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हिसार: जन्म से पहले ही उठा पिता का साया, अब हैंडबाल में पहचान बना मां की तमन्ना की पूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Feb 2023 11:41 PM IST
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Father's shadow raised even before birth, now identity in handball fulfills mother's wish
तमन्ना
हिसार। लाडवा गांव की बेटी तमन्ना नैन हैंडबाल में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुकी है। जब वह मां की कोख में थी तो पिता दलबीर सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। 10 साल पहले मां ने हैंडबाल देकर बेटी को खेल के मैदान में भेजा। आज बेटी ने पदक जीतकर मां के सपनों को साकार किया है। तमन्ना 2016 व 2017 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। अब उसका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतना है। तमन्ना ने लाडवा में बाबा निहालगिरि राष्ट्रीय हैंडबाल कप में हिस्सा लिया।
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तमन्ना बताती है कि वह दो बार सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीत चुकी है। मां राजबाला आंगनबाड़ी में वर्कर है। तमन्ना का भाई प्रवीण खेतीबाड़ी करता है। मां और बेटा किसी न किसी तरह परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। मगर विपरीत परिस्थितियों में भी तमन्ना ने हार नहीं मानी और मैदान में डटी रही। फिलहाल तमन्ना गांव में अपने मामा विक्रम पूनिया के पास रह रही है। वह बताती है कि गांव में सीनियर खिलाड़ियों को खेलता देखा तो मां ने उसे भी मैदान में भेज दिया। वह बताती है कि कोच महावीर पूनिया ने भी खेलने के लिए प्रेरित किया। मां और कोच की वजह से ही आज वह यहां तक पहुंच पाई है।
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खेल के दम पर खिलाड़ियों की लगी जॉब तो सोनिका मैदान में उतरी
लाडवा की राष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी सोनिका गिल 8 साल से हैंडबाल खेल रही हैं। पिता सतबीर सिंह किसान जबकि माता शारदा गृहिणी हैं। सोनिका का छोटा भाई प्रवीन भी नेशनल स्तर पर हैंडबाल खेल चुका है। सोनिका बताती है कि गांव लाडवा में काफी खिलाड़ियों ने खेल के दम पर नौकरी हासिल की तो उसने भी हैंडबाल को अपना कॅरियर बनाया और मैदान में उतर गई। सोनिका बताती है कि परिवार के सदस्यों ने भी उसे खेल में आगे बढ़ाने के लिए काफी प्रेरित किया। वह सीनियर नेशनल में कांस्य व खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीत चुकी है।
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मंजिल का सपना परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना
लाडवा की नेशनल मेडलिस्ट खिलाड़ी मंजिल सात साल से हैंडबाल खेल रही है। जब मंजिल ने हैंडबाल की शुरुआत की तो रिश्तेदारों व पड़ोसियों ने उसे खेलने से मना कर दिया। वह कहते थे कि खेल में कुछ नहीं रखा है, मगर मंजिल की दादी नन्ही जिद पर अड़ गई और उसे मैदान में खेलने के लिए भेजा। मंजिल अब तक छह नेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं। इसमें से चार में स्वर्ण व एक में रजत पदक हासिल किया। वह लाडवा में कोच महावीर पूनिया, अशोक पूनिया, संदीप पूनिया व नवीन पूनिया के पास प्रशिक्षण ले रही है। मंजिल का सपना है कि खेल के दम पर उसकी नौकरी लगे और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करे। मंजिल के पिता बलवान सिंह किसान है।

तमन्ना

तमन्ना

तमन्ना

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