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कोरोना के नए संक्रमण की पहचान करना मुश्किल, विभाग की ओर से नहीं मिली कोई गाइडलाइन

Sun, 27 Jun 2021 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 12:27 AM IST
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Difficult to identify new corona infection, no guideline received from the department
हिसार। डेल्टा प्लस वेरिएंट स्वास्थ्य विभाग के लिए नई चुनौती बन गया है। विभाग के पास इस बारे में कोई नई गाइडलाइन भी नहीं आई है। इस संक्रमण को पहचान मुश्किल है। डेल्टा प्लस वेरिएंट का पता लगाने के लिए जीनो टाइप टेस्ट यानी जीनोम लेवल पर टेस्ट बार-बार स्कवीसिंग करनी पड़ती है। तभी संक्रमण की पहचान होती है। जिले में जीनोम टेस्ट की सुविधा नहीं होने पर नजदीकी दिल्ली की लैब में सैंपल भेजे जा रहे हैं।
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रिपोर्ट करीब एक सप्ताह या 10 दिन बाद मिल पाती है। ऐसे में चिकित्सक एवं माइक्रोबॉयोलोजी विभाग को भी इसकी पूरी जानकारी नहीं है। पॉजिटिव मिलने वाले लोगों की कुल सैंपलिंग में से छंटनी कर 5 से 10 फीसदी सैंपल दिल्ली की लैब में भेजे जाएंगे। फिजिशियन डॉ. अजय चुघ का कहना है कि जब संक्रमण काफी तेजी से फैलता है तो उसकी प्रभाव करने की क्षमता भी अलग-अलग होती है। अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा सकता। इसके जीन में पैटर्न अलग-अलग पाया जाता है। उसी से पता चलता है कि ये तेजी से फैल रहा है। डिप्टी सीएमओ डॉ. अनामिका ने बताया कि इस तरह के देशभर से करीब 30 हजार सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। उन्हीं में से 80 के आसपास केस मिले हैं। हरियाणा में फरीदाबाद में एक केस सामने आया है।
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जिला स्तर पर लैब खोलने की हुई थी घोषणा
सरकार ने जिला स्तर पर लैब खोलने की घोषणा की थी। ऐसी ही लैब अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में खोले जाने की तैयारी थी। मगर अभी तक अस्पताल में न मशीन, न कोई उपकरण आए हैं। ऐसे में दिल्ली लैब से रिपोर्ट आने में कई दिन लगते हैं। जांच में एक दिन का समय लगता है।
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सैंपल इकट्ठा कर पाना मुश्किल
जिले में सरकारी एवं निजी सात लैब में कोविड-19 सैंपल की जांच हो रही है। इसके अलावा रैपिड टेस्ट किए जा रहे हैं। ऐसे में कोरोना पॉजिटिव मिलने वाले लोगों के सैंपल इकट्ठा कर पाना मुश्किल है। उसके बिना सभी सैंपल का पता नहीं चल पाएगा।
यह है डेल्टा प्लस वेरिएंट
कोरोना का नया डेल्टा वेरिएंट यानी बी.1.617.2 सबसे पहले भारत में मिला था। अब धीरे-धीरे कई दूसरे देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना वायरस के रूप में बदलाव की वजह से डेल्टा प्लस वेरिएंट बना है। ये वायरस सबसे पहले यूरोप में मिला था। स्पाइक प्रोटीन कोरोना संक्रमण का मुख्य हिस्सा है, जिसकी मदद से यह इंसान के शरीर में घुसकर संक्रमण फैलाता है।
तेजी से फैलता है डेल्टा प्लस वेरिएंट
कोरोना के इस नए वेरिएंट में सबसे खतरनाक बात यह है कि अभी तक के सभी वेरिएंट में सबसे तेजी से फैलने वाला है। यह 60 प्रतिशत और ज्यादा संक्रामक है। सुपर-स्प्रेडर डेल्टा वेरिएंट ने लोगों को डरा दिया है।

कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट के लक्षण
- बुखार, सूखी खांसी और थकान
- गंभीर लक्षणों में सीने में दर्द, सांस फूलना और सांस लेने में तकलीफ
- त्वचा पर चकत्ते, पैर की उंगलियों का रंग में बदलना
- गले में खराश, स्वाद और गंध चले जाना, सिरदर्द , दस्त
फिलहाल हमारे पास डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं आई है। फिर भी एहतियात बरती जा रही है। कुल पॉजिटिव सैंपल में से 10 फीसदी सैंपल दिल्ली की लैब में भेजे जाएंगे। डॉ. अनामिका बिश्नोई, डिप्टी सीएमओ, आइडीएसपी विभाग, हिसार
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