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Nainital Accident: मां को खो चुकी कमलप्रीत बोली- मुझे भी मां के साथ जाना है, स्कूल प्रबंधन व चालक पर लगाए आरोप

Tue, 10 Oct 2023 06:25 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 10 Oct 2023 06:25 PM IST
सार

नैनीताल बस हादसे जान गंवाने वाले लोगों के शव का अंतिम संस्कार किया गया। चश्मदीद बच्ची बोली कि ड्राइवर स्पीड में बस चला रहा था। धीरे चलाने को कहा तो बोला सुबह 7 बजे से पहले स्कूल पहुंचना है।

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Family members blame driver and school management in Nainital accident
रविंद्र कौर के पिता लुधियाना निवासी हरभजन सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नैनीताल में हुए बस हादसे के बाद परिजनों ने चालक व स्कूल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। नैनीताल हादसे में अपनी मां रविंद्र कौर को खो चुकीं उनकी बेटी कमलप्रीत ने आरोप लगाते हुए रविवार को हुए हादसे के बारे में पूरा वाकया बताया। उन्होंने कहा कि 'रविवार को हम भ्रमण के बाद शाम 6 बजे बस में बैठ गए थे। दूसरे अंकल बस चला रहे थे। बस स्टार्ट करते ही उन्होंने बस की स्पीड बढ़ा दी। सभी ने कहा था धीरे करो, धीरे करो... ड्राइवर ने नहीं मानी। वो कहता है मुझे सोमवार सुबह 7 बजे तक बस स्कूल में पहुंचानी है।

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घायल कमलप्रीत कौर बताती हैं कि 'जब बस के अंदर गए थे तो अंदर तीन चार चालक बैठे हुए थे। अंदर से शराब और सिगरेट की बदबू आ रही थी। जब शिक्षकों ने चालक से पूछा तो उसने कहा कुछ नहीं अभी बीड़ी पी है। बस को जो चालक बस चला कर लेकर गया था उससे अलग चालक बस चलाने लगा। बस थोड़ी दूर ही चली थी कि उसने बस की गति को तेज कर दिया।
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स्पीड कम करने की बजाय वह पहाड़ों पर और स्पीड करने लगा। जब उसे टोका तो उसने कहा कि सुबह 7:00 बजे तक स्कूल पहुंचना है। इसी दौरान अध्यापिकाओं ने प्रिंसिपल के पास फोन कर कहा भी कि चालक बस को तेज चला रहा है। उसके बाद प्रिंसिपल की तरफ से भी कोई रिस्पांस नहीं आया। इसी दौरान बस खाई में जा गिरी।
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10-12 पलटे खाते हुए वह एक पेड़ पर अटक गई, बस के अंदर सभी एक दूसरे के ऊपर गिर रहे थे कोई छत से टकरा रहा था कोई खिड़की से। बस के अंदर चीखने चिल्लाने की आवाज ही सुनाई दे रही थी। जब होश आया तो अस्पताल में थे। अस्पताल में देखा किसी का हाथ टूटा हुआ है किसी का पांव किसी की आंख बाहर आई हुई है किसी के सिर में टांके लगे हुए हैं। मुझे भी सात टांके लगे हैं पांव में चोट लगी है। मुझे नहीं रहना... मां के साथ लेटा दो। 

सोमवार देर रात 2:30 बजे के करीब रविंदर कौर का शव उनके आवास पर पहुंचा, साथ में घायल बेटी कमलप्रीत भी थीं। सुबह 10:00 बजे सेक्टर 16-17 के श्मशान घाट में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। अंतिम यात्रा में शामिल कमलप्रीत ने चिता पर लेटी मां को गले लगाते हुए कहा 'मुझे क्यों छोड़ कर चली गई और चिल्लाने लगी कि मुझे भी मां के साथ लेटा दो, मां के बगैर मैं जी नहीं सकती।' साथ में यह भी कहा कि मां के चेहरे पर लकड़ियां मत रखना उनको दर्द होगा।

रास्ता बंद था तो चालक उस रास्ते क्यों ले गया
रविंद्र कौर के पिता लुधियाना निवासी हरभजन सिंह का आरोप कि जो चालाक बस चला रहा था उसके पास कोई लाइसेंस नहीं था और बिना परमिट के बस को वहां पर नहीं ले जा सकते। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन की तरफ से प्राइवेट बस चालक से संपर्क किया था उसने 65000 मांगे थे। रकम ज्यादा होने के कारण स्कूल की तरफ से स्कूल बस को ही भेजा गया। उन्होंने कहा कि जब रास्ता बंद था तो चालक उस रास्ते से बस को क्यों लेकर गया, क्योंकि चालक को रास्ते का पता ही नहीं था। जब सड़क तंग थी उसके बाद भी उसने बस की स्पीड को कम करने की बजाय बढ़ा दी, जिस कारण हादसा हो गया। उनका मानना है कि स्कूल प्रबंधन और चालक की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद अधिकतर सवारी का मोबाइल फोन और सामान नहीं मिले हैं।

फोन पर प्रिंसिपल को कहा झूठ क्यों बोला 
रविंद्र कौर के परिजनों का कहना है कि देर रात को घर आने के बाद कमलप्रीत ने विरोध से डायरी निकाली और उसके अंदर प्रिंसिपल के लिखे हुए नंबर पर कॉल की और कहा कि जब मेरी मां का देहांत हो चुका था तो मुझसे झूठ क्यों बोला गया मुझसे कहा गया कि तुम्हारी मां जिंदा है अब कहां पर है मेरी मां बताओ।


सरकारी अस्पताल में नहीं थी कोई सुविधा 
उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी स्कूल प्रबंधन की तरफ से जो गंभीर थे उनको निजी अस्पताल में नहीं ले जाया गया, जिस कारण उनकी मौत हो गई। अगर समय रहते उन्हें निजी असपताल में ले जाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।

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