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स्लैब में कटौती के बाद नागरिक मंच का धरना खत्म
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:40 AM IST
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प्रदेश सरकार द्वारा बिजली बिलों के स्लैब में कटौती के बाद नागरिक मंच ने जहां विद्युत सदन के बाहर दिया जा रहा धरना समाप्त कर 20 अक्तूबर को एमडी कार्यालय के घेराव की योजना भी टाल दी है।
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वहीं कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह हरियाणा विद्युत नियामक आयोग में उनके द्वारा डाली गई पुनर्विचार याचिका पर आयोग के वीरवार को दिए गए आदेश के कई भागों के खिलाफ एपिलेट ट्रिब्यूनल में पुनर्विचार याचिका डालेंगे।
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नागरिक मंच 23 सब डिविजनों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध करते हुए नया आंदोलन छेड़ेगा। वहीं बिजली बिल घटाओ संघर्ष समिति ने भी इसे जनता की जीत बताते हुए अभी एफएसए कम करने तक विरोध जारी रखने की बात कही है।
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पूर्व मंत्री का तर्क
प्रोफेसर संपत का कहना है कि उनकी पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाते समय आयोग ने 7 मई वाले आदेश में कुछ बदलाव किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ फायदा होगा। संपूर्ण फायदे के लिए वे अपना कानूनी संघर्ष सर्वोच्च न्यायालय तक जारी रखेंगे।
उनको सरकार के इस कथन पर ऐतराज जताया कि उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं को कुछ रियायतें दी हैं, जबकि सरकार तो इसमें पार्टी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनको इस बात से भी ऐतराज है कि आयोग ने ये फैसला सुनाते समय लागू होने की तारीख की भी घोषणा नहीं कि जबकि न्याय के लिए प्राकृतिक कानून के अनुसार यह फैसला 1 अप्रैल से ही लागू होना चाहिए।
क्योंकि उसी दिन से पहले वाला फैसला लागू किया था। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जो अधिक बिल भरवाए गए थे, वे पैसे सभी उपभोक्ताओं को वापिस दिए जाए।
मंच ने कहा, मान ली हैं चार मांगें
नागरिक मंच के प्रधान आरसी जग्गा ने बताया कि उन्होंने बिजली बिलों में कटौती करने, नए स्लैब की जगह पुराने स्लैब लागू करने, 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी को फिलहाल रोकने, बिजली निगम का सिस्टम सुधारने सहित कई मांगें बिजली निगम प्रशासन के सामने रखी थीं, जिनमें से पहली चार मांगों को मान लिया गया है।
स्लैब में बदलाव करने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है, जो उनके विरोध की जीत है। जग्गा ने कहा कि फ्यूल सरचार्ज वापस नहीं लिया है और जो बढ़े हुए रेटों के बिल भरवाए गए हैं, उनके बारे में भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
किसान सभा को बैठना था धरने पर
शुक्रवार को अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कमेटी को विद्युत सदन के बाहर चल रहे इस धरने पर बैठना था। सुबह मास्टर मोलड़ सिंह के नेतृत्व में धर्मवीर बजाज, ओमप्रकाश सिवाच, करतार सिंह, महासिंह, बनवारी लाल, रामकुमार मंगाली, सूबेसिंह बूरा, प्रेम नारायण सहित अनेक किसान धरने पर पहुंच गए। जन चेतना मंच के संयोजक उमेद लोहान भी अपनी टीम के साथ आए।
इस फैसले में 0 से 50, 51 से 100 यूनिट के बाद टेलिस्कोपिक सिस्टम को फिर बदल दिया और तीसरा स्लैब 0 से 150 यूनिट प्रतिमाह खपत का बनाया है, जिससे 100 यूनिट से 1 यूनिट भी अधिक यानी 101 यूनिट खपत कार को पहले 147 रुपये ज्यादा देने था, वहीं अब 96 रुपये ज्यादा देने होंगे, जो तर्क संगत नहीं है। उनकी पुनर्विचार याचिका में दी गई दलीलों को आयोग मान लेता तो बिजली दरें और कम हो जाती। इससे 1 यूनिट का अंतर 96 की बजाय 65 रुपये रह जाता। -प्रोफेसर संपत सिंह, पूर्व मंत्री एवं कांग्रेसी नेता
जनता की आधी जीत हो गई है। स्लैब में बदलाव कर 800 यूनिट तक के उपभोक्ताओं को राहत तो दे दी है, मगर एफएसए में कटौती नहीं की गई है। अभी हमें एफएसए घटवाने के लिए और लड़ाई लड़नी है। जल्द ही इस बारे में मीटिंग करके फैसला लेंगे। गौतम सरदाना, संयोजक, बिजली बिल घटाओ संघर्ष समिति
हमारी कई मांगों में से चार मांगें मान ली गई हैं। इसलिए फिलहाल चल रहा धरना खत्म कर दिया गया है। आने वाले समय में सब डिविजनों को प्राइवेट हाथों में सौंपने का विरोध किया जाएगा। -आरसी जग्गा, प्रधान, नागरिक मंच