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Hisar News: नई शिक्षा नीति के तहत हुए बदलावों के कारण असमंजस में विद्यार्थी
Tue, 04 Jun 2024 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Tue, 04 Jun 2024 10:37 PM IST
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आदर्श महिला महाविद्यालय भिवानी।
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भिवानी। नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शिक्षा प्रणाली में जो बदलाव किया गया है। उससे विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। क्योंकि अब विज्ञान हो या वाणिज्य हर संकाय के साथ विद्यार्थियों को कला से जुड़ा कोई विषय जरूर पढ़ना होगा। जहां कुछ विषयों के नाम बदल दिए गए हैं, वहीं कुछ नए विषय भी शामिल किए गए हैं।
एनईपी के तहत बीकॉम के पहले साल का पाठ्यक्रम भी बदल दिया गया है। बीकॉम में पहले वोकेशनल विषय था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह पर कोई और विषय रखा गया है। दाखिले के लिए मंगलवार से विद्यार्थियों के लिए पोर्टल खुले हैं और विभिन्न कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। विद्यार्थियों से हर बार कहा जा रहा है कि वह पहले संबंधित कॉलेज में जाकर जानकारी लेने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी करें।
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बीकॉम में हुआ बड़ा बदलाव
बीकॉम विषय शहर के केवल दो ही कॉलेजों में उपलब्ध है। एक वैश्य कॉलेज और दूसरा आदर्श महिला महाविद्यालय में पढ़ाया जा रहा है। आदर्श महिला महाविद्यालय में बीकॉम की कुल 210 सीटें हैं। इनमें ऑडिट में 40 और एसएफएस में 170 सीटें उपलब्ध हैं।
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बीकॉम को अब केवल तीन साल के लिए नहीं रखा गया है। बल्कि इसमें ऐसे विकल्प दे दिए गए हैं कि विद्यार्थी एक साल का डिप्लोमा लेकर किसी दूसरे कॉलेज में दाखिला ले सकता है। यानी कि अब विद्यार्थी एक पाठ्यक्रम में सीमित नहीं रहेगा। वह कभी भी प्रमाणपत्र लेकर अपने पसंदीदा कॉलेज में दाखिला करवा सकता है।
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बीकॉम में ऐसे किया बदलाव :
- पहले साल में डिप्लोमा होगा।
- दूसरे साल में प्रमाणपत्र मिलेगा।
- तीसरे साल में उपाधि मिलेगी।
- चौथे साल में ऑनर्स रखा गया है।
अगर विद्यार्थी किसी भी विषय से चौथे साल में पढ़ाई जारी रखता है तो वह ऑनर्स पूरा कर लेगा। इससे विद्यार्थियों को यह सुविधा मिल गई है कि वह तीन साल के लिए एक ही कॉलेज में बंधे नहीं रहेंगे बल्कि किसी भी साल में वह डिप्लोमा या प्रमाणपत्र लेकर कॉलेज छोड़ सकता है।
बीए में जो बदलाव किए गए हैं। उसमें मेजर और माइनर विषयों के लिए बच्चों को संबंधित कॉलेज में जाकर जानकारी लेनी होगी। क्योंकि कहीं पर हिंदी माइनर है तो कहीं पर इंग्लिश माइनर है। इसीलिए विद्यार्थी दाखिला से पहले अपने विषय के चयन के लिए कॉलेज में हेल्पडेस्क से मदद ले सकते हैं।
