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दलित महिला को सर्वसम्मति से सरपंच बनाने की कवायद शुरू
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2016 12:36 AM IST
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अति संवेदनशील की सूची में शामिल उपमंडल के गांव ढाणी रामजस में सर्वसम्मति से पंचायत चुने जाने की कवायद शुरू हो गई है।
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योजना सिरे चढ़ी तो जाट बाहुल्य इस गांव में हरियाणा के गठन के बाद पहली बार कोई दलित महिला गांव में सरपंच की कमान संभालेगी।
यह बात अलग है कि इस गांव में सरपंच पद इस बार एससी के लिए आरक्षित है। हालांकि सरपंच और पंचों को लेकर नाम भी तय कर लिए गए हैं, लेकिन तस्वीर नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख को ही साफ होगी। फिलहाल इस गांव से किसी ने भी सरपंच अथवा पंच को लेकर नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है।
हरियाणा के गठन के बाद से ढाणी रामजस में सरपंच की कमान अब तक जाट समुदाय के पास ही रही है। चुनावी शर्तों और मौजूदा हालातों को देखते हुए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पंचायत का गठन करने के लिए गांव के तहत आने वाली ढाणी किशन लाल और ढाणी मिठ्ठी में चौकीदार के हाथ मुनादी करवा दी थी।
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इसके बाद तीनों गांवों के मौजिज लोग ढाणी रामजस में जमा हुए और सरपंच पद के नाम पर अपना निर्णय सुना दिया। ग्रामीणों की यह योजना सिरे चढ़ी तो क्षेत्र के इतिहास में पहली बार जाट बाहुल्य, वह भी अति संवेदनशील गांव ढाणी रामजस में कोई दलित महिला सर्वसम्मति से सरपंच का पद संभालेंगी।
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पंचों के नाम पर फंसा पेच
गांव में सरपंच पद को लेकर कई दावेदार थे, लेकिन सहमति अंत में मंजू देवी पत्नी विनोद कुमार के नाम पर बनी है। इसके अलावा पंचों के नाम पर कुछ पेच फंसा हुआ है, जिसे ग्रामीण सुलझाने में जुट गए हैं।
दबे सुर यह भी सामने आया कि गांव के कुछ लोग इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। उसकी तरफ से नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया की चर्चाओं के बाद गांव की तरफ से दोबारा सरपंच पर सहमति के निर्णय को बरकरार रखने की कोशिशें शुरू कर दी गई है।
इस बारे में मंजू देवी के पति विनोद ने कहा कि पंचायत जो भी निर्णय देगी, वह मान्य होगा और कोई दूसरा प्रत्याशी मैदान में आता है तो वह पंचायत के निर्णय पर निर्भर करता है कि क्या किया जाए। उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नी का नामांकन पत्र 4 जनवरी को दाखिल करेंगे।
हमने तो चुन लिया था : पूर्व सरपंच
इस बारे में पूर्व सरपंच भीम सिंह श्योराण का कहना है कि तीनों गांवों के लोगों ने पंचायत करके मंजू देवी को सर्वसम्मति से सरपंच घोषित कर दिया था।
इसके बावजूद भी कोई व्यक्ति मैदान में आता है तो उसे मनाने का प्रयास किया जाएगा। मंजू को किसी एक गांव ने नहीं, बल्कि तीन गांवों की पंचायत ने सर्वसम्मति से चुना है।