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दरिदंगी पीड़िता को अस्पताल से मिली छुट्टी
Updated Wed, 18 Jul 2018 12:53 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। दरिंदगी का शिकार बनी नौ साल की मासूम को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पीड़िता के साथ एक महिला पुलिसकर्मी को भी तैनात किया गया है। पीड़िता ने कहा कि अब उस स्कूल में कभी नहीं जाऊंगी। परिजनों ने छात्रा का स्कूल बदलने का फैसला लिया है।
नारनौंद क्षेत्र के राजकीय स्कूल में शिक्षक की हवस का शिकार बनी नौ साल की मासूम को सोमवार देर रात हांसी से हिसार के नागरिक अस्पताल लाया गया। मंगलवार को नागरिक अस्पताल में छात्रा के कुछ टेस्ट कराए गए। उपचार के बाद छात्रा को अस्पताल से छुट्टी दे दी।
पीड़िता की दादी बच्ची को पढ़ाने के पक्ष में नहीं थी। इसके बावजूद छात्रा का पिता अपनी बेटी को पढ़ाना चाहता था। बच्ची के पढ़ाई के जज्बे को देखते हुए स्कूल में बच्ची का दाखिला कराया था। पहले परिवार ने लड़कियों के स्कूल में बच्ची को भेजने का फैसला लिया था। बाद में राजकीय स्कूल में दाखिला करा दिया। बच्ची की दादी ने बताया कि वह हर रोज अपनी पोती को स्कूल छोड़ने जाती थी। छुट्टी के समय खुद लेकर आती थी।
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पीड़ित बच्ची अब भी कुछ बताने की हालत में नहीं है। अबोध बालिका को पता नहीं कि उसके साथ क्या हुआ है। स्कूल जाने की पूछने पर बच्ची खामोश हो जाती है। पीड़िता के परिवार ने फैसला लिया कि ऐसे स्कूल में अपनी बेटी को नहीं भेजेंगे। बच्ची की हालत सुधरने के बाद किसी दूसरे स्कूल के बारे में फैसला लेंगे।
हिसार। दरिंदगी का शिकार बनी नौ साल की मासूम को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पीड़िता के साथ एक महिला पुलिसकर्मी को भी तैनात किया गया है। पीड़िता ने कहा कि अब उस स्कूल में कभी नहीं जाऊंगी। परिजनों ने छात्रा का स्कूल बदलने का फैसला लिया है।
नारनौंद क्षेत्र के राजकीय स्कूल में शिक्षक की हवस का शिकार बनी नौ साल की मासूम को सोमवार देर रात हांसी से हिसार के नागरिक अस्पताल लाया गया। मंगलवार को नागरिक अस्पताल में छात्रा के कुछ टेस्ट कराए गए। उपचार के बाद छात्रा को अस्पताल से छुट्टी दे दी।
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पीड़िता की दादी बच्ची को पढ़ाने के पक्ष में नहीं थी। इसके बावजूद छात्रा का पिता अपनी बेटी को पढ़ाना चाहता था। बच्ची के पढ़ाई के जज्बे को देखते हुए स्कूल में बच्ची का दाखिला कराया था। पहले परिवार ने लड़कियों के स्कूल में बच्ची को भेजने का फैसला लिया था। बाद में राजकीय स्कूल में दाखिला करा दिया। बच्ची की दादी ने बताया कि वह हर रोज अपनी पोती को स्कूल छोड़ने जाती थी। छुट्टी के समय खुद लेकर आती थी।
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पीड़ित बच्ची अब भी कुछ बताने की हालत में नहीं है। अबोध बालिका को पता नहीं कि उसके साथ क्या हुआ है। स्कूल जाने की पूछने पर बच्ची खामोश हो जाती है। पीड़िता के परिवार ने फैसला लिया कि ऐसे स्कूल में अपनी बेटी को नहीं भेजेंगे। बच्ची की हालत सुधरने के बाद किसी दूसरे स्कूल के बारे में फैसला लेंगे।