{"_id":"5f99c6068ebc3eefbc77f1b2","slug":"fire-in-duping-station-injurious-for-health-hisar-news-rtk5805027177","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढंढूर कचरा केंद्र की आग बनी आफत, लोगों का फूल रहा दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढंढूर कचरा केंद्र की आग बनी आफत, लोगों का फूल रहा दम
विज्ञापन
ढंढूर डंपिंग स्टेशन से उठता धुआं तथा धुएं के कारण सड़क पर लाइट जलाकर गुजरते वाहन चालक।
- फोटो : Hisar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। पराली जलाने को लेकर लगातार कार्रवाई करने वाली सरकार और जिला प्रशासन से नाक के नीचे ढंढूर में टनों कचरे में लगी आग नहीं बुझ पा रही है। ढंढूर डंपिंग स्टेशन (कचरा केंद्र) पर लगातार 10वें दिन भी आग लगी रही और स्थानीय लोगों का दम फूलता रहा।
हालांकि बुधवार को नगर निगम ने करीब 50 ट्रॉली मिट्टी कचरे पर डलवाई, लेकिन आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। कचरे में लगे धुएं के कारण शाम के समय स्मॉग का कहर ढंढूर गांव पर टूटने लगता है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ाने में भी ढंढूर डंपिंग स्टेशन पर लगी आग की भूमिका मुख्य है। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया।
गांव के लोग दमे और टीबी के हो रहे शिकार
गांव के सरपंच मनोज कुमार ने बताया कि पिछले 10 दिनों से यहां आग लगी हुई है, जिससे ढंढूर के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी धुएं से परेशान हैं। इस जहरीले धुएं के कारण अब तक गांव में ही 100 से अधिक लोग टीबी और दमे का शिकार हो चुके हैं।
विज्ञापन
हाइवे पर धुआं, हादसों को दे रहा न्योता
डंपिंग स्टेशन के साथ ही हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ बाईपास बने हुए हैं। यहां से निकलने वाले वाहनों को धुएं के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस धुएं के कारण यहां कई बार हादसे हो चुके हैं। यहां से निकलने वाले धुएं और दुर्गंध का आलम यह है कि दुपहिया वाहन चालकों को मुंह पर कपड़ा बांधकर निकलना पड़ता है।
जहां निगम की नंदीशाला, वहीं हाईवे पर घूम रही गायें
शहर में घूम रही गायों को पकड़ कर रखने के लिए नगर निगम ने ढंढूर में ही नंदीशाला बनाई हुई है, लेकिन यहीं हाईवे पर बड़ी संख्या में गायें घूम रही हैं। ये गायें हादसों को न्योता दे रही हैं। ये गायें डंपिंग स्टेशन के पास खड़ी रहती हैं और कचरा जलने के कारण हुए धुएं के बीच से सड़क पर दिखाई नहीं देतीं। धुएं और इन गायों की वजह से डंपिंग स्टेशन के पास हादसे होते हैं।
कूड़ा जलाने से निकलती हैं ये गैसें
कूड़ा जलाने से कई जहरीली गैसें निकलती हैं। इनमें कार्बन डाईऑक्साइड व कार्बन मोनोक्साइड गैसें मुख्य हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक मानी जाती हैं। वातावरण में इन गैसों की अधिकता से सांस से बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। ढंढूर डंपिंग स्टेशन के कूड़े में कागज, घासफूस से लेकर प्लास्टिक, टायर व इलेक्ट्रॉनिक्स आदि हर तरह का कचरा जलता है जो एलर्जी, दमा, टीबी, कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बनता है।
10 दिनों से लगी है आग
10 दिनों से आग लगी हुई है और तीन दिन से यह बुझ नहीं पा रही है। सोमवार को आंदोलन किया था तो कमिश्नर ने कहा था कि इसे मिट्टी से ढक देंगे। बुधवार को मिट्टी डालने का काम शुरू किया गया है और करीब 50 ट्रॉली मिट्टी डाली गई है।
- मनोज कुमार, सरपंच, ढंढूर।
------------
संदीप बिश्नोई
विज्ञापन
हालांकि बुधवार को नगर निगम ने करीब 50 ट्रॉली मिट्टी कचरे पर डलवाई, लेकिन आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। कचरे में लगे धुएं के कारण शाम के समय स्मॉग का कहर ढंढूर गांव पर टूटने लगता है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ाने में भी ढंढूर डंपिंग स्टेशन पर लगी आग की भूमिका मुख्य है। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया।
विज्ञापन
गांव के लोग दमे और टीबी के हो रहे शिकार
गांव के सरपंच मनोज कुमार ने बताया कि पिछले 10 दिनों से यहां आग लगी हुई है, जिससे ढंढूर के अलावा आसपास के गांवों के लोग भी धुएं से परेशान हैं। इस जहरीले धुएं के कारण अब तक गांव में ही 100 से अधिक लोग टीबी और दमे का शिकार हो चुके हैं।
विज्ञापन
हाइवे पर धुआं, हादसों को दे रहा न्योता
डंपिंग स्टेशन के साथ ही हिसार-सिरसा और हिसार-चंडीगढ़ बाईपास बने हुए हैं। यहां से निकलने वाले वाहनों को धुएं के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस धुएं के कारण यहां कई बार हादसे हो चुके हैं। यहां से निकलने वाले धुएं और दुर्गंध का आलम यह है कि दुपहिया वाहन चालकों को मुंह पर कपड़ा बांधकर निकलना पड़ता है।
जहां निगम की नंदीशाला, वहीं हाईवे पर घूम रही गायें
शहर में घूम रही गायों को पकड़ कर रखने के लिए नगर निगम ने ढंढूर में ही नंदीशाला बनाई हुई है, लेकिन यहीं हाईवे पर बड़ी संख्या में गायें घूम रही हैं। ये गायें हादसों को न्योता दे रही हैं। ये गायें डंपिंग स्टेशन के पास खड़ी रहती हैं और कचरा जलने के कारण हुए धुएं के बीच से सड़क पर दिखाई नहीं देतीं। धुएं और इन गायों की वजह से डंपिंग स्टेशन के पास हादसे होते हैं।
कूड़ा जलाने से निकलती हैं ये गैसें
कूड़ा जलाने से कई जहरीली गैसें निकलती हैं। इनमें कार्बन डाईऑक्साइड व कार्बन मोनोक्साइड गैसें मुख्य हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक मानी जाती हैं। वातावरण में इन गैसों की अधिकता से सांस से बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। ढंढूर डंपिंग स्टेशन के कूड़े में कागज, घासफूस से लेकर प्लास्टिक, टायर व इलेक्ट्रॉनिक्स आदि हर तरह का कचरा जलता है जो एलर्जी, दमा, टीबी, कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बनता है।
10 दिनों से लगी है आग
10 दिनों से आग लगी हुई है और तीन दिन से यह बुझ नहीं पा रही है। सोमवार को आंदोलन किया था तो कमिश्नर ने कहा था कि इसे मिट्टी से ढक देंगे। बुधवार को मिट्टी डालने का काम शुरू किया गया है और करीब 50 ट्रॉली मिट्टी डाली गई है।
- मनोज कुमार, सरपंच, ढंढूर।
------------
संदीप बिश्नोई