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Hisar News: धनुष खरीदने के पैसे नहीं थे, कोच मनजीत ने अपनी जेब से खर्च कर संवार दिया भविष्य

Wed, 20 Nov 2024 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Wed, 20 Nov 2024 02:24 AM IST
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Didn't have money to buy bow, coach Manjeet spent from his own pocket to improve his future
 उमरा के तीरंदाजी सेंटर पर ​खिलाड़ियों को अभ्यास करवाते कोच मनजीत मलिक।
हिसार। तीरंदाजी महंगे खेलों में शामिल हैं। लकड़ी के धनुष की कीमत सात हजार और कार्बन धनुष की कीमत तो तीन लाख रुपये से शुरू होती है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो अनेक खिलाड़ियों के सपने परवान नहीं चढ़ पाते। गांव उमरा में भी कुछ खिलाड़ियों के सामने आर्थिक समस्या आई तो कोच मनजीत मलिक ने सहारा दिया। मलिक ने अपनी जेब से 56000 रुपये खर्चकर आठ युवाओं को धनुष दिलाया। आज ये खिलाड़ी तीरंदाजी में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
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मनजीत मलिक गांव में पिछले 15 साल से खिलाड़ियों को तीरंदाजी का निशुल्क अभ्यास करवा रहे हैं। अब तक 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। 300 से ज्यादा खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। इनसे प्रशिक्षण लेकर 15 खिलाड़ी सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं। वर्तमान में इनके पास 60 खिलाड़ी अभ्यास करने आ रहे हैं। इनमें 40 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। वहीं, आकाश, भावना और राहुल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल हैं। 13 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमका चुके हैं। मलिक ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय रतन सिंह मलिक कुश्ती में एनआईएस का डिप्लोमा करने वाले पहले भारतीय थे। भाई आजाद मलिक हॉकी का अभ्यास करवाते हैं, वहीं भाई जगजीत मलिक जिला खेल अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मलिक बताते है कि वर्ष 2000 में उन्होंने महाराष्ट्र की नागपुर यूनिवर्सिटी से तीन साल का डीपीईडी का कोर्स किया था। इस दौरान तीरंदाजी टूर्नामेंट में बच्चों को निशाना लगाते देखा तो उन्होंने भी खिलाड़ियों को तराशने की ठान ली।
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पिता मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से परिवार का खर्चा चला रहे हैं। मैंने उन्हें धनुष दिलाने की बात कही तो असमर्थता जताई। ऐसे में कोच मनजीत मलिक ने धनुष दिलाया। नेशनल स्तर पर पदक जीतकर उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करूंगी।
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- नैना, तीरंदाजी, खिलाड़ी
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परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पिता से धनुष खरीदकर देने की बात कही तो कहने लगे पैसे होंगे तब दिलाएंगे। कोच मनजीत मलिक ने धनुष दिलाकर मेरी मदद की। अब मैं भी पदक जीतकर परिवार और कोच का नाम रोशन करूंगी।

श्रुति, तींरदाजी, खिलाड़ी


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पैसे नहीं होने के कारण पिता ने धनुष दिलाने से मना कर दिया था। मगर मेरी तीरंदाजी में रूचि है। इसी को देखते हुए कोच ने मुझे धनुष खरीदकर दिया। अब मैं भी कोच के सपने को पूरा करूंगी। सुबह-शाम अभ्यास कर रही हूं। परिवार की हालत दयनीय है। पिता सोनू मजदूरी करते है।



- अर्चना, तीरंदाजी, खिलाड़ी
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