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समाजहित में होना चाहिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल: डॉ. रोहिल्ला
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अमर उजाला की ओर से आयोजित जिला स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं व प्रतिभागियों के साथ मु?
- फोटो : Hisar
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आज के समय में सोशल मीडिया संचार का सबसे तेज माध्यम है। इसका इस्तेमाल समाज हित के लिए किया जा सकता है। अगर सोशल मीडिया में कुछ कमियां हैं तो उन्हें दूर किया जाना चाहिए। इस पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब नहीं है। यह बात गवर्नमेंट पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीएस रोहिल्ला ने कही। वह अमर उजाला द्वारा आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज किसी भी टेक्नोलॉजी के फायदे हैं तो उसके कुछ नुकसान भी हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया की अहमियत को इग्नोर नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया का सही ढंग से अगर इस्तेमाल किया जाए तो इससे समाज को काफी फायदा हो सकता है।
टू वे कम्यूनिकेशन है सोशल मीडिया
डीडी न्यूज हिसार के पूर्व निदेशक अजीत सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है और इसके साथ चलना सभी की मजबूरी है। जो इसके साथ नहीं चला, वह पिछड़ जाएगा। आज के समय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया वन वे कम्यूनिकेशन है, जबकि सोशल मीडिया टू वे कम्यूनिकेशन है। आज सोशल मीडिया इतना सशक्त बन गया है कि इसने दुनिया अपनी मुट्ठी में कर ली है। सोशल मीडिया की मदद से आज हमें पता चल रहा है कि पीएम मोदी व ट्रंप क्या कर रहे हैं।
सोशल मीडिया के बिना व्यक्ति अपंग है
डीएन कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमएल गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया आज की आवश्यकता है। इसके बिना व्यक्ति अपंग है। इस पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। लोगों को विवेक व बुद्धि से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर देश में नफरत फैलाने वाले, हिंसा फैलाने वाले, अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले संदेशों को बिना सोचे समझे आगे प्रसारित नहीं करना चाहिए।
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सोशल मीडिया पर बैन लगाना उचित नहीं
एचएयू से सेवानिवृत्त प्रोफेसर सतीश कालरा ने कहा कि सोशल मीडिया पर पूर्ण रूप से बैन लगाना उचित नहीं है। बस इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कुछ कानूनी बना दिया जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति इसके गलत इस्तेमाल के बारे सोचे तक नहीं।
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टू वे कम्यूनिकेशन है सोशल मीडिया
डीडी न्यूज हिसार के पूर्व निदेशक अजीत सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया लेटेस्ट टेक्नोलॉजी है और इसके साथ चलना सभी की मजबूरी है। जो इसके साथ नहीं चला, वह पिछड़ जाएगा। आज के समय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया वन वे कम्यूनिकेशन है, जबकि सोशल मीडिया टू वे कम्यूनिकेशन है। आज सोशल मीडिया इतना सशक्त बन गया है कि इसने दुनिया अपनी मुट्ठी में कर ली है। सोशल मीडिया की मदद से आज हमें पता चल रहा है कि पीएम मोदी व ट्रंप क्या कर रहे हैं।
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सोशल मीडिया के बिना व्यक्ति अपंग है
डीएन कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमएल गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया आज की आवश्यकता है। इसके बिना व्यक्ति अपंग है। इस पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। लोगों को विवेक व बुद्धि से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर देश में नफरत फैलाने वाले, हिंसा फैलाने वाले, अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले संदेशों को बिना सोचे समझे आगे प्रसारित नहीं करना चाहिए।
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सोशल मीडिया पर बैन लगाना उचित नहीं
एचएयू से सेवानिवृत्त प्रोफेसर सतीश कालरा ने कहा कि सोशल मीडिया पर पूर्ण रूप से बैन लगाना उचित नहीं है। बस इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए कुछ कानूनी बना दिया जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति इसके गलत इस्तेमाल के बारे सोचे तक नहीं।