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रामायण टोल प्लाजा को आज शाम पांच बजे खाली कर देंगे किसान
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हिसार- सिरसा रोड पर मंगलवार शाम को टोल शुरू होने के बाद लगी वाहनों की कतारें
- फोटो : Hisar
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हांसी। कृषि कानून रद्द होने पर रामायण टोल प्लाजा पर चल रहा किसानों का धरना 381 दिन बाद मंगलवार को समाप्त हो गया। बुधवार शाम पांच बजे टोल को किसान पूरी तरह से खाली कर देंगे। किसान नेता राकेश टिकैत, युद्धवीर सिंह सहरावत, गुरनाम सिंह चढूनी, जोगेंद्र उगराहा, दलजीत दलेवाल, प्रेम सिंह मलिक, अभिमन्यु कुहाड़ सहित अन्य किसान नेताओं का पगड़ी व फूल मालाओं के साथ स्वागत किया।
राकेश टिकैत ने कहा कि जब भी आंदोलन को जरूरत पड़ी हरियाणा की धरती ने नई ताकत दी। आंदोलन में जान गंवाने वाले 800 किसानों को यह ऐतिहासिक जीत समर्पित है। उन्होंने टोल कंपनी को चेताया कि अगर बेहिसाब टोल टैक्स बढ़ाने की कोशिश की तो फिर से टोल को जाम कर देंगे। युद्धवीर सहरावत ने कहा कि किसानों ने आंदोलन समाप्त नहीं स्थगित किया है। 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगामी रणनीति तय होगी।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर 264 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से आधे मुकदमे हरियाणा के किसानों के खिलाफ हैं। आप लोग इस आंदोलन में सबसे बड़े किसान बनकर उभरे हैं। पूरे हरियाणा में लगभग 48000 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए। पिछले 15 साल में लगभग 4 लाख किसानों ने कर्ज के कारण आत्महत्या की। आज का युवा 5000 रुपये महीने में नौकरी करने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि जिला परिषद व निकाय चुनाव में किसान आंदोलन में सहयोग करने वालों को आगे बढ़ाएं। वही व्यक्ति आपकी आवाज को उठा सकता है। इस अवसर पर विकास सीसर, जिला प्रधान कुलदीप खरड़, सुदेश गोयत, दशरथ मलिक, रामकुमार सूबेदार, कैलाश मलिक, दिलबाग हुड्डा आदि मौजूद रहे।
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किसानों की हुई बड़ी जीत पर लड़ाई अभी बाकी
नारनौंद। सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा, यह किसानों की बड़ी जीत है। किसानों को उभारने के लिए आगे की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। यह बात किसान नेता राकेश टिकैत ने माजरा प्याऊ पर धरने को समाप्त करवाते हुए कही।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल तक किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे। आखिरकार देश के प्रधानमंत्री ने गुरु पर्व पर आंदोलन को देखते हुए कृषि के तीनों कानूनों को वापस लेने का एलान किया। किसानों की जो भी मांग थी, वह सरकार ने काफी हद तक पूरी कर दी, मगर एमएसपी पर अभी भी किसानों की लड़ाई बाकी है। इस मौके पर युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहड़,जगबीर सिंह, सरपंच रामकेश, दीपक, कृष्ण माढ़ा, धर्मपाल, सतबीर पंघाल, सिल्लू ढांडा, अवतार सिंह, जसवंत, मनदीप, देवेंद्र, फूलकुमार पेटवाड़, सत्यवान दूहन मौजूद रहे। संवाद
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राकेश टिकैत ने कहा कि जब भी आंदोलन को जरूरत पड़ी हरियाणा की धरती ने नई ताकत दी। आंदोलन में जान गंवाने वाले 800 किसानों को यह ऐतिहासिक जीत समर्पित है। उन्होंने टोल कंपनी को चेताया कि अगर बेहिसाब टोल टैक्स बढ़ाने की कोशिश की तो फिर से टोल को जाम कर देंगे। युद्धवीर सहरावत ने कहा कि किसानों ने आंदोलन समाप्त नहीं स्थगित किया है। 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगामी रणनीति तय होगी।
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर 264 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से आधे मुकदमे हरियाणा के किसानों के खिलाफ हैं। आप लोग इस आंदोलन में सबसे बड़े किसान बनकर उभरे हैं। पूरे हरियाणा में लगभग 48000 लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए। पिछले 15 साल में लगभग 4 लाख किसानों ने कर्ज के कारण आत्महत्या की। आज का युवा 5000 रुपये महीने में नौकरी करने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि जिला परिषद व निकाय चुनाव में किसान आंदोलन में सहयोग करने वालों को आगे बढ़ाएं। वही व्यक्ति आपकी आवाज को उठा सकता है। इस अवसर पर विकास सीसर, जिला प्रधान कुलदीप खरड़, सुदेश गोयत, दशरथ मलिक, रामकुमार सूबेदार, कैलाश मलिक, दिलबाग हुड्डा आदि मौजूद रहे।
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किसानों की हुई बड़ी जीत पर लड़ाई अभी बाकी
नारनौंद। सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा, यह किसानों की बड़ी जीत है। किसानों को उभारने के लिए आगे की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। यह बात किसान नेता राकेश टिकैत ने माजरा प्याऊ पर धरने को समाप्त करवाते हुए कही।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल तक किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे। आखिरकार देश के प्रधानमंत्री ने गुरु पर्व पर आंदोलन को देखते हुए कृषि के तीनों कानूनों को वापस लेने का एलान किया। किसानों की जो भी मांग थी, वह सरकार ने काफी हद तक पूरी कर दी, मगर एमएसपी पर अभी भी किसानों की लड़ाई बाकी है। इस मौके पर युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहड़,जगबीर सिंह, सरपंच रामकेश, दीपक, कृष्ण माढ़ा, धर्मपाल, सतबीर पंघाल, सिल्लू ढांडा, अवतार सिंह, जसवंत, मनदीप, देवेंद्र, फूलकुमार पेटवाड़, सत्यवान दूहन मौजूद रहे। संवाद