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हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड में टेंडर के नाम पर फर्जीवाड़ा
Updated Tue, 27 Nov 2018 12:54 AM IST
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हिसार। हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड में दो अलग-अलग टेेंडरों में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। बोर्ड के अधिकारियों ने ये टेंडर उन फर्मों के नाम अलॉट कर दिए जो शर्तें पूरी नहीं करती हैं। इसके अलावा पशुधन फार्म की सुरक्षा का टेंडर जिन तीन फर्मों को दिया गया है, उनमें से एक के खिलाफ पहले ही फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। यह सारा खुलासा आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी और सीएम विंडो पर आई शिकायतों के बाद हुआ है। इनमें से एक मामले में सदर थाना पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया है तथा दूसरे मामले की अभी जांच की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर आवेदन से लेकर टेंडर मिलने तक पूरा खेल चलता रहा और अधिकारियों को इस बारे में कुछ भी गलत नहीं लगा। चारों मामलों में शिकायत होने के बाद मामला अधिकारियों के सामनेे आया है या अधिकारी सब कुछ जानकर भी चुप थे। खास बात यह है कि बोर्ड के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। इससे लगता है कि कहीं न कहीं बोर्ड के कुछ अधिकारी भी इस पूरे खेल में शामिल हैं।
एक एजेंसी के खिलाफ पहले से चल रही फर्जीवाड़े की जांच
फार्म की सिक्योरिटी के लिए पिछले पांच साल से तीन कंपनियों को टेेंडर के आधार पर ठेका दिया जा रहा है। इस बार सिक्योरिटी का काम केपी सिक्योरिटी, कैप्टन सिक्योरिटी व आरजी सिक्योरिटी कंपनी को दिया गया। तीनों कंपनियों को फार्म की सिक्योरिटी के लिए करीबन सात लाख प्रति महीना दिया जाता है। इस मामले में गांव स्याहड़वा के समुंद्र सिंह ने आरटीआई लगाकर जानकारी निकलवाई तो सामने आया कि जिन कंपनियों को यह टेंडर दिया गया है उनमें से किसी के पास भी पसारा लाइसेंस नहीं है। इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई है।
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वहीं दूसरी ओर कैप्टन सिक्योरिटी कंपनी के खिलाफ पहले से एक फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। 2017 में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र गहलावत ने इस फर्जीवाड़े का उजागर किया था जिसमें जांच में सामने आया कि कंपनी द्वारा जिन कर्मचारियों से ड्यूटी करवाई जा रही है उनका कंपनी के पास कोई रिकार्ड नहीं था।
जमीन जोतने के टेंडर में भी फर्जीवाड़ा
फार्म की तरफ से अप्रैल 2018 में फार्म की पांच हजार एकड़ के करीब जमीन जोतने के लिए टेंडर जारी किए गए। टेंडर के लिए सिर्फ तीन लोगों ने आवेदन किया था। खेत जोतने के लिए प्रति एकड़ 360 रुपये के हिसाब से काम का टेंडर कृष्ण कुमार को मिला। इस मामले में सिरसा निवासी मुकेश बैनीवाल ने आरटीआई लगाकर टेंडर संबंधी कागजात मांगे थे। मामले में सामने आया कि जिन तीन लोगों टेंडर के लिए आवेदन किया था उनमें से एक आवेदन कर्ता कश्मीर सिंह की ट्रैक्टर की आरसी व दूसरे आवेदनकर्ता नरसिंह का अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। फार्म की तरफ से इस मामले में कश्मीर व नरसिंह के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का केस दर्ज करवाया। मामले की पुलिस जांच में दोनों आरोपियों ने शपथपत्र देकर बताया कि उन्होंने कोई टेंडर भरा ही नहीं था, ना उन्होंने कोई टेंडर राशि अपने खाते से कटवाई है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है कि इसका फर्जीवाड़े का किसको फायदा पहुंचाया गया।