एनईपी के तहत शिक्षा प्रणाली में जो बदलाव किए गए हैं। उसे समझने में विद्यार्थियों को अभी दिक्कत आ रही है। इसलिए हम बार-बार यही कह रहे हैं कि विद्यार्थी दाखिले के लिए संबंधित कॉलेज में जाकर पहले अपने विषय से संबंधित पूरी जानकारी एकत्रित करें फिर फैसला लें कि उन्हें किस विषय में दाखिला लेना है। सबसे जरूरी बात है कि मेजर और माइनर के लिए उन्हें कॉलेज में आना ही पड़ेगा। क्योंकि हर कॉलेज में अलग-अलग स्ट्रीम रखी गई है। एनईपी विद्यार्थियों को रोजगार के रास्ते खोलेगी। यह विद्यार्थियों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके तहत विद्यार्थियों को कौशल शिक्षा मिलेगी। एक तरह से हम इसे रोजगार उन्मुख नीति कह सकते हैं। - डॉ. गायत्री बंसल, हेल्पडेस्क सदस्य, आदर्श महिला महाविद्यालय।
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एनईपी के तहत बीकॉम के पहले साल का पाठ्यक्रम भी बदल दिया गया है। बीकॉम में पहले वोकेशनल विषय था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह पर कोई और विषय रखा गया है। दाखिले के लिए मंगलवार से विद्यार्थियों के लिए पोर्टल खुले हैं और विभिन्न कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया चल रही है। विद्यार्थियों से हर बार कहा जा रहा है कि वह पहले संबंधित कॉलेज में जाकर जानकारी लेने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी करें।
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बीकॉम में हुआ बड़ा बदलाव
बीकॉम विषय शहर के केवल दो ही कॉलेजों में उपलब्ध है। एक वैश्य कॉलेज और दूसरा आदर्श महिला महाविद्यालय में पढ़ाया जा रहा है। आदर्श महिला महाविद्यालय में बीकॉम की कुल 210 सीटें हैं। इनमें ऑडिट में 40 और एसएफएस में 170 सीटें उपलब्ध हैं।
बीकॉम को अब केवल तीन साल के लिए नहीं रखा गया है। बल्कि इसमें ऐसे विकल्प दे दिए गए हैं कि विद्यार्थी एक साल का डिप्लोमा लेकर किसी दूसरे कॉलेज में दाखिला ले सकता है। यानी कि अब विद्यार्थी एक पाठ्यक्रम में सीमित नहीं रहेगा। वह कभी भी प्रमाणपत्र लेकर अपने पसंदीदा कॉलेज में दाखिला करवा सकता है।
बीकॉम में ऐसे किया बदलाव :
- पहले साल में डिप्लोमा होगा।
- दूसरे साल में प्रमाणपत्र मिलेगा।
- तीसरे साल में उपाधि मिलेगी।
- चौथे साल में ऑनर्स रखा गया है।
अगर विद्यार्थी किसी भी विषय से चौथे साल में पढ़ाई जारी रखता है तो वह ऑनर्स पूरा कर लेगा। इससे विद्यार्थियों को यह सुविधा मिल गई है कि वह तीन साल के लिए एक ही कॉलेज में बंधे नहीं रहेंगे बल्कि किसी भी साल में वह डिप्लोमा या प्रमाणपत्र लेकर कॉलेज छोड़ सकता है।
बीए में जो बदलाव किए गए हैं। उसमें मेजर और माइनर विषयों के लिए बच्चों को संबंधित कॉलेज में जाकर जानकारी लेनी होगी। क्योंकि कहीं पर हिंदी माइनर है तो कहीं पर इंग्लिश माइनर है। इसीलिए विद्यार्थी दाखिला से पहले अपने विषय के चयन के लिए कॉलेज में हेल्पडेस्क से मदद ले सकते हैं।
एनईपी के तहत शिक्षा प्रणाली में जो बदलाव किए गए हैं। उसे समझने में विद्यार्थियों को अभी दिक्कत आ रही है। इसलिए हम बार-बार यही कह रहे हैं कि विद्यार्थी दाखिले के लिए संबंधित कॉलेज में जाकर पहले अपने विषय से संबंधित पूरी जानकारी एकत्रित करें फिर फैसला लें कि उन्हें किस विषय में दाखिला लेना है। सबसे जरूरी बात है कि मेजर और माइनर के लिए उन्हें कॉलेज में आना ही पड़ेगा। क्योंकि हर कॉलेज में अलग-अलग स्ट्रीम रखी गई है। एनईपी विद्यार्थियों को रोजगार के रास्ते खोलेगी। यह विद्यार्थियों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसके तहत विद्यार्थियों को कौशल शिक्षा मिलेगी। एक तरह से हम इसे रोजगार उन्मुख नीति कह सकते हैं। - डॉ. गायत्री बंसल, हेल्पडेस्क सदस्य, आदर्श महिला महाविद्यालय।