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Hisar News: तापमान बढ़ने से जवाब दे रहीं ई-बसों की बैटरी
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हिसार। बढ़ते तापमान का असर रोडवेज डिपो की ई-बस सेवा पर दिखाई देने लगा है। गर्मी के कारण ई-बसों की बैटरी खपत बढ़ने और चार्जिंग में अधिक समय लगने से संचालन प्रभावित हो रहा है। इसके चलते कई बसों के फेर रद्द हो रहे हैं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और रोडवेज को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हिसार रोडवेज डिपो में शहर के लोकल रूटों पर पांच ई-बसें संचालित हो रही हैं। प्रत्येक बस रोजाना लगभग 12 चक्कर लगाती है लेकिन भीषण गर्मी में तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रति बस 4 से 5 चक्कर रद्द करने पड़ रहे हैं। एसी के अधिक उपयोग से बैटरी की खपत बढ़ रही है जिससे बसों की रनिंग क्षमता भी प्रभावित हुई है। ई-बसें चार्जिंग स्टेशन पर अधिक समय तक खड़ी रह रही हैं जबकि बस स्टॉप पर यात्री बसों का इंतजार करते रह जाते हैं। इससे यात्रियों को समय पर बस उपलब्ध नहीं हो पा रही और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
चार्जिंग समय दोगुना हुआ
पहले ई-बसों की बैटरी करीब 30 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाती थी लेकिन अब यह समय बढ़कर एक घंटे से अधिक हो गया है। चालक-परिचालकों के अनुसार अब चार्जिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है जिससे बसों के निर्धारित चक्कर प्रभावित हो रहे हैं और शेड्यूल बिगड़ रहा है।
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अधिक गर्मी में क्यों घट जाती है बैटरी की चार्जिंग क्षमता
तेज गर्मी में बैट्री का तापमान सुरक्षित सीमा से ऊपर जाने लगता है। ऐसे में बीएमएस चार्जिंग स्पीड को स्वतः कम कर देता है ताकि बैटरी ओवरहीट न हो। अधिक तापमान बैटरी सेल्स की केमिकल स्थिरता को प्रभावित करता है जिससे फास्ट चार्जिंग जोखिमपूर्ण हो सकती है। कई ई-बसों में बैटरी कूलिंग सिस्टम लगा होता है। आमतौर पर 20 से 35 डिग्री के बीच का तापमान ई-वाहनों की बैटरियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर पहुंचता है तो चार्जिंग समय बढ़ना, रेंज घटना और ऊर्जा खपत बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
गर्मी के मौसम में बैटरी में तकनीकी समस्याएं सामान्य रूप से बढ़ जाती हैं जिसका असर संचालन पर पड़ता है। अभी प्रत्येक बस के चार से पांच फेर मिस हो रहे हैं। - केशव, इंचार्ज, ई-बस सेवा डिपो हिसार।
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हिसार रोडवेज डिपो में शहर के लोकल रूटों पर पांच ई-बसें संचालित हो रही हैं। प्रत्येक बस रोजाना लगभग 12 चक्कर लगाती है लेकिन भीषण गर्मी में तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रति बस 4 से 5 चक्कर रद्द करने पड़ रहे हैं। एसी के अधिक उपयोग से बैटरी की खपत बढ़ रही है जिससे बसों की रनिंग क्षमता भी प्रभावित हुई है। ई-बसें चार्जिंग स्टेशन पर अधिक समय तक खड़ी रह रही हैं जबकि बस स्टॉप पर यात्री बसों का इंतजार करते रह जाते हैं। इससे यात्रियों को समय पर बस उपलब्ध नहीं हो पा रही और उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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चार्जिंग समय दोगुना हुआ
पहले ई-बसों की बैटरी करीब 30 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाती थी लेकिन अब यह समय बढ़कर एक घंटे से अधिक हो गया है। चालक-परिचालकों के अनुसार अब चार्जिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है जिससे बसों के निर्धारित चक्कर प्रभावित हो रहे हैं और शेड्यूल बिगड़ रहा है।
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अधिक गर्मी में क्यों घट जाती है बैटरी की चार्जिंग क्षमता
तेज गर्मी में बैट्री का तापमान सुरक्षित सीमा से ऊपर जाने लगता है। ऐसे में बीएमएस चार्जिंग स्पीड को स्वतः कम कर देता है ताकि बैटरी ओवरहीट न हो। अधिक तापमान बैटरी सेल्स की केमिकल स्थिरता को प्रभावित करता है जिससे फास्ट चार्जिंग जोखिमपूर्ण हो सकती है। कई ई-बसों में बैटरी कूलिंग सिस्टम लगा होता है। आमतौर पर 20 से 35 डिग्री के बीच का तापमान ई-वाहनों की बैटरियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर पहुंचता है तो चार्जिंग समय बढ़ना, रेंज घटना और ऊर्जा खपत बढ़ना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
गर्मी के मौसम में बैटरी में तकनीकी समस्याएं सामान्य रूप से बढ़ जाती हैं जिसका असर संचालन पर पड़ता है। अभी प्रत्येक बस के चार से पांच फेर मिस हो रहे हैं। - केशव, इंचार्ज, ई-बस सेवा डिपो हिसार।