जब इस मामले में बात करने के लिए फार्म के चीफ सुपरिटेंडेंट एस के बागौरिया से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने एक बार फोन रिसीव किया। जब उनसे इन टेंडर के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने तुरंत फोन काट दिया। इसके बाद कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर के लिए अप्लाई करने के मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सिक्योरिटी एजेंसी वाले मामले की भी शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा कि कहां और किस स्तर पर कितनी गड़बड़ी हुई है।
- विजेंद्र सिंह सिहाग, प्रभारी, सदर थाना
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेंडर आवेदन से लेकर टेंडर मिलने तक पूरा खेल चलता रहा और अधिकारियों को इस बारे में कुछ भी गलत नहीं लगा। चारों मामलों में शिकायत होने के बाद मामला अधिकारियों के सामनेे आया है या अधिकारी सब कुछ जानकर भी चुप थे। खास बात यह है कि बोर्ड के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। इससे लगता है कि कहीं न कहीं बोर्ड के कुछ अधिकारी भी इस पूरे खेल में शामिल हैं।
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एक एजेंसी के खिलाफ पहले से चल रही फर्जीवाड़े की जांच
फार्म की सिक्योरिटी के लिए पिछले पांच साल से तीन कंपनियों को टेेंडर के आधार पर ठेका दिया जा रहा है। इस बार सिक्योरिटी का काम केपी सिक्योरिटी, कैप्टन सिक्योरिटी व आरजी सिक्योरिटी कंपनी को दिया गया। तीनों कंपनियों को फार्म की सिक्योरिटी के लिए करीबन सात लाख प्रति महीना दिया जाता है। इस मामले में गांव स्याहड़वा के समुंद्र सिंह ने आरटीआई लगाकर जानकारी निकलवाई तो सामने आया कि जिन कंपनियों को यह टेंडर दिया गया है उनमें से किसी के पास भी पसारा लाइसेंस नहीं है। इसकी शिकायत सीएम विंडो पर की गई है।
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वहीं दूसरी ओर कैप्टन सिक्योरिटी कंपनी के खिलाफ पहले से एक फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। 2017 में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुरेंद्र गहलावत ने इस फर्जीवाड़े का उजागर किया था जिसमें जांच में सामने आया कि कंपनी द्वारा जिन कर्मचारियों से ड्यूटी करवाई जा रही है उनका कंपनी के पास कोई रिकार्ड नहीं था।
जमीन जोतने के टेंडर में भी फर्जीवाड़ा
फार्म की तरफ से अप्रैल 2018 में फार्म की पांच हजार एकड़ के करीब जमीन जोतने के लिए टेंडर जारी किए गए। टेंडर के लिए सिर्फ तीन लोगों ने आवेदन किया था। खेत जोतने के लिए प्रति एकड़ 360 रुपये के हिसाब से काम का टेंडर कृष्ण कुमार को मिला। इस मामले में सिरसा निवासी मुकेश बैनीवाल ने आरटीआई लगाकर टेंडर संबंधी कागजात मांगे थे। मामले में सामने आया कि जिन तीन लोगों टेंडर के लिए आवेदन किया था उनमें से एक आवेदन कर्ता कश्मीर सिंह की ट्रैक्टर की आरसी व दूसरे आवेदनकर्ता नरसिंह का अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। फार्म की तरफ से इस मामले में कश्मीर व नरसिंह के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने का केस दर्ज करवाया। मामले की पुलिस जांच में दोनों आरोपियों ने शपथपत्र देकर बताया कि उन्होंने कोई टेंडर भरा ही नहीं था, ना उन्होंने कोई टेंडर राशि अपने खाते से कटवाई है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है कि इसका फर्जीवाड़े का किसको फायदा पहुंचाया गया।
जब इस मामले में बात करने के लिए फार्म के चीफ सुपरिटेंडेंट एस के बागौरिया से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने एक बार फोन रिसीव किया। जब उनसे इन टेंडर के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने तुरंत फोन काट दिया। इसके बाद कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर के लिए अप्लाई करने के मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सिक्योरिटी एजेंसी वाले मामले की भी शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा कि कहां और किस स्तर पर कितनी गड़बड़ी हुई है।
- विजेंद्र सिंह सिहाग, प्रभारी, सदर थाना