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Hisar: फूलों की खेती ने जिंदगी में भरे रंग, स्वागत में पहनाई माला के बीजों से पहली बार घर पर ही उगाए थे फूल

Mon, 02 Jan 2023 06:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह राजबीर गोदारा, अग्रोहा, हिसार (हरियाणा)
राजबीर गोदारा, अग्रोहा, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 02 Jan 2023 06:01 AM IST
सार

किराड़ा गांव निवासी भूप सिंह सैनी ने पंरपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती शुरू की है। फूलों की खेती में प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपये का मुनाफा हो रहा है। 

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Farmer Bhoop Singh Saini of Hisar left traditional farming and start flower farming
किसान भूप सिंह सैनी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

कहा जाता है कि एक आइडिया आपकी जिंदगी बदल सकता है। यह बात हिसार के गांव किराड़ा निवासी किसान भूप सिंह सैनी ने सटीक बैठती है। भूप सिंह ने परंपरागत खेती छोड़कर फूलों की खेती करने का फैसला किया। इस फैसले ने भूप सिंह की जिंदगी ने खुशियों के रंग पर दिए। आज भूप सिंह फूलों की खेती कर प्रति एकड़ 25 से 30 हजार रुपये मुनाफा कमा रहा है। संवाद 

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आठवीं तक पढ़ा-लिखा है किसान 
किसान भूप सिंह ने बताया कि वह आठवीं तक पढ़ा है। अन्य फसलों बचत न निकलने के कारण घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था। वह वर्ष 2015 में एक कार्यक्रम में गया था। यहां उसका पहली बार गेंदे के फूलों की माला पहना कर मान सम्मान किया गया। उस माला को वह घर ले आया और उसका बीज सूखा कर घर पर एक छोटी क्यारी बनाकर छिड़काव कर दिया।
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कुछ समय बाद पौधे बन गए और फिर फूल खिल गए। इन फूलों ने पूरे घर के वातावरण को सुगंधमय कर दिया। विवाह समारोह, नवरात्र में उसके घर से फूल ले जाने लगे। यह देख उनके मन में फूलों की खेती करने का विचार आया। विशेषज्ञों से राय लेकर उसने गेंदे की खेती शुरू कर दी। वह पिछले 4-5 वर्षों से गेंदे की खेती कर रहा है।
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परंपरागत खेती से आती है कम लागत
भूप सिंह सैनी ने बताया कि गेंदे की खेती में परंपरागत खेती से कम लागत आती है और इसकी फसल थोड़े समय में ही तैयार हो जाती है। उसके अनुसार गेंदे की बुआई वर्ष में तीन बार की जा सकती है। खरीफ सीजन में गेंदे की रोपाई आमतौर पर जून-जुलाई में करते हैं, लेकिन जहां पानी की उपलब्धता है, वे किसान अगस्त तक कर सकते हैं। अक्तूबर से फरवरी तक इसके फूलने का समय आ जाता है। इसकी खेती सर्दी, गर्मी एवं वर्षा तीनों मौसम में आसानी से की जा सकती है।। भूप सिंह के मुताबिक एक एकड़ में 10-15 हजार रुपये की लागत आती है। करीब 7-8 क्विंटल उत्पादन मिल जाता है। 40 से 100 रुपये किलो तक फूल बिक जाते हैं। इस खेती से 25 से 30 हजार रुपये प्रति एकड़ मुनाफा हो जाता है।


हिसार, बरवाला, हांसी में करता है सप्लाई 
भूप सिंह ने बताया कि यहां का फूल क्षेत्र के गांव के अलावा जिला हिसार के शहर बरवाला, हांसी, आदमपुर, अग्रोहा आदि शहरों मे भी जाता है। दिवाली पर तो यह फूल बड़ी मंडियों तक भी जाता है। हालांकि यहां पर बड़ी मंडी न होने के कारण बेचने मे थोड़ी परेशानी आती है, जिससे थोड़ा कम मुनाफा होता है। मगर फिर भी अन्य परंपरागत फसलों के मुकाबले गेंदों के फूलों की खेती मे कम खर्चा व ज्यादा मुनाफा है।

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