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राष्ट्रपति से निर्मल ग्राम अवॉर्ड प्राप्त डोभी में शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन सेवाओं का अभाव

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 12:03 AM IST
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Dobhi, which received Nirmal Gram Award from the President, lacks education, health, transport services
बालसमंद। डोभी गांव का बस स्टॉप। - फोटो : Hisar
बालसमंद। वर्ष 2008 में साफ सुथरे गांवों के सर्वे में चयनित डोभी गांव को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से निर्मल ग्राम योजना अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन इस गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सहित अन्य समस्याएं आज भी बरकरार है। चुनाव में नेता आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। धरातल पर समस्या का समाधान आज तक नहीं हो पाया।
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ग्रामीणों ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अच्छी शिक्षा के लिए स्टाफ ही नहीं है। सरकारी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के ही बच्चे अधिक जाते हैं। स्कूल में मैथ और अंग्रेजी टीजीटी एवं सोशल साइंस और ड्राइंग टीजीटी के शिक्षक नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यही हाल गांव में बने पीएचसी का भी है, जिसमें स्टाफ की तैनाती नहीं है। जिस कारण आमजन को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है।
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कोरोनाकाल के बाद बिगड़ी बस सेवा सुविधा
हिसार से डोभी के लिए पहले हर 40 मिनट में बस की सुविधा थी, लेकिन कोरोना काल के बाद से पुरे दिन में एक ही बस वाया सीसवाला और किरतान के फेरे लगाती है। आदमपुर में बहुतकनीकी संस्थान, आईटीआई और कॉलेज की शिक्षा ग्रहण करने के लिए आने-जाने के लिए भी बस नहीं मिलती। आदमपुर-सिवानी की बस सेवा पिछले चार साल से बंद पड़ी है। गांव में ही सहकारी बैंक था जिसे बिल्डिंग कमजोर होने के कारण बंद कर दिया गया। बैंक बंद होने से किसानो को यूरिया और डीएपी खाद के लिए भटकना पड़ता है।
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30 हजार से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सुविधा नहीं
डोभी पीएचसी के अंतर्गत छह गांव आते हैं। परंतु सुविधाओं का अभाव है। सात साल पहले यहां प्रसव की सुविधा तक बंद कर दी गई। इसे शुरू करवाने के लिए कई बार प्रयास किये गए, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। करीब 30 हजार से अधिक आबादी को प्राथमिक जांच व उपचार के लिए शहरों का रुख करना पड़ता है।
गांव में तीन बस स्टॉप पर नहीं रुकती बसें
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में तीन बस स्टॉप हैं। परंतु तीनों स्टॉपेज पर बस नहीं रुकती। चालक अपनी मनमर्जी से बस को लाते और ले जाते हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कत होती है। स्कूल-कालेज जाने वाले विद्यार्थी स्टापेज पर बस का इंतजार करते हैं और वह बीच गांव से होते हुए निकल जाती है।
गांव में सबसे बड़ी समस्या बसों की है। पढ़ाई के लिए गांव से बाहर जाने के लिए सुबह-सुबह 100 से अधिक बच्चे प्राइवेट वाहनों में जाने के लिए मजबूर हैं। - राजबीर
गांव में साफ सफाई अच्छी है। गांव की सभी गलियां पक्की है। गांव में सैर के लिए दो हरे भरे पार्क है। गांव में खाद बीज केंद्र शुरू होना चाहिए। - बलवंत सिंह
पीएचसी में दवाइयों का टोटा है। कभी भी दवा लेने चले जाओ, वहां एक ही दवा हर बीमारी में दे दी जाती है। शिक्षा स्वास्थ्य पर कोई ध्यान नहीं देता। - सुरताराम

नहरी पानी के लिए कई वर्षों से मांग करते आ रहे हैं। आज तक पूरा पानी नहीं मिल पाया है। हर सरकार में किसानो से बड़े वादे किये जाते हैं। - दलीप सिंह
बिजली बिल की समस्या है। उपभोक्ताओं को 80 हजार तक के बिल थमा दिए जाते हैं। विभाग की गलती में हमें अपनी नरमे की चुगाई छोड़कर बालसमंद ऑफिस का चक्कर लगाना पड़ता है। - रामसिंह
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