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Hisar News: हवलदार कर्मबीर पान्नू का थुराना में हुआ सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
Wed, 17 Dec 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Wed, 17 Dec 2025 01:00 AM IST
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नारनौंद। शहीद के अंतिम संस्कार के दौरान सैन्य सम्मान देते सेना के जवान।
नारनौंद (हिसार)। भारतीय सेना की महार रेजिमेंट की सातवीं बटालियन में तैनात हवलदार कर्मबीर पान्नू (41) का ड्यूटी के दौरान सोमवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वहीं, हवलदार का मंगलवार को उनके पैतृक गांव थुराना में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो भारत माता की जय और कर्मबीर पान्नू अमर रहे के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। हर किसी की आंखें नम थीं लेकिन दिल में गर्व था कि गांव का बेटा देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर अमर हो गया।
सैन्य कर्मी कर्मबीर पान्नू जम्मू के सुजवान कैंप में तैनात थे। शहीद कर्मबीर सिंह 11 जुलाई 2003 को भारतीय सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उन्होंने अपने सेवाकाल में देश सेवा को सर्वोपरि रखा और अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। उनके पिता हवा सिंह का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनकी मां बर्जी, पत्नी सुनीता, 15 वर्षीय बेटी कनिका और 12 साल का बेटा तनुज है। शहीद के बड़े भाई सुरेश खेती-बाड़ी का कार्य करते हैं। उनके निधन की खबर जैसे ही गांव और क्षेत्र में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई।
फूल बरसाकर सैन्यकर्मी को दी श्रद्धांजलि
मंगलवार दोपहर उनका पार्थिव देह सेना के वाहन से गांव थुराना पहुंचा। गांव के प्रवेश द्वार से लेकर शहीद के घर तक सैकड़ों वाहनों का काफिला वंदेमातरम् और भारत माता की जय के नारों से गूंजता रहा। घर पर पार्थिव देह के पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। मां, पत्नी और बेटा बेटी का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। रास्ते में लोग फूल बरसाकर उनहें श्रद्धांजलि दे रहे थे। कर्मबीर पान्नू अमर रहें के नारों के बीच जब तनुज ने पिता को मुखाग्नि दी, तो पूरा गांव गमगीन हो गया। भारत माता के सपूत की विदाई पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम सलामी दी। वहीं, प्रशासन की तरफ से नारनौंद के एसडीएम विकास यादव ने पहुंचकर सैन्य कर्मी को श्रद्धांजलि दी। वही, विधायक विनोद भयाना ने कहा कि कर्मबीर पान्नू एक सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए, यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
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गांव में पसरा मातम पर दिलों में गर्व
हवलदार कर्मबीर पान्नू की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। हर घर में शोक, हर आंख नम। मगर, जब सेना की सलामी के बीच अंतिम यात्रा निकली तो हर चेहरे पर गर्व की चमक थी। ग्रामीणों ने कहा कि हमारा बेटा भले चला गया, लेकिन वह देश के दिल में हमेशा जिंदा रहेगा।
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सैन्य कर्मी कर्मबीर पान्नू जम्मू के सुजवान कैंप में तैनात थे। शहीद कर्मबीर सिंह 11 जुलाई 2003 को भारतीय सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उन्होंने अपने सेवाकाल में देश सेवा को सर्वोपरि रखा और अनुशासन व कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। उनके पिता हवा सिंह का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में उनकी मां बर्जी, पत्नी सुनीता, 15 वर्षीय बेटी कनिका और 12 साल का बेटा तनुज है। शहीद के बड़े भाई सुरेश खेती-बाड़ी का कार्य करते हैं। उनके निधन की खबर जैसे ही गांव और क्षेत्र में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई।
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फूल बरसाकर सैन्यकर्मी को दी श्रद्धांजलि
मंगलवार दोपहर उनका पार्थिव देह सेना के वाहन से गांव थुराना पहुंचा। गांव के प्रवेश द्वार से लेकर शहीद के घर तक सैकड़ों वाहनों का काफिला वंदेमातरम् और भारत माता की जय के नारों से गूंजता रहा। घर पर पार्थिव देह के पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया। मां, पत्नी और बेटा बेटी का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भीड़ उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। रास्ते में लोग फूल बरसाकर उनहें श्रद्धांजलि दे रहे थे। कर्मबीर पान्नू अमर रहें के नारों के बीच जब तनुज ने पिता को मुखाग्नि दी, तो पूरा गांव गमगीन हो गया। भारत माता के सपूत की विदाई पर हजारों लोगों ने नम आंखों से अंतिम सलामी दी। वहीं, प्रशासन की तरफ से नारनौंद के एसडीएम विकास यादव ने पहुंचकर सैन्य कर्मी को श्रद्धांजलि दी। वही, विधायक विनोद भयाना ने कहा कि कर्मबीर पान्नू एक सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए, यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
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गांव में पसरा मातम पर दिलों में गर्व
हवलदार कर्मबीर पान्नू की मौत की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया। हर घर में शोक, हर आंख नम। मगर, जब सेना की सलामी के बीच अंतिम यात्रा निकली तो हर चेहरे पर गर्व की चमक थी। ग्रामीणों ने कहा कि हमारा बेटा भले चला गया, लेकिन वह देश के दिल में हमेशा जिंदा रहेगा।