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Hisar News: निकाय मंत्री ने अत्याधुनिक ग्रीन ईको फ्रेंडली श्मशान घाट की रखी आधारशिला
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हिसार में श्मशान घाट के मॉडल दिखाते मंत्री गुप्ता।
हिसार। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने ऋषि नगर में बनने वाले अत्याधुनिक ग्रीन ईको फ्रेंडली श्मशान भूमि की आधारशिला रखी। इस दौरान मंत्री ने कहा कि राजघाट, शक्ति स्थल, शांतिवन जैसे सुंदर स्थल बनाकर यहां दिवंगत आत्माओं को सम्मानजनक अंतिम विदाई दी जा सकेगी। पहले चरण में श्मशान घाट के विभिन्न कार्यों पर 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि काफी वर्ष पहले उनके एक परिजन का अमेरिका में निधन हो गया। जब वह वहां गए तो उन्होंने यह सब देखा। वहीं, हमारे देश में ज्यादातर श्मशान घाट की हालत काफी खस्ता है, जिस कारण से काफी डरावने लगते हैं। लोग भी इनके आसपास गुजरने से कतराते हैं। इसके बनने से लोगों से श्मशान घाट को लेकर बनी धारणा में बदलाव आएगा। इस दौरान श्मशान घाट को गोबर व पराली आदि के मिश्रण से बनने वाली ठोस लकड़ी उपलब्ध करवाने वाली ट्रस्ट या संस्था को डॉ. कमल गुप्ता ने 11-11 लाख रुपये की राशि देने की अग्रिम घोषणा की। इस अवसर पर पूर्व मंत्री हरि सिंह सैनी, जिला नगर आयुक्त प्रदीप दहिया, सीनियर डिप्टी मेयर अनिल मानी, पार्षद अनिल जैन, पार्षद प्रतिनिधि सुशील शर्मा, ब्रह्माकुमारी रमेश बहन, ऋषि नगर श्मशान भूमि सुधार समिति के प्रधान महावीर सैनी, राकेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
यह भारत का नंबर वन प्रोजेक्ट होगा
मेयर गौतम सरदाना ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को लेकर समिति प्रधान महावीर सैनी करीब एक साल पहले मेरे संपर्क में आए थे। इसके बाद इसे लेकर एक साल तक बैठकें कीं। हालांकि हमने भी इस प्रोजेक्ट की ड्राइंग तैयार करवाई थी। वह खराब नहीं थी। मगर, जैसे ही आर्किटेक्ट माधव रमन की नाम मेरे सामने आया तो हमने समिति की ड्राइंग को फाइनल कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत का नंबर वन प्रोजेक्ट होगा। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आएंगे। इस दौरान मेयर ने केंद्र की भाजपा सरकार के लिए वोट भी मांगे। उन्होंने 5 साल का अपना रिपोर्ट कार्ड भी प्रस्तुत किया। हालांकि बेसहारा पशुओं की समस्या पर उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत सफलता अभी भी नहीं मिली है।
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मोक्षदा हरित शवदाह प्रणाली से युक्त होगा श्मशान घाट
यह श्मशान घाट मोक्षदा हरित शवदाह प्रणाली से युक्त होगा। पारंपरिक दाह संस्कार में 400 से 500 किलो लकड़ी लगती है, जबकि मोक्षदा प्रणाली में 100 से 150 किलो लकड़ी लगती है। एक अनुमान के अनुसार भारत में दाह संस्कार के लिए प्रतिवर्ष तीन से चार करोड़ पेड़ों को काट दिया जाता है। इसे हर वर्ष 1500 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र समाप्त हो जाता है। यह प्रणाली पीएम 2.5 व पीएम 10 को 95 से 98 प्रतिशत तक कम कर देती है। इसमें पेड़ों की लकड़ी के बजाय गाेवंश की गोबर की हवन सामग्री युक्त ठोस लकड़ी से दाह संस्कार किया जाएगा, जिससे गोशालाएं भ आत्मनिर्भर बनेंगी। इसके अलावा इसमें सीएनजी व पीएनजी युक्त शवदाह गृह भी होगा। तीन चरणों में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट पर लगभग 20 करोड़ रुपए राशि खर्च होने का अनुमान है।
श्मशान भूमि सुधार समिति ने एक एकड़ और जमीन मांगी
