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Hisar News: बीआईएस कानून के विरोध में उतरे तीन राज्यों के कॉटन जिनिंग फैक्टरी संचालक, बोले-कानून वापस न लिया तो एक अक्तूबर से बंद कर देंगे फैक्टरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Aug 2023 12:56 AM IST
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Cotton ginning factory operators of three states protested against the BIS law, said - If the law is not withdrawn, the factory will be closed from October 1
हिसार। केंद्र सरकार ने कपास की गांठें बनाने, प्रसंस्करण और व्यापार करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से प्रमाणिक करवाने का कानून बनाया है। हरियाणा, पंजाब व राजस्थान की कॉटन जिनिंग फैक्टरी संचालक इस कानून के विरोध में उतर आए हैं। शहर में बुधवार को हरियाणा कॉटन जिनिंग एसोसिएशन के बैनरतले तीनों राज्यों के 100 से अधिक कॉटन जिनिंग फैक्टरी संचालक एकत्र हुए। फैक्टरी संचालकों ने बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि सरकार के इस कानून को किसी भी सूरत में लागू नहीं होने दिया जाएगा। वह इस मामले में केंद्रीय उद्योग मंत्री से मुलाकात करेंगे। अगर फिर भी सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है तो एक अक्तूबर से फैक्टरी बंद कर देंगे।
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एक निजी रेस्टोरेंट में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरियाणा कॉटन जिनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील मित्तल ने कहा कि बीआईएस का नियम कॉटन प्रोसेसिंग व गांठें बनाने पर लागू करने का कोई औचित्य नहीं बनता है। बीआईएस के नियम फैक्टरी में निर्मित उत्पादों पर लागू होते हैं। कपास तो एक कृषि उत्पादन है और ये रॉ मैटीरियल है। कॉटन जिनर्स अपनी फैक्टरी में सिर्फ कपास की प्रोसेसिंग कर उसे आगे बेचते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इसे पहले 27 अगस्त से ही लागू करना चाहती थी, लेकिन अब इस कानून को 27 नवंबर से लागू करने की बात कर रही है। जिनर्स के विरोध को देखते हुए ही इस कानून को लागू करने का फैसला तीन माह के लिए लंबित कर दिया गया है। मगर पूरे देश के जिनर्स इस कानून को रद्द करवाना चाहते हैं।
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तीनों राज्यों में 500 कॉटन जिनिंग फैक्टरी
अपर राजस्थान कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य चितांगलिया ने कहा कि बिजनेस टू बिजनेस मॉडल में कहीं भी बीआईएस का नियम लागू नहीं होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में कॉटन जिनिंग की 500 इकाइयां हैं, जो सालभर में 60 लाख गांठों (3 करोड़ क्विंटल कपास) की प्रोसेसिंग करती हैं। सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेती है तो इन सभी फैक्टरियों से जुड़े लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
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लोअर राजस्थान कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप गुप्ता ने कहा कि सरकार यदि नियम लागू करना भी चाहती है तो इसे अनिवार्य करने के बजाय वैकल्पिक कर सकती है। मगर, बीआईएस मानक पूरे न करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा रखकर सरकार जिनर्स को क्या अपराधी घोषित करना चाहती है। पंजाब कॉटन फैक्टरी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश बंसल ने कहा कि सरकार कॉरपोरेट सेक्टर्स के हाथों की कठपुतली की तरह काम कर रही है। बैठक में हरियाणा कॉटन जिनिंग एसोसिएशन के संरक्षक सुमेर चंद, कैशियर, श्यामसुंदर बधेरिया भूना, पंजाब से भगवान बंसल, अलवर से कुलदीप, हनुमानगढ़ से रविन्द्र, बलवंत खैरतल राजस्थान आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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