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Hisar News: अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने की मांग के लिए किसानों ने घेरा लघु सचिवालय
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भारतीय किसान यूनियन के सदस्य रोष प्रदर्शन करते हुए। संवाद
हिसार। अमेरिका ट्रेड डील को रद्द करने की मांग के लिए भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले किसानों ने मंगलवार को लघु सचिवालय का घेराव किया। किसानों ने क्रांतिमान पार्क से लघु सचिवालय तक पैदल विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन को देखते हुए लघु सचिवालय के दोनों गेट बंद कर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। करीब दो घंटे तक दोनों गेट बंद रहने से कर्मचारियों, अधिकारियों और आम लोगों को पिछले गेट से आवाजाही करनी पड़ी।
प्रदर्शन के दौरान किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहादुरी दिखाते हुए अमेरिका का विरोध करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिका के दबाव में हैं और इसी कारण भारत के किसानों को नुकसान पहुंचाने वाली अमेरिकी ट्रेड डील की गई है।
उन्होंने कहा कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद सस्ती दरों पर भारत में आएंगे तो देश के किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। इससे करोड़ों किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं और देश की खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने मांग की कि इस ट्रेड डील को तुरंत वापस लिया जाए।
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गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है और दवाइयों की कीमतों पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और जांच सुविधाओं की कमी से आमजन परेशान है। उन्होंने मांग की कि आम जनता को भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की तरह मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
उन्होंने निजी स्कूलों में बढ़ती फीस, हर साल किताबें बदलने और निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने की शर्तों को गलत बताया। किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी देने, भावांतर योजना के बजाय सरकार द्वारा एक-एक दाने की खरीद सुनिश्चित करने और किसानों की पूर्ण कर्जमाफी की मांग भी उठाई गई। किसान नेता ने 23 मार्च को कुरुक्षेत्र के पीपली में प्रस्तावित आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान भी किया।
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प्रदर्शन के दौरान किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहादुरी दिखाते हुए अमेरिका का विरोध करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अमेरिका के दबाव में हैं और इसी कारण भारत के किसानों को नुकसान पहुंचाने वाली अमेरिकी ट्रेड डील की गई है।
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उन्होंने कहा कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद सस्ती दरों पर भारत में आएंगे तो देश के किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। इससे करोड़ों किसान आर्थिक संकट में फंस सकते हैं और देश की खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है। उन्होंने मांग की कि इस ट्रेड डील को तुरंत वापस लिया जाए।
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गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है और दवाइयों की कीमतों पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और जांच सुविधाओं की कमी से आमजन परेशान है। उन्होंने मांग की कि आम जनता को भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की तरह मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए।
उन्होंने निजी स्कूलों में बढ़ती फीस, हर साल किताबें बदलने और निर्धारित दुकानों से ही सामान खरीदने की शर्तों को गलत बताया। किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी देने, भावांतर योजना के बजाय सरकार द्वारा एक-एक दाने की खरीद सुनिश्चित करने और किसानों की पूर्ण कर्जमाफी की मांग भी उठाई गई। किसान नेता ने 23 मार्च को कुरुक्षेत्र के पीपली में प्रस्तावित आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान भी किया।