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Hisar News: स्वच्छ पर्यावरण के लिए मनाएं धुआं मुक्त दिवाली
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हिसार। ऊर्जा समिति ने जिलावासियों से परंपरा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और ऊर्जा-संवेदनशील दिवाली मनाने की अपील की है। समिति ने लोगों से कहा कि इस बार दिवाली को धुआं और धमाका मुक्त बनाएं तथा बिजली बचत को अपनी जिम्मेदारी समझें।
ऊर्जा समिति के महासचिव संजय कुमार चुघ ने बताया कि प्रदेश में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पहले से ही प्रदूषित स्तर पर है। ऐसे में धुआं और बमों- पटाखों से मुक्त दिवाली मनाना पर्यावरण और स्वास्थ्य, दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है, इसलिए हर नागरिक को बिजली की खपत कम करने में योगदान देना चाहिए।
चुघ ने सुझाव दिया कि घरों की सजावट के लिए 3, 6, 9 और 12 वाट की एलईडी या स्लिम लाइटों का प्रयोग करें। सोते समय इन्हें बंद कर बिजली की और बचत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि 100, 200 और 500 वाट के बड़े बल्ब और फोकस लाइट लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने से हवा जहरीली हो जाती है। त्योहार की खुशी पटाखों से नहीं, बल्कि मिठाई, उपहार, रंगोली और मिट्टी के दीयों से भी व्यक्त की जा सकती है। असली आनंद तो तब है जब हम परंपरा और पर्यावरण में संतुलन रखते हुए एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में त्योहार मनाएं।
चुघ ने कहा कि दिवाली जैसे अवसर पर बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए हर नागरिक को ऊर्जा बचत को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली की समझदारी से खपत करने से न केवल व्यक्तिगत खर्च घटेगा, बल्कि देशहित में भी बड़ा योगदान होगा।
ऊर्जा समिति के महासचिव संजय कुमार चुघ ने बताया कि प्रदेश में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पहले से ही प्रदूषित स्तर पर है। ऐसे में धुआं और बमों- पटाखों से मुक्त दिवाली मनाना पर्यावरण और स्वास्थ्य, दोनों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है, इसलिए हर नागरिक को बिजली की खपत कम करने में योगदान देना चाहिए।
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चुघ ने सुझाव दिया कि घरों की सजावट के लिए 3, 6, 9 और 12 वाट की एलईडी या स्लिम लाइटों का प्रयोग करें। सोते समय इन्हें बंद कर बिजली की और बचत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि 100, 200 और 500 वाट के बड़े बल्ब और फोकस लाइट लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण बढ़ने से हवा जहरीली हो जाती है। त्योहार की खुशी पटाखों से नहीं, बल्कि मिठाई, उपहार, रंगोली और मिट्टी के दीयों से भी व्यक्त की जा सकती है। असली आनंद तो तब है जब हम परंपरा और पर्यावरण में संतुलन रखते हुए एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में त्योहार मनाएं।
चुघ ने कहा कि दिवाली जैसे अवसर पर बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए हर नागरिक को ऊर्जा बचत को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली की समझदारी से खपत करने से न केवल व्यक्तिगत खर्च घटेगा, बल्कि देशहित में भी बड़ा योगदान होगा।