हिसार: कार एजेंसी संचालक ने डीआईजी और डीएसपी के खिलाफ 50 लाख की रिश्वत मांगने की शिकायत सीएम को भेजी
शिकायतकर्ता कार एजेंसी संचालक प्रदीप नेहरा ने कहा कि मैं नारको टेस्ट को तैयार, डीआईजी बलवान राणा, डीएसपी अशोक का भी टेस्ट हो।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा के हिसार में तारा फोर्ड कार एजेंसी के संचालक प्रदीप नेहरा ने सीएम मनोहरलाल, गृहमंत्री अनिल विज, डीजीपी मनोज कुमार, आईजी राकेश कुमार आर्य को ईमेल भेजकर हिसार के डीआईजी बलवान राणा, डीएसपी अशोक कुमार पर 50 लाख की रिश्वत के मामले में कार्रवाई मांग की है। प्रदीप नेहरा ने लिखित शिकायत में कहा कि इस मामले में शामिल डीआईजी बलवान सिंह राणा व डीएसपी अशोक कुमार का नारको टेस्ट करवाकर जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि वह खुद भी नारको टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं।
कार एजेंसी संचालक प्रदीप नेहरा ने कहा कि उनको पिछले एक साल से पुलिस प्रताड़ित कर रही है। वह इसकी तह तक जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे कि इस पूरे नेक्सस को चला कौन रहा है। उन्हें पता लगा कि इस प्रकरण के पीछे पुलिस के बड़े अधिकारियों का हाथ है।
प्रदीप नेहरा ने अपनी शिकायत में कहा कि उनको दो बार अलग-अलग समय पर लेनदेन के लिए ऑफिसर मेस में बुलाया गया था। रिश्वत प्रकरण के आरोपों के बाद डीआईजी बलवान सिंह राणा ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन भी किया था। अचानक से कांफ्रेस का रद्द कर दिया था। मीडिया को इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।
यह था मामला : तारा फोर्ड एजेंसी संचालक प्रदीप नेहरा के खिलाफ सोमवार को कंपनी के पूर्व कर्मचारी दिनेश को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया गया था। इसके बाद प्रदीप नेहरा आरोप लगाए थे कि बलवान सिंह राणा ने पुलिस विभाग के एक बड़े अधिकारी के जरिये पहले उनसे 50 लाख रिश्वत की मांगी। जब उन्होंने पैसे नहीं दिए तो दोबारा से उनके पास संदेश भेजा गया कि डीआईजी 25 लाख लेने के लिए भी तैयार हैं।
जब उन्होंने रुपये नहीं दिए तो उनको झूठे केसों में फंसाया जा गया। 2 साल पहले मेरे यहां कुछ कंपनियों में स्पेयर पार्ट से जुड़ी धांधली पकड़ी गई थी। कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ था। इसमें जहर खाने वाला कर्मचारी दिनेश भी था। करीब 8 महीने पहले मैंने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए एक शिकायत दी थी, लेकिन इस मामले में एफआईआर न दर्ज करते हुए शिकायत को कई महीनों तक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में घुमाया गया।
इस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है। प्रदीप नेहरा की जो तीन शिकायतें थी उसमें से दो शिकायतें मेरे कार्य क्षेत्र से बाहर की हैं। एक शिकायत को मुख्यालय से मिले आदेश के अनुसार रद्द कर दिया गया है। - अशोक कुमार, डीएसपी