श्मशान भूमि सुधार समिति ने प्रोजेक्ट के लिए करीब एक एकड़ जमीन और उपलब्ध करवाने की मांग की। समिति का कहना है कि यह जमीन उपलब्ध होने से सेक्टर 14 की तरफ से भी श्मशान घाट में एंट्री हो सकेगी। इसके अलावा इस जमीन पर रस्म पगड़ी जैसे कार्यक्रमों के लिए एक हॉल बनाया जाएगा। इस पर निकाय मंत्री ने एचएसवीपी के प्रशासक प्रदीप दहिया को एक प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय भेजने के आदेश दिए, ताकि वह इस जमीन को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत कर सकें।
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उन्होंने बताया कि काफी वर्ष पहले उनके एक परिजन का अमेरिका में निधन हो गया। जब वह वहां गए तो उन्होंने यह सब देखा। वहीं, हमारे देश में ज्यादातर श्मशान घाट की हालत काफी खस्ता है, जिस कारण से काफी डरावने लगते हैं। लोग भी इनके आसपास गुजरने से कतराते हैं। इसके बनने से लोगों से श्मशान घाट को लेकर बनी धारणा में बदलाव आएगा। इस दौरान श्मशान घाट को गोबर व पराली आदि के मिश्रण से बनने वाली ठोस लकड़ी उपलब्ध करवाने वाली ट्रस्ट या संस्था को डॉ. कमल गुप्ता ने 11-11 लाख रुपये की राशि देने की अग्रिम घोषणा की। इस अवसर पर पूर्व मंत्री हरि सिंह सैनी, जिला नगर आयुक्त प्रदीप दहिया, सीनियर डिप्टी मेयर अनिल मानी, पार्षद अनिल जैन, पार्षद प्रतिनिधि सुशील शर्मा, ब्रह्माकुमारी रमेश बहन, ऋषि नगर श्मशान भूमि सुधार समिति के प्रधान महावीर सैनी, राकेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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यह भारत का नंबर वन प्रोजेक्ट होगा
मेयर गौतम सरदाना ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को लेकर समिति प्रधान महावीर सैनी करीब एक साल पहले मेरे संपर्क में आए थे। इसके बाद इसे लेकर एक साल तक बैठकें कीं। हालांकि हमने भी इस प्रोजेक्ट की ड्राइंग तैयार करवाई थी। वह खराब नहीं थी। मगर, जैसे ही आर्किटेक्ट माधव रमन की नाम मेरे सामने आया तो हमने समिति की ड्राइंग को फाइनल कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत का नंबर वन प्रोजेक्ट होगा। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आएंगे। इस दौरान मेयर ने केंद्र की भाजपा सरकार के लिए वोट भी मांगे। उन्होंने 5 साल का अपना रिपोर्ट कार्ड भी प्रस्तुत किया। हालांकि बेसहारा पशुओं की समस्या पर उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत सफलता अभी भी नहीं मिली है।
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मोक्षदा हरित शवदाह प्रणाली से युक्त होगा श्मशान घाट
यह श्मशान घाट मोक्षदा हरित शवदाह प्रणाली से युक्त होगा। पारंपरिक दाह संस्कार में 400 से 500 किलो लकड़ी लगती है, जबकि मोक्षदा प्रणाली में 100 से 150 किलो लकड़ी लगती है। एक अनुमान के अनुसार भारत में दाह संस्कार के लिए प्रतिवर्ष तीन से चार करोड़ पेड़ों को काट दिया जाता है। इसे हर वर्ष 1500 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र समाप्त हो जाता है। यह प्रणाली पीएम 2.5 व पीएम 10 को 95 से 98 प्रतिशत तक कम कर देती है। इसमें पेड़ों की लकड़ी के बजाय गाेवंश की गोबर की हवन सामग्री युक्त ठोस लकड़ी से दाह संस्कार किया जाएगा, जिससे गोशालाएं भ आत्मनिर्भर बनेंगी। इसके अलावा इसमें सीएनजी व पीएनजी युक्त शवदाह गृह भी होगा। तीन चरणों में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट पर लगभग 20 करोड़ रुपए राशि खर्च होने का अनुमान है।
श्मशान भूमि सुधार समिति ने एक एकड़ और जमीन मांगी
श्मशान भूमि सुधार समिति ने प्रोजेक्ट के लिए करीब एक एकड़ जमीन और उपलब्ध करवाने की मांग की। समिति का कहना है कि यह जमीन उपलब्ध होने से सेक्टर 14 की तरफ से भी श्मशान घाट में एंट्री हो सकेगी। इसके अलावा इस जमीन पर रस्म पगड़ी जैसे कार्यक्रमों के लिए एक हॉल बनाया जाएगा। इस पर निकाय मंत्री ने एचएसवीपी के प्रशासक प्रदीप दहिया को एक प्रोजेक्ट बनाकर मुख्यालय भेजने के आदेश दिए, ताकि वह इस जमीन को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत कर सकें।