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अस्पताल जाते समय पार्थ के मुंह से निकले थे बोल, शायद न लौटूं
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गुस्से में मृतक बच्चे की दादी।
- फोटो : Hisar
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हिसार। कहते हैं बच्चे के बोल सच्चे होते हैं। ऐसा ही कुछ पार्थ के साथ भी हुआ। वह न केवल परिजनों को प्यारा था, बल्कि पड़ोस में भी उसे सभी प्यार करते थे। वीरवार को एक पड़ोसन पार्थ से बात कर रही थी तो पार्थ ने कहा था- आंटी मेरा कल ऑपरेशन है, शायद मैं ना लौटूं। ऐसा पार्थ के साथ हो भी गया। शुक्रवार को वह अस्पताल से जिंदा घर नहीं लौट सका। इससे न केवल परिजन