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Hisar News: 16 दिन घरों में पूजा करने के बाद गणगौर को धूमधाम से किया विदा
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हिसार की बड़वाली ढाणी में गणगौर विसर्जन के लिए जातीं महिलाएं।
हिसार। घरों में 16 दिन तक पूजा करने के बाद शनिवार को गणगौर को धूमधाम से विदा किया गया। बड़वाली ढाणी से महिलाएं शाम को डीजे पर हरियाणवी और राजस्थानी गीतों पर नाचते हुए गणगौर को विसर्जन करने के लिए निकलीं। वहां पूजा के बाद गणगौर को विसर्जन किया।
महिलाओं ने रास्तेभर खूब नृत्य किया और गणगौर के साथ सेल्फी ली। इससे पहले दिनभर घरों में पूजा, अर्चना चलती रही। महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी लगाई और गणगौर के गीत गाए। यह महिलाएं पूरे सालभर इस पर्व का इंतजार करती हैं। यह पर्व राजस्थान में काफी लोकप्रिय है लेकिन अब हरियाणा में भी काफी प्रचलित हो रहा है।
आयोजन समिति से जुड़ी सीमा ने बताया कि गणगौर उत्सव में मुख्य रूप से माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की आराधना की जाती है। यह पर्व शिव-पार्वती के पवित्र प्रेम, अखंड सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन का प्रतीक है।
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महिलाओं ने बताया कि होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां रोज प्रात: काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं जिस बेटी की शादी हो जाती है वह शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है। कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था। उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। इस मौके पर विशाखा, उर्मिला, चित्रा, अर्चना, सुशीला, चंदा, विनीता, किरण आदि मौजूद रहीं।
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महिलाओं ने रास्तेभर खूब नृत्य किया और गणगौर के साथ सेल्फी ली। इससे पहले दिनभर घरों में पूजा, अर्चना चलती रही। महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी लगाई और गणगौर के गीत गाए। यह महिलाएं पूरे सालभर इस पर्व का इंतजार करती हैं। यह पर्व राजस्थान में काफी लोकप्रिय है लेकिन अब हरियाणा में भी काफी प्रचलित हो रहा है।
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आयोजन समिति से जुड़ी सीमा ने बताया कि गणगौर उत्सव में मुख्य रूप से माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की आराधना की जाती है। यह पर्व शिव-पार्वती के पवित्र प्रेम, अखंड सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन का प्रतीक है।
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महिलाओं ने बताया कि होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां रोज प्रात: काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं जिस बेटी की शादी हो जाती है वह शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है। कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था। उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। इस मौके पर विशाखा, उर्मिला, चित्रा, अर्चना, सुशीला, चंदा, विनीता, किरण आदि मौजूद रहीं।