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Hisar News: ''''अर्जुन'''' बनीं अंतिम, पिता बोले-बेटी के हाथ में अवाॅर्ड देख गर्व से सीना चौड़ा हो गया
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अर्जुन अवार्ड लेती पहलवान अंतिम पंघाल
हिसार। एशियन गेम्स की कांस्य पदक विजेता हिसार की पहलवान अंतिम पंघाल को मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अर्जुन अवाॅर्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर अंतिम के पिता रामनिवास उनके साथ थे। पिता रामनिवास ने बताया कि जब बेटी को अर्जुन अवाॅर्ड मिलते देखा तो गर्व से सीना चौड़ा हो गया। छोटी सी उम्र में बेटी ने न केवल खुद का बल्कि देश का नाम चमकाया है। मुझे बेटी पर गर्व है।
बता दें, कि पहलवान अंतिम पंघाल साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की टॉप स्कीम टारगेट ओलंपिक पोडियम के तहत प्रशिक्षण ले रही हैं। साई की ओर से उसे पर्सनल कोच से लेकर फिजियोथेरेपिस्ट तक की सुविधा दी जा रही है। हर माह अंतिम को ट्रेनिंग के लिए 50 हजार रुपये मिल रहे हैं। फिलहाल अंतिम साई में कोच राजेश नांदल के पास प्रशिक्षण ले रही हैं। अंतिम चार बहनों में सबसे छोटी है। अंतिम ने बड़ी बहन सरिता से प्रेरणा लेकर कुश्ती की शुरुआत की थी।
अंतिम पंघाल की उपलब्धियां
- 2022 में अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
-2022 में अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक
- 2022 में अंडर-20 जूनियर वुमन नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- 2021 में सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक
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आज बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में बेटियां परचम लहरा रही हैं। बेटी अंतिम ने नाम रोशन कर दिया। अंतिम अन्य बेटियों के लिए प्रेरणादायक बनी है। - कृष्णा देवी, अंतिम पंघाल की माता
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बता दें, कि पहलवान अंतिम पंघाल साई (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की टॉप स्कीम टारगेट ओलंपिक पोडियम के तहत प्रशिक्षण ले रही हैं। साई की ओर से उसे पर्सनल कोच से लेकर फिजियोथेरेपिस्ट तक की सुविधा दी जा रही है। हर माह अंतिम को ट्रेनिंग के लिए 50 हजार रुपये मिल रहे हैं। फिलहाल अंतिम साई में कोच राजेश नांदल के पास प्रशिक्षण ले रही हैं। अंतिम चार बहनों में सबसे छोटी है। अंतिम ने बड़ी बहन सरिता से प्रेरणा लेकर कुश्ती की शुरुआत की थी।
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अंतिम पंघाल की उपलब्धियां
- 2022 में अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
-2022 में अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक
- 2022 में अंडर-20 जूनियर वुमन नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- 2021 में सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक
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आज बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में बेटियां परचम लहरा रही हैं। बेटी अंतिम ने नाम रोशन कर दिया। अंतिम अन्य बेटियों के लिए प्रेरणादायक बनी है। - कृष्णा देवी, अंतिम पंघाल की माता