजार हेक्टेयर में ही कपास की बुआई
- यानी लक्ष्य से 60 हजार हेक्टेयर कम बुआई
सफेद मक्खी से परेशान किसान
पिछले सीजन में सफेद मक्खी के प्रकोप से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया था, जिसके बाद इस बार अधिकतर किसानों ने धान सहित अन्य फसलों को तव्वजो दी है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार निर्धारित लक्ष्य से अधिक धान की रोपाई होगी। धान की फसल के लिए अत्यधिक पानी जरूरी होता है। जितनी अधिक बारिश होगी, उतनी ही फसल ज्यादा और बढ़िया होगी।
दो कारणों से बढ़ेगा धान का रकबा
पिछली बार किसानों ने 1 लाख 30 हजार हेक्टेयर पर कपास की फसल लगाई थी, लेकिन सफेद मक्खी के प्रकोप से अधिकतर किसानों की फसलें खराब हो गई थीं। इससे किसानों को जबर्दस्त घाटा उठाना पड़ा था। खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर तक चलाने पड़े थे। इसलिए किसानों ने इस बार कपास को अधिक तव्वजो नहीं दी। किसानों ने केवल 90 हजार हेक्टेयर पर ही कपास की फसल लगाई है।
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पिछले सीजन में 62 हजार हेक्टेयर पर धान की फसल लगाई गई थी, लेकिन कम बरसात के कारण औसत उत्पादन कम हुआ था। केवल 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार बरसात के सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है, जिसके कारण इस बार लोगों का रुझान धान की खेती में बढ़ने की संभावना है।
अब तक करीब पांच हजार हेक्टेयर से अधिक में रोपाई शुरू हो चुकी है। हमने 50 हजार हेक्टेयर का टारगेट रखा है, लेकिन इस बार कपास का रकबा घटने और अच्छी बरसात की संभावना के कारण धान की रोपाई टारगेट से अधिक जा सकती है। हालांकि इस बार ग्वार, मूंग, चना, बाजरा आदि पर भी लोग फोकस कर रहे हैं, जोकि अच्छी पहल है।
- डॉ. प्रवीन मंडल, कृषि विशेषज्ञ
हांसी में दो हजार हेक्टेयर धान की फसल होगी अधिक
अगर इस बार मानसून बढ़िया हुआ तो हांसी में दो हजार हेक्टेयर में धान की फसल अधिक रोपी जाएगी। जिले में हांसी में सर्वाधिक धान की खेती होती है। इसके अलावा नारनौंद और बरवाला के कुछ क्षेत्रों में भी धान की खेती होती है। हांसी में इस बार खेतों में एक हजार 50 हेक्टेयर धान नर्सरी से ट्रांसप्लांट की जा चुकी है। 42 हजार हेक्टेयर में रोपाई की संभावना है, जबकि लक्ष्य 40 हजार हेक्टेयर है।
एक से सवा महीने में तैयार होती है पौध
हांसी उपमंडल के कृषि अधिकारी वजीर सिंह चौहान ने बताया कि खेतों में धान की फसल ट्रांसप्लांट करने से पहले इसे एक से सवा महीने तक नर्सरी में रखना पड़ता है।
जुलाई के अंत तक कर सकेंगे रोपाई
धान की फसल की साल में एक बार पैदावार ली जाती है। जुलाई के आरंभ में इसकी बुआई की जाती है, जोकि पूरे माह तक चलती है। इसके बाद अक्तूबर माह के अंत में फसल की कटाई की जाती है।
क्यों खास है हांसी
- जिले की 80 फीसदी धान हांसी में होती।
- खाड़ी देश ईराक, ईरान, कुवैत आदि देशों में हांसी के चावल का निर्यात होता है।
- नहरी पानी के कारण हांसी और करनाल का चावल अच्छा होने के कारण मांग अधिक है।
पिछली बार कपास बोई थी। सफेद मक्खी के कारण पूरी फसल बर्बाद हो गई थी और फसल की लागत भी पूरी नहीं हुई थी। इस बार धान की रोपाई कर रहा हूं।
- हंसराज, किसान, चंदननगर
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जिले में धान का टारगेट और रकबा
- जिले में पिछली बार धान का टारगेट था 46 हजार हेक्टेयर और रकबा था 62 हजार हेक्टेयर
- इस बार टारगेट 50 हजार हेक्टेयर और रकबा 15 से 20 फीसदी बढ़ने की संभावना
