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राखीगढ़ी में हड़प्पाकालीन पांच हजार साल पुराना मकान मिला
सज्जन सैनी, नारनौंद
Updated Tue, 11 Mar 2014 12:11 AM IST
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राखीगढ़ी में हड़प्पाकालीन संस्कृति के टीलों की खुदाई के दौरान विशेषज्ञों को उस समय का कच्ची ईंटों से बना हुआ एक मकान मिला है। पुरातत्व के जानकार इसको बड़ी कामयाबी मान रहे हैं।
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यहां पर इन दिनों डैकन यूनिवर्सिटी पूना और एमडीयू रोहतक के विद्यार्थी खुदाई में लगे हुए हैं और उन्हें काफी बहुमूल्य चीजें मिल रही हैं।
डैकन यूनिवर्सिटी पूना के चांसलर जीबी देगलूरकर ने बताया कि जिस भी जगह विद्यार्थी खुदाई करने के लिए जाते हैं तो वो भी वहां पर उन्हें देखने के लिए जाते हैं। राखीगढ़ी की साइट देखने को वो काफी उत्सुक थे और उन्हें काफी सालों के बाद यह मौका मिला है।
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राखी गढ़ी के टीलों की खुदाई में डैकन यूनिवर्सिटी और एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक के दर्जनों छात्र लगे हुए हैं। खुदाई की शुरुआत में कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी सिर्फ मिट्टी की चूड़ियां और मनके ही निकले थे।
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ज्यों-ज्यों खुदाई गहरी होती गई तो खुदाई में सामने आया कि मिट्टी की ईंटों से दीवारें बनी हुई है। जब उसको और गहराई से खोदा गया तो सामने आया कि वहां कच्ची ईंटों का मकान है।
मकान में कुल सात कमरे मिलने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो कच्ची मिट्टी की दीवार निकली है, वो करीब पांच हजार वर्ष पुरानी संस्कृति की झलक दिखा रही है।
उस समय के लोग ईंटें 30 बाई 15 साइज की बनाते थे और उनकी ऊंचाई साढे़ सात ईंच होती थी। वहीं दीवारें भी अलग-अलग साइज में बनाई जाती थी, जिनमें कुछ दीवारें 160 ईंच, 80 ईंच और 30 ईंच की भी हैं।
यह ईंटें पीली मिट्टी की बनाई हुई हैं जो अभी तक भी मजबूत स्थिति में हैं और दीवारों की चिनाई भी पीली मिट्टी से ही की हुई है।
पाए गए मकान के स्नान घर में पक्की ईंटों का इस्तेमाल किया हुआ है और पानी की निकासी के लिए बनी नालियों में भी पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया है।
पक्की ईंटें भी ज्यों की त्यों हैं। वहीं स्नान घर के पानी की निकासी जमीनी पानी के लेवल के अंदर ही की हुई थी।