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तीन गांवों के सामूहिक जलघर के नवीनीकरण में गोलमाल के आरोप
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बास। गांव सीसर, खरबला व रोशन खेड़ा के सामूहिक जलघर के नवीनीकरण में गोलमाल के आरोप लगाए हैं। दो साल पहले बने एक वाटर टैंक की दीवार गिर गई। इस पर ग्रामीणों ने घटिया सामग्री प्रयोग करने के ठेकेदार व पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस गड़बड़ी की शिकायत सीएम विंडो, मुख्यमंत्री व विजिलेंस तक को कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। पूर्व सरपंच रणबीर सिंह ने बताया कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने गांव सीसर, खरबला व रोशन खेड़ा के सामूहिक जलघर के नवीनीकरण के लिए करीब सवा 6 करोड़ रुपये मंजूर करवाए थे, लेकिन ठेकेदार और पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने मिलीभगत कर आधे से भी कम पैसे उनके जलघर के नवीनीकरण में लगाए गए हैं। वहीं दो पुराने वाटर टैंक जो पुरानी ईटों से ही बनाए गए थे, उनकी रिपेयरिंग कर लीपापोती की गई है। वहीं नए टैंक बनाने के लिए उठाई गई साढ़े 5 लाख रुपये की मिट्टी भी बेची गई है। जलघर से लाखों रुपये के हरे पेड़ों को काटकर बेचा गया है। पंप हाउस जो कि पहले से ही बना हुआ था उसकी छत बदलकर और उसकी रिपेयरिंग कर 3 लाख 90 हजार रुपये पास करवा लिए गए। वहीं जलघर में पानी लाने के लिए जिस नाले का निर्माण किया गया था वह भी अधर में लटका है और उसकी पूरी पेमेंट ठेकेदार को कर दी गई है। इस मौके पर धर्मपाल शर्मा, जयकुवार, भूप सिंह, महेंद्र, गोपी राम, देवेंद्र शर्मा, जसवंत, रामफल, जयबीर, नानक चंद, बिजेंद्र, बीरबल, आजाद वाल्मीकि, सुभाष, मदन चौहान, सुल्तान, मेहर सिंह, कपूर, पप्पू राठी व पटवारी मौजूद रहे।
ग्रामीणों द्वारा गड़बड़ी के जो आरोप लगाए हैं वह बेबुनियाद हैं। सीएम विंडो की शिकायत पर मामले की पूरी जांच की जा चुकी है। इस मामले में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं मिली। टैंक की दीवार साथ लगते दो फिल्टरों की दीवार व मिट्टी टैंक की दीवार पर गिरने की वजह से टूटी है। जिसको जल्द ही ठीक करवा दिया जाएगा। - शशिकांत, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ हांसी।
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ग्रामीणों ने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। पूर्व सरपंच रणबीर सिंह ने बताया कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने गांव सीसर, खरबला व रोशन खेड़ा के सामूहिक जलघर के नवीनीकरण के लिए करीब सवा 6 करोड़ रुपये मंजूर करवाए थे, लेकिन ठेकेदार और पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने मिलीभगत कर आधे से भी कम पैसे उनके जलघर के नवीनीकरण में लगाए गए हैं। वहीं दो पुराने वाटर टैंक जो पुरानी ईटों से ही बनाए गए थे, उनकी रिपेयरिंग कर लीपापोती की गई है। वहीं नए टैंक बनाने के लिए उठाई गई साढ़े 5 लाख रुपये की मिट्टी भी बेची गई है। जलघर से लाखों रुपये के हरे पेड़ों को काटकर बेचा गया है। पंप हाउस जो कि पहले से ही बना हुआ था उसकी छत बदलकर और उसकी रिपेयरिंग कर 3 लाख 90 हजार रुपये पास करवा लिए गए। वहीं जलघर में पानी लाने के लिए जिस नाले का निर्माण किया गया था वह भी अधर में लटका है और उसकी पूरी पेमेंट ठेकेदार को कर दी गई है। इस मौके पर धर्मपाल शर्मा, जयकुवार, भूप सिंह, महेंद्र, गोपी राम, देवेंद्र शर्मा, जसवंत, रामफल, जयबीर, नानक चंद, बिजेंद्र, बीरबल, आजाद वाल्मीकि, सुभाष, मदन चौहान, सुल्तान, मेहर सिंह, कपूर, पप्पू राठी व पटवारी मौजूद रहे।
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ग्रामीणों द्वारा गड़बड़ी के जो आरोप लगाए हैं वह बेबुनियाद हैं। सीएम विंडो की शिकायत पर मामले की पूरी जांच की जा चुकी है। इस मामले में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं मिली। टैंक की दीवार साथ लगते दो फिल्टरों की दीवार व मिट्टी टैंक की दीवार पर गिरने की वजह से टूटी है। जिसको जल्द ही ठीक करवा दिया जाएगा। - शशिकांत, एक्सईएन, पब्लिक हेल्थ हांसी।
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