- यानी कि इस बार रकबा 60 हजार हेक्टेयर से अधिक पहुंचने की उम्मीद
जिले में कपास का टारगेट और रकबा
- जिले में पिछली बार कपास का टारगेट था एक लाख 56 हजार और रकबा था एक लाख 30 हजार हेक्टेयर
- इस बार टारगेट है एक लाख 50 हजार, अभी तक 90 हजार हेक्टेयर में ही कपास की बुआई
- यानी लक्ष्य से 60 हजार हेक्टेयर कम बुआई
सफेद मक्खी से परेशान किसान
पिछले सीजन में सफेद मक्खी के प्रकोप से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया था, जिसके बाद इस बार अधिकतर किसानों ने धान सहित अन्य फसलों को तव्वजो दी है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार निर्धारित लक्ष्य से अधिक धान की रोपाई होगी। धान की फसल के लिए अत्यधिक पानी जरूरी होता है। जितनी अधिक बारिश होगी, उतनी ही फसल ज्यादा और बढ़िया होगी।
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दो कारणों से बढ़ेगा धान का रकबा
पिछली बार किसानों ने 1 लाख 30 हजार हेक्टेयर पर कपास की फसल लगाई थी, लेकिन सफेद मक्खी के प्रकोप से अधिकतर किसानों की फसलें खराब हो गई थीं। इससे किसानों को जबर्दस्त घाटा उठाना पड़ा था। खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर तक चलाने पड़े थे। इसलिए किसानों ने इस बार कपास को अधिक तव्वजो नहीं दी। किसानों ने केवल 90 हजार हेक्टेयर पर ही कपास की फसल लगाई है।
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पिछले सीजन में 62 हजार हेक्टेयर पर धान की फसल लगाई गई थी, लेकिन कम बरसात के कारण औसत उत्पादन कम हुआ था। केवल 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन हुआ था, लेकिन इस बार बरसात के सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है, जिसके कारण इस बार लोगों का रुझान धान की खेती में बढ़ने की संभावना है।
अब तक करीब पांच हजार हेक्टेयर से अधिक में रोपाई शुरू हो चुकी है। हमने 50 हजार हेक्टेयर का टारगेट रखा है, लेकिन इस बार कपास का रकबा घटने और अच्छी बरसात की संभावना के कारण धान की रोपाई टारगेट से अधिक जा सकती है। हालांकि इस बार ग्वार, मूंग, चना, बाजरा आदि पर भी लोग फोकस कर रहे हैं, जोकि अच्छी पहल है।
- डॉ. प्रवीन मंडल, कृषि विशेषज्ञ
हांसी में दो हजार हेक्टेयर धान की फसल होगी अधिक
अगर इस बार मानसून बढ़िया हुआ तो हांसी में दो हजार हेक्टेयर में धान की फसल अधिक रोपी जाएगी। जिले में हांसी में सर्वाधिक धान की खेती होती है। इसके अलावा नारनौंद और बरवाला के कुछ क्षेत्रों में भी धान की खेती होती है। हांसी में इस बार खेतों में एक हजार 50 हेक्टेयर धान नर्सरी से ट्रांसप्लांट की जा चुकी है। 42 हजार हेक्टेयर में रोपाई की संभावना है, जबकि लक्ष्य 40 हजार हेक्टेयर है।
एक से सवा महीने में तैयार होती है पौध
हांसी उपमंडल के कृषि अधिकारी वजीर सिंह चौहान ने बताया कि खेतों में धान की फसल ट्रांसप्लांट करने से पहले इसे एक से सवा महीने तक नर्सरी में रखना पड़ता है।
जुलाई के अंत तक कर सकेंगे रोपाई
धान की फसल की साल में एक बार पैदावार ली जाती है। जुलाई के आरंभ में इसकी बुआई की जाती है, जोकि पूरे माह तक चलती है। इसके बाद अक्तूबर माह के अंत में फसल की कटाई की जाती है।
क्यों खास है हांसी
- जिले की 80 फीसदी धान हांसी में होती।
- खाड़ी देश ईराक, ईरान, कुवैत आदि देशों में हांसी के चावल का निर्यात होता है।
- नहरी पानी के कारण हांसी और करनाल का चावल अच्छा होने के कारण मांग अधिक है।
पिछली बार कपास बोई थी। सफेद मक्खी के कारण पूरी फसल बर्बाद हो गई थी और फसल की लागत भी पूरी नहीं हुई थी। इस बार धान की रोपाई कर रहा हूं।
- हंसराज, किसान, चंदननगर