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एसडी कॉलेज के प्रधान व महासचिव पर कर्मचारी को गालियां देने, बेइज्जत करने का केस दर्ज
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हांसी। सनातन धर्म महिला महाविद्यालय के प्रधान वासुदेव गोयल और उसके बेटे अंकुर गोयल के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मामला महाविद्यालय की एक कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। कर्मचारी ने दोनों पर उन्हें गालियां देने, बेइज्जती करने सहित कई आरोप लगाए। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
कर्मचारी ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि प्रधान महाविद्यालय के कर्मचारियों को तंग करने के लिए कई-कई महीने वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं करते। एरियर और पदोन्नति के केस संबंधित विभागों के पास नहीं भेजे जा रहे हैं। कर्मचारियों का वेतन 5 महीने से लंबित है। महानिदेशक उच्चतर शिक्षा द्वारा कई बार पत्राचार किया जा चुका है। कर्मचारी ने कहा कि वासुदेव गोयल 2016 से पहले कई वर्षों तक संस्था के प्रधान रहे। उनके खिलाफ अनियमितताओं की शिकायतों पर जांच भी हुई थी। 2018 में महाविद्यालय में प्रशासक की नियुक्ति की गई। 2020 में गोयल फिर से प्रधान बन गए। महिला की शिकायत के अनुसार 27 नवंबर को 3 बजे दोनों महाविद्यालय में आए। चौकीदार को उनके पास हाजिरी रजिस्टर लाने के लिए भेजा। उन्होंने कहा कि प्राचार्य से पूछ लेती हूं। 3.40 बजे प्रधान ने सेवादार के जरिये हाजिरी रजिस्टर सहित अपने कार्यालय में आने को कहा। वह उनके कार्यालय में गईं तो प्रधान ने गालियां देनी शुरू कर दी और कहा कि अभी हाजिरी रजिस्टर दिखा, नहीं तो सस्पेंड करता हूं। उसने हाजिरी रजिस्टर वहीं रख दिया। कुछ समय बाद ही प्रधान ने हाजिरी रजिस्टर और सस्पेंशन लेटर उनके पास भिजवा दिया।
विधानसभा सत्र में भी उठाया था विधायक ने मामला
एसडी कॉलेज मैनेजमेंट के खिलाफ विधायक विनोद भयाना ने विधानसभा में प्रमुखता से मुद्दा उठाया था और कहा था कि कॉलेज मैनेजमेंट में पिता प्रधान तो बेटा उपप्रधान पद पर विराजमान हैं, कॉलेज प्राईवेट कंपनी के हवाले है। विधायक ने विधानसभा में कहा था कि एसडी कॉलेज को सरकार अपने अधीन ले ताकि छात्राओं को अच्छी शिक्षा मिल सके।
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वर्जन
हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेरे पिता सो रहे हैं, इस बारे में हम कुछ नहीं कहना चाहते।
अंकुर गोयल, संस्था महासचिव (वासुदेव गोयल का बेटा)
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कर्मचारी ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि प्रधान महाविद्यालय के कर्मचारियों को तंग करने के लिए कई-कई महीने वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं करते। एरियर और पदोन्नति के केस संबंधित विभागों के पास नहीं भेजे जा रहे हैं। कर्मचारियों का वेतन 5 महीने से लंबित है। महानिदेशक उच्चतर शिक्षा द्वारा कई बार पत्राचार किया जा चुका है। कर्मचारी ने कहा कि वासुदेव गोयल 2016 से पहले कई वर्षों तक संस्था के प्रधान रहे। उनके खिलाफ अनियमितताओं की शिकायतों पर जांच भी हुई थी। 2018 में महाविद्यालय में प्रशासक की नियुक्ति की गई। 2020 में गोयल फिर से प्रधान बन गए। महिला की शिकायत के अनुसार 27 नवंबर को 3 बजे दोनों महाविद्यालय में आए। चौकीदार को उनके पास हाजिरी रजिस्टर लाने के लिए भेजा। उन्होंने कहा कि प्राचार्य से पूछ लेती हूं। 3.40 बजे प्रधान ने सेवादार के जरिये हाजिरी रजिस्टर सहित अपने कार्यालय में आने को कहा। वह उनके कार्यालय में गईं तो प्रधान ने गालियां देनी शुरू कर दी और कहा कि अभी हाजिरी रजिस्टर दिखा, नहीं तो सस्पेंड करता हूं। उसने हाजिरी रजिस्टर वहीं रख दिया। कुछ समय बाद ही प्रधान ने हाजिरी रजिस्टर और सस्पेंशन लेटर उनके पास भिजवा दिया।
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विधानसभा सत्र में भी उठाया था विधायक ने मामला
एसडी कॉलेज मैनेजमेंट के खिलाफ विधायक विनोद भयाना ने विधानसभा में प्रमुखता से मुद्दा उठाया था और कहा था कि कॉलेज मैनेजमेंट में पिता प्रधान तो बेटा उपप्रधान पद पर विराजमान हैं, कॉलेज प्राईवेट कंपनी के हवाले है। विधायक ने विधानसभा में कहा था कि एसडी कॉलेज को सरकार अपने अधीन ले ताकि छात्राओं को अच्छी शिक्षा मिल सके।
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हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेरे पिता सो रहे हैं, इस बारे में हम कुछ नहीं कहना चाहते।
अंकुर गोयल, संस्था महासचिव (वासुदेव गोयल का बेटा)