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ब्लैक फंगस : मरीज के जबड़े, आंख, नाक और चेहरे की चमड़ी तक फैला संक्रमण
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हिसार। जिले के अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में शनिवार को ब्लैक फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस से दो और मरीजों की मौत हो गई। वहीं, छह नए मरीज दाखिल किए गए। शनिवार को ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल बेनिवाल ने एक मरीज का जबड़े का ऑपरेशन शुरू किया। उस समय मरीज की आंख, नाक व चेहरे की चमड़ी में भी फंगस का संक्रमण फैला हुआ था, जिस कारण ईएनटी व आंख रोग विभाग की टीम को बुलाना पड़ा। इसके बाद मरीज का जबड़ा और आंख पूरी जबकि नाक का गला हुआ कुछ हिस्सा निकालना पड़ा।
पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में ब्लैक फंगस से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, जो चिंताजनक विषय है। अब तक ब्लैक फंगस से 92 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पताल में फिलहाल 45 मरीजों का उपचार चल रहा है। 9 मरीज शनिवार को छुट्टी मिलने पर घर लौटे। आलम यह है कि पिछले कई दिनों से सरकार की ओर से ब्लैक फंगस इलाज में कारगर लाइपोसोनल के एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन एवं पोसाकोनाजोल की गोली नहीं आ रही है, जिससे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
नई दवा से किडनी पर पड़ रहा दुष्प्रभाव
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने खुद अपने स्तर पर बाहर से नई दवा के इंजेक्शन और गोली की बजाय सिरप खरीदी हुई है। मगर इस नई दवा से मरीजों में दुष्प्रभाव अधिक देखने को मिल रहे हैं। कई मरीज इस दवा को लेने से भी मना कर रहे हैं। इस दवा के किडनी पर प्रभाव अधिक पड़ता है, जिससे मरीज की इलाज के बाद डायलसिस शुरू होने की आशंका रहती है।
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शनिवार को म्यूकर माइकोसिस के 6 नए मरीज दाखिल किए गए जबकि दो की मौत हुई। हमारी कोशिश भी यहीं रहती है कि ज्यादातर सरकार से आने वाली दवा ही मरीज को दें, मगर उनकी कमी है। रविवार तक यह दवा आने की उम्मीद है। - डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा
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पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में ब्लैक फंगस से होने वाली मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, जो चिंताजनक विषय है। अब तक ब्लैक फंगस से 92 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पताल में फिलहाल 45 मरीजों का उपचार चल रहा है। 9 मरीज शनिवार को छुट्टी मिलने पर घर लौटे। आलम यह है कि पिछले कई दिनों से सरकार की ओर से ब्लैक फंगस इलाज में कारगर लाइपोसोनल के एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन एवं पोसाकोनाजोल की गोली नहीं आ रही है, जिससे मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
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नई दवा से किडनी पर पड़ रहा दुष्प्रभाव
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने खुद अपने स्तर पर बाहर से नई दवा के इंजेक्शन और गोली की बजाय सिरप खरीदी हुई है। मगर इस नई दवा से मरीजों में दुष्प्रभाव अधिक देखने को मिल रहे हैं। कई मरीज इस दवा को लेने से भी मना कर रहे हैं। इस दवा के किडनी पर प्रभाव अधिक पड़ता है, जिससे मरीज की इलाज के बाद डायलसिस शुरू होने की आशंका रहती है।
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शनिवार को म्यूकर माइकोसिस के 6 नए मरीज दाखिल किए गए जबकि दो की मौत हुई। हमारी कोशिश भी यहीं रहती है कि ज्यादातर सरकार से आने वाली दवा ही मरीज को दें, मगर उनकी कमी है। रविवार तक यह दवा आने की उम्मीद है। - डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा