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वातानुकूलित सुविधा से लैस होगा आयुर्वेदिक अस्पताल, 40 लाख रुपये आएगा खर्च
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हिसार। गांव मय्यड़ में निर्माणाधीन जिला आयुर्वेदिक अस्पताल वातानुकूलित सुविधा से लैस होगा। इस पर करीब 40 लाख रुपये खर्च आएगा। इसके अलावा अस्पताल में आरओ प्लांट, नर्सिंग कॉल सेंटर व पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इन्हीं सुविधाओं के कारण अस्पताल के बिजली संबंधित काम का बजट पांच गुणा बढ़कर करीब 5 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
बता दें कि बजट के अभाव में आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कार्य करीब चार माह से बंद पड़ा है। ठेकेदार का कहना है कि निर्माण कार्य (सिविल वर्क) को पूरा करने में 50 लाख रुपये के बजट की और जरूरत पड़ेगी। अभी तक सिविल वर्क पर 8.71 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा बिजली का बजट भी एक करोड़ रुपये से बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो गया है। बीएंडआर ने स्वास्थ्य विभाग से और बजट उपलब्ध करवाने की मांग की तो स्वास्थ्य विभाग ने बजट बढ़ने का कारण पूछा था। इसके बाद बीएंडआर की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को जवाब भेज दिया गया। हालांकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने बीएंडआर को बजट नहीं भेजा है।
ये सुविधाएं होंगी उपलब्ध
- नर्सिंग कॉल स्टेशन
- पब्लिक एड्रेस सिस्टम
- सोलर लाइट
- सोलर प्लांट
- सोलर वाटर हीटर
- लिफ्ट
- मेडिकल गैस पाइप लाइन
- सेंट्रल एसी
- अग्निशमन यंत्र
तीन मंजिला है यह भवन
अस्पताल का भवन तीन मंजिला है। इसमें 50 बेड उपलब्ध होंगे। अस्पताल में आयुर्वेदिक पद्धति (पंचकर्म योगा) से इलाज किया जाएगा। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कक्ष बनाए जाएंगे। प्रथम तल पर पंचकर्मा सेंटर, योगा हॉल व विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रोगियों के दाखिले के लिए वार्ड बनाए जाएंगे। दूसरे तल पर स्पेशल वार्ड एवं डिलीवरी वार्ड बनाया जाएगा। अस्पताल परिसर में हर्बल गार्डन विकसित करने की भी योजना है। इनका इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाएगा।
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जिले में आयुर्वेद के 44 एएमओ
जिले भर में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ हैं, जो वर्तमान में जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में तैनात है। इनमें स्थायी व कॉन्ट्रेक्ट दोनों शामिल हैं। कोरोना महामारी में आयुर्वेद इलाज कारगर साबित हुआ। चिकित्सकों का भी मानना है कि जिन मरीजों का आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाएगा, उन मरीजों में 90 प्रतिशत जल्द रिकवरी हुई।
वर्जन
अस्पताल में कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, जिस कारण से बजट इतना बढ़ा है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा जा चुका है।
सुमेर सिंह, एसडीओ, बिजली शाखा, बीएंडआर
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बता दें कि बजट के अभाव में आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कार्य करीब चार माह से बंद पड़ा है। ठेकेदार का कहना है कि निर्माण कार्य (सिविल वर्क) को पूरा करने में 50 लाख रुपये के बजट की और जरूरत पड़ेगी। अभी तक सिविल वर्क पर 8.71 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा बिजली का बजट भी एक करोड़ रुपये से बढ़कर 5 करोड़ रुपये हो गया है। बीएंडआर ने स्वास्थ्य विभाग से और बजट उपलब्ध करवाने की मांग की तो स्वास्थ्य विभाग ने बजट बढ़ने का कारण पूछा था। इसके बाद बीएंडआर की तरफ से स्वास्थ्य विभाग को जवाब भेज दिया गया। हालांकि अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने बीएंडआर को बजट नहीं भेजा है।
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ये सुविधाएं होंगी उपलब्ध
- नर्सिंग कॉल स्टेशन
- पब्लिक एड्रेस सिस्टम
- सोलर लाइट
- सोलर प्लांट
- सोलर वाटर हीटर
- लिफ्ट
- मेडिकल गैस पाइप लाइन
- सेंट्रल एसी
- अग्निशमन यंत्र
तीन मंजिला है यह भवन
अस्पताल का भवन तीन मंजिला है। इसमें 50 बेड उपलब्ध होंगे। अस्पताल में आयुर्वेदिक पद्धति (पंचकर्म योगा) से इलाज किया जाएगा। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी एवं प्रशासनिक अधिकारियों के कक्ष बनाए जाएंगे। प्रथम तल पर पंचकर्मा सेंटर, योगा हॉल व विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रोगियों के दाखिले के लिए वार्ड बनाए जाएंगे। दूसरे तल पर स्पेशल वार्ड एवं डिलीवरी वार्ड बनाया जाएगा। अस्पताल परिसर में हर्बल गार्डन विकसित करने की भी योजना है। इनका इस्तेमाल दवा बनाने में किया जाएगा।
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जिले में आयुर्वेद के 44 एएमओ
जिले भर में आयुर्वेद के करीब 44 एएमओ हैं, जो वर्तमान में जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में तैनात है। इनमें स्थायी व कॉन्ट्रेक्ट दोनों शामिल हैं। कोरोना महामारी में आयुर्वेद इलाज कारगर साबित हुआ। चिकित्सकों का भी मानना है कि जिन मरीजों का आयुर्वेद पद्धति से इलाज किया जाएगा, उन मरीजों में 90 प्रतिशत जल्द रिकवरी हुई।
वर्जन
अस्पताल में कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, जिस कारण से बजट इतना बढ़ा है। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा जा चुका है।
सुमेर सिंह, एसडीओ, बिजली शाखा, बीएंडआर