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भाजपा की तिरंगा यात्रा में भाग लेने पर किसान का परिवार सहित बहिष्कार का आरोप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 15 Aug 2021 12:02 AM IST
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Farmer accused of boycott along with family for participating in BJP's Tiranga Yatra
नारनौंद। नारनौंद में शनिवार को भाजपा की ओर से निकाली तिरंगा यात्रा में भाग लेने गए डाटा के एक किसान ने कुछ लोगों पर परिवार सहित बहिष्कार करने का आरोप लगाया है। गांव के किसी भी व्यक्ति को उससे व उसके परिवार से मिलने, बातचीत करने पर दंडित करने का फरमान सुनाया गया है।
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डाटा निवासी सुरेश उर्फ लाला ने बताया कि वह खुद किसान आंदोलन से जुड़ा रहा है और काफी बार अपना ट्रैक्टर लेकर टीकरी बॉर्डर पर भी गया है। 11 अगस्त को कैप्टन अभिमन्यु के नेतृत्व में नारनौंद में होने वाली तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए वह अपनी कंबाइन व ट्रैक्टर पर तिरंगा झंडा लगाकर तैयार था। गांव के ही कुछ लोग आए और उसको तिरंगा यात्रा में जाने से रोका। जब उसने वहां न जाने देने का कारण पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए। वह अपने दोनों भाइयों के साथ यात्रा में शामिल हुआ। उसी रात गांव के मंदिर से मुनादी करवाई गई कि 12 अगस्त की सुबह डाटा के रोघी खाप के चबूतरे पर पंचायत होगी। इसमें तिरंगा यात्रा में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ फैसला लिया जाएगा। पंचायत में उनको अपना पक्ष रखने के लिए नहीं बुलाया गया। पंचायत में फैसला लिया गया कि सुरेश उर्फ लाला, रमेश व संदीप ने तिरंगा यात्रा में भाग लिया था इसलिए गांव का कोई भी व्यक्ति उनसे और उनके परिवार से बातचीत नहीं करेगा। दरांती से लेकर कंबाइन तक किसी भी कृषि औजार का प्रयोग नहीं करेगा। पंचायत के फैसले का उल्लंघन करने वाले पर 5100 रुपये जुर्माना किया जाएगा। किसान ने बताया कि यह फैसला करने वाले मुख्य रूप से सरपंच विनोद, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि जयबीर जागलान हैं। फैसला सुनाने के बाद गांव के नरेश उर्फ निशू, राजबीर उर्फ राजू, प्रमोद उर्फ मोनू, राजेश, राजा, भगत शर्मा, बिंद्र व नन्ना उसके घर पर आए तो पंचायत ने सभी पर 5100-5100 रुपये का जुर्माना लगा दिया। किसान ने बताया कि वह इस मामले को लेकर जल्द ही वकीलों की राय लेकर कानून का सहारा लेगा।
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ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो बहुत गलत फैसला है। शिकायत मिलने पर सख्त कदम उठाया जाएगा।
- जितेंद्र अहलावत, एसडीएम हांसी
यह फैसला पूरे गांव द्वारा लिया गया था। इसमें किसी एक व्यक्ति विशेष का रोल नहीं था। किसान के परिवार के ऊपर कोई फैसला नहीं लिया गया है। गांव के फैसले की बात गांव में ही रहती है।
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- विनोद कुमार, सरपंच डाटा
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