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धर्म जीवन जीने की कला : स्वामी सत्यानंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:44 PM IST
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Dharma: The Art of Living Life Swami Satyanand
देवी भवन स्थित गोयनका सेवा सदन में आरती करते श्रद्धालु। 
हिसार। देवी भवन स्थित गोयनका सेवा सदन में आयोजित सात दिवसीय दिव्य सत्संग समारोह के चौथे दिन स्वामी सत्यानंद महाराज ने धर्म के दस लक्षण विषय पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिर या धूप-अगरबत्ती तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।
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उन्होंने कहा कि धर्म के दस लक्षणों को जीवन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि सुख-दुःख में स्थिर रहना और बदले की भावना न रखकर क्षमा करना ही सच्चा आत्मबल है। मन व इच्छाओं पर नियंत्रण रखने के साथ धन के अलावा किसी का विश्वास भी नहीं तोड़ना चाहिए। बाहरी सफाई के साथ आंतरिक शुद्धता और इंद्रियों पर विवेकपूर्ण नियंत्रण जरूरी है।
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स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि मन, वचन और कर्म में सत्यता के साथ विनम्रता अपनानी चाहिए और क्रोध से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म वही है, जो हमारे आचरण में दिखाई दे। सत्संग में प्रीतमदास और रामशरणदास समेत अन्य संतों ने भी विचार रखे। सोहम महामंडल शाखा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने आरती में भाग लिया।
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