फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   81 months, 37 hearings, 15 witnesses could not prove the charges

81 महीने, 37 सुनवाई, 15 गवाह नहीं कर पाए आरोप साबित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 12:54 AM IST
विज्ञापन
81 months, 37 hearings, 15 witnesses could not prove the charges
हिसार। बरवाला स्थित सतलोक आश्रम से 28 नवंबर 2014 को बरामद 134 तरह की प्रतिबंधित दवा मिलने के मामले में सोमवार को रामपाल समेत चार आरोपियों को बरी कर दिया गया। तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर कृष्ण कुमार की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया था। रामपाल के खिलाफ इस मामले में 81 महीने में 37 सुनवाई हुईं। सरकारी पक्ष की ओर से 15 गवाह पेश किए गए, लेकिन आरोप साबित नहीं हो पाए।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार 23 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों को बहस के लिए बुलाया गया था। साक्ष्यों के तौर पर सरकारी पक्ष ने एक फोटो प्रस्तुत किया। इसमें आश्रम के अंदर कमरे में अस्पताल लिखा हुआ था। अदालत में रामपाल की अस्पताल से बाहर निकालते हुए का वीडियो पेश किया। इन साक्ष्यों को अदालत ने पुख्ता नहीं माना। सरकारी पक्ष अदालत में यह भी साबित नहीं कर पाया कि आश्रम के मालिक रामपाल हैं। रामपाल के वकील ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आश्रम में रामपाल प्रचारक हैं। वह उनकी संपत्ति नहीं है। उन्होंने अपने पक्ष में कहा कि ड्रग कंट्रोलर ने जो प्राइमरी कंपलेंट दायर की थी वह सिर्फ पूर्व सीएमओ ओम प्रकाश हुड्डा व आश्रम के खिलाफ डाली थी। इसमें रामपाल का नाम भी नहीं था।
विज्ञापन

दरअसल, 2006 में रामपाल के करौंथा आश्रम में जमीन को लेकर विवाद हुआ था। उस दौरान करौंथा आश्रम में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। उस प्रकरण में सुनवाई के दौरान रामपाल के समर्थकों ने हिसार की अदालत में हंगामा किया था। हंगामे के बाद पुलिस ने रामपाल और उसके समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें वकीलों के साथ बदतमीजी के आरोप भी थे। बार एसोसिएशन की शिकायत पर यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में रामपाल को तलब किया था। 5 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। 10 नवंबर को रामपाल को कोर्ट में पेश किया जाना था, लेकिन समर्थकों ने अस्वस्थ बताकर पेश नहीं होने दिया था। हाईकोर्ट से फटकार के बाद पुलिस ने रामपाल को कोर्ट में पेश करने के लिए ऑपरेशन शुरू किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद 18 नवंबर 2014 को पुलिस ने सतलोक आश्रम में प्रवेश करने का प्रयास किया था तो समर्थकों से टकराव हो गया था। उस दौरान छह लोगों की मौत हो गई थी, कई घायल हो गए थे। 20 नवंबर 2014 को रामपाल की गिरफ्तारी के बाद आश्रम खाली करवाकर पुलिस ने कब्जे में ले लिया था। तब आश्रम से भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयां बरामद हुई थीं।
इन दलीलों से जीता केस
- 20 नवंबर को रामपाल गिरफ्तार होने के बाद 28 नवंबर को उसकी गैरहाजिरी में बरामद हुई थी। उनके पीछे से कुछ भी दवा वहां रखकर उनके खिलाफ साजिश रच सकता है।
- 134 तरह की दवाइयां सीआरपीएफ के हवाले कर दी गई थी। सीआरपीएफ का कोई भी कर्मी या रिकॉर्ड पेश नहीं हुआ।
- 23 दिसंबर 2014 को दवाओं को सील किया गया। उन दवाओं का सैंपल भी नहीं लिया।
- बिना जांच कैसे साबित होगा कि दवाएं अनफिट थी, नकली थी ,हानिकारक थी।
- एक भी मरीज सामने नहीं आया जो दावा करे कि मैंने दवाएं आश्रम से या रामपाल से ली थी।
- ड्रग एक्ट में रामपाल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए चंडीगढ़ में ड्रग कंट्रोलर रामपाल के खिलाफ स्वीकृति नहीं ली।
जानिए रामपाल का पूरा सफर....
सतलोक आश्रम संचालक रामपाल सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था। लापरवाही के चलते वर्ष 2000 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उसने रोहतक के करौंथा में आश्रम स्थापित किया। वर्ष 2006 में वहां जमीन विवाद को लेकर ग्रामीणों के साथ टकराव हुआ। इसमें एक व्यक्ति की मौत हुई। रामपाल पर हत्या का केस दर्ज हुआ। इसके बाद हिसार के बरवाला में सतलोक आश्रम स्थापित किया गया। वर्ष 2014 में रामपाल के केस को हिसार अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। यहां वकीलों के साथ दुर्व्यवहार मामले में वकीलों की शिकायत पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय में पेश न होने पर अदालत ने पुलिस प्रशासन को आरोपी रामपाल को पेश करने के आदेश दिए। 18 नवंबर को रामपाल समर्थकों का पुलिस के साथ टकराव हुआ। आश्रम के अंदर 5 लोगों के शव मिले। इनके आधार पर रामपाल व उनके समर्थकों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। पुलिस ने रामपाल के खिलाफ छह केस दर्ज किए थे।

रामपाल पर हिसार में दर्ज केस का विवरण
थाना केस नंबर आरोप फैसला
बरवाला 426 सरकारी काम में बाधा अगस्त 2017 में बरी
बरवाला 427 रास्ता रोकना अगस्त 2017 में बरी
बरवाला 428 देशद्रोह अदालत में लंबित
बरवाला 429, 430 हत्या 2018 उम्रकैद
बरवाला 443 गैस सिलिंडर अदालत में लंबित
रोहतक में भी हत्या का एक केस
रोहतक में रामपाल के खिलाफ हत्या का केस चल रहा है। जिस पर हाईकोर्ट का स्टे चल रहा है। इसके अलावा रामपाल को बरवाला आश्रम में हत्या केस में उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। केस नंबर 426 में जेएमआईसी की अदालत के बरी के फैसले को अब सरकारी पक्ष ने एडीजे कोर्ट में चुनौती दी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed