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केले की खेती के लिए हिसार की जलवायु उपयुक्त
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हिसार। एएचयू की पौधशाला में विकसित केले का फल दो दिवसीय कृषि मेला में भी प्रदर्शित किया गया।
- फोटो : Hisar
उदयभान त्रिपाठी
हिसार। हरियाणा में केले की खेती कम ही होती है, लेकिन एचएयू के वैज्ञानिकों ने केले की खेती के लिए हिसार के जलवायु को उपयुक्त पाया है। नमी युक्त मिट्टी व 15 से 35 डिग्री तापमान में केले के पौधे न केवल तेजी से बढ़ते हैं, बल्कि उनके फल भी अधिक पौष्टिक होते हैं। एचएयू के जैविक फार्म में इसका प्रयोग सफल रहा है। यहां टिश्यू कल्चर विधि से पौधे भी तैयार होने लगे हैं। किसान केले की खेती के लिए विश्वविद्यालय से पांच रुपये में अच्छी क्वालिटी के पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि मेले में इसकी प्रदर्शनी लगाने वाले एएचयू के प्रो. सुरेश ने बताया कि केले की खेती के लिए हिसार व आसपास के जिलों की जलवायु उत्तम है। यहां कि मिट्टी भी इसके लिए मुफीद है। टिश्यू कल्चर से इसके लिए पौधे विकसित किए जा रहे हैं। केले की खेती के लिए नमी वाली मिट्टी व 15 से 35 डिग्री धूप की जरूरत होती है, जो यहां सामान्य रूप से उपलब्ध है। केले की सबसे अच्छी खेती यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु में होती है। हालांकि अत्यधिक ठंडे व अत्यधिक गर्म क्षेत्र के अलावा जलभराव या सूखे इलाके में इसकी खेती कम होती है।
अब जाड़े वाली प्रजाति पर कर रहे शोध
डॉ. सुरेश ने बताया कि अभी जो प्रजाति अपने यहां के लिए अनुकूल है उसकी रोपाई फरवरी में की जाती है। यह केला नवंबर में तैयार हो जाएगा। इसकी सफलता के बाद नया रिसर्च जाड़े में रोपाई के लिए उपयुक्त प्रजाति पर चल रही है। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। विकसित प्रजाति को बीमारी से बचाने व अत्यधिक सर्दी बर्दाश्त करने योग्य बनाकर किसानों को देने से पहले अपने फार्म में रोपाई कर उसका परिणाम देखना होगा। इस दिशा में काम चल रहा है।
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केला को तत्काल मिलेगा बाजार
फल विक्रेता ब्रजेश बंटी व बाबूलाल ने बताया कि हिसार में फलों की खूब मांग है, लेकिन आवक दूसरी जगहों से होती है। केले की आपूर्ति भी यूपी से होती है। अगर हरियाणा में उत्पादन शुरू हो जाए तो रेट में कमी आएगी। इससे डिमांड और बढ़ेगी। इसका फायदा व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को भी होगा। व्यापारी खेत में ही पहुंचकर केला खरीद लेंगे।
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हिसार। हरियाणा में केले की खेती कम ही होती है, लेकिन एचएयू के वैज्ञानिकों ने केले की खेती के लिए हिसार के जलवायु को उपयुक्त पाया है। नमी युक्त मिट्टी व 15 से 35 डिग्री तापमान में केले के पौधे न केवल तेजी से बढ़ते हैं, बल्कि उनके फल भी अधिक पौष्टिक होते हैं। एचएयू के जैविक फार्म में इसका प्रयोग सफल रहा है। यहां टिश्यू कल्चर विधि से पौधे भी तैयार होने लगे हैं। किसान केले की खेती के लिए विश्वविद्यालय से पांच रुपये में अच्छी क्वालिटी के पौधे प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि मेले में इसकी प्रदर्शनी लगाने वाले एएचयू के प्रो. सुरेश ने बताया कि केले की खेती के लिए हिसार व आसपास के जिलों की जलवायु उत्तम है। यहां कि मिट्टी भी इसके लिए मुफीद है। टिश्यू कल्चर से इसके लिए पौधे विकसित किए जा रहे हैं। केले की खेती के लिए नमी वाली मिट्टी व 15 से 35 डिग्री धूप की जरूरत होती है, जो यहां सामान्य रूप से उपलब्ध है। केले की सबसे अच्छी खेती यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु में होती है। हालांकि अत्यधिक ठंडे व अत्यधिक गर्म क्षेत्र के अलावा जलभराव या सूखे इलाके में इसकी खेती कम होती है।
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अब जाड़े वाली प्रजाति पर कर रहे शोध
डॉ. सुरेश ने बताया कि अभी जो प्रजाति अपने यहां के लिए अनुकूल है उसकी रोपाई फरवरी में की जाती है। यह केला नवंबर में तैयार हो जाएगा। इसकी सफलता के बाद नया रिसर्च जाड़े में रोपाई के लिए उपयुक्त प्रजाति पर चल रही है। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। विकसित प्रजाति को बीमारी से बचाने व अत्यधिक सर्दी बर्दाश्त करने योग्य बनाकर किसानों को देने से पहले अपने फार्म में रोपाई कर उसका परिणाम देखना होगा। इस दिशा में काम चल रहा है।
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