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बेबीकॉर्न की खेती के दम पर स्थापित की चार फैक्टरियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 12:42 AM IST
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Four factories established on the basis of babycorn cultivation
कंवल सिंह चौहान। - फोटो : Hisar
पिंकू यादव
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हिसार। खेती भी फायदे को सौदा साबित हो रही है। सोनीपत के अटेरना निवासी किसान कंवल सिंह चौहान ने धान को छोड़कर मक्का की बेबी कॉर्न किस्त की खेती की। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई। आज उनकी खुद की चार फैक्टरियां हैं, जिनमें करीब 250 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन फैक्ट्रियों में तैयार उत्पाद को वह विदेश में भी भेजते हैं। कंवल सिंह की मानें तो इस फसल के लिए एक एकड़ में करीब 15000 रुपये की लागत आती और 50 हजार तक आमदनी हो जाती है। पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित प्रगतिशील किसान ने संवाददाता से खास बातचीत की।
पहले दिल्ली में बेची फसल, फिर खुद के प्रोडक्ट किए तैयार
किसान कंवलजीत ने बताया की उन्होंने शुरुआत में धान की खेती की थी। वर्ष 1998 में कुछ लोगों ने उनके पड़ोस में बेबी कॉर्न की खेती की थी। इसके बाद उन्होंने इसमें मुनाफा देखकर खुद भी बेबी कॉर्न की खेती शुरू की, क्योंकि उन्हें धान की खेती से नुकसान हुआ था। कंवल सिंह ने बताया कि उन्होंने खेती शुरू की तो उनके पड़ोस में कई लोगों ने बेबी कॉर्न की खेती शुरू कर दी। धीरे-धीरे आसपास के गांव में बेबी कॉर्न की खेती होने लगी। बेबी कॉर्न की खेती करने के लिए उन्हें प्रगतिशील किसान के लिए पद्मश्री अवॉर्ड भी दिया गया। उन्होंने शुरुआत में दिल्ली में बेबी कॉर्न बेची। इसके बाद मांग घटने लगी तो उन्होंने खुद के प्रोडक्ट बनाने शुरू कर दिए। वर्ष 2009 में उन्होंने अपनी प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज यूनिट तैयार की। इसमें बाद भी तीन और यूनिट खोली। संवाद
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बेबी कॉर्न मक्का की अच्छी किस्म
विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मेहर चंद ने बताया कि बेबी कॉर्न मक्का की अच्छी किस्म है। बेबी कॉर्न को कच्चा प्रोसेस कर उत्पाद बनाकर बेचा जा सकता है। विश्वविद्यालय ने उच्च गुणवत्ता वाले मक्का की चार किस्में विकसित की हैं, जिनमें एचक्यूपीएम 2, एचक्यूपीएम 7 सहित अन्य दो किस्म हैं।
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साइलेज से मिल जाता है हरा चारा
डॉ. मेहरचंद ने बताया कि मक्का द्वारा बनाया गया साइलेज सभी फसलों से अच्छा होता है। इसके दो फायदे हैं एक तो चारे की आवश्यकता नहीं पड़ती। दूसरा हरा चारा उपलब्ध न हो तो किसानों को इस फसल से उच्च गुणवत्ता वाला चारा मिल जाता है। किसान समूह बनाकर इस का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। पंजाब में साइलेज का 100 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। हरियाणा में भी किसान साइलेज का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

दिसंबर-जनवरी छोड़ पूरे वर्ष उगा सकते हैं बेबी कॉर्न
एचएयू द्वारा विकसित एचक्यूपीएम 4 साइलेज के लिए सर्वश्रेष्ठ किस्म है। मक्का के लिए खरीफ में 25 जून से 20 जुलाई, रबी सीजन में 25 अक्तूबर से 20 नवंबर तक और बसंत ऋतु में जनवरी के आखिरी सप्ताह से 15 फरवरी तक उगाया जा सकता है। बेबी कॉर्न को दिसंबर से जनवरी को छोड़कर पूरे वर्ष उगा सकते हैं। बेबी कॉर्न की फसल से सात से आठ क्विंटल बेबी कॉर्न और लगभग 100 क्विंटल हरा चारा उपलब्ध हो जाता है। इसी तरह स्वीट कॉर्न की फसल से 50 से 60 क्विंटल हरी छली और 80 से 100 क्विंटल हरा चारा प्रति एकड़ प्राप्त होता है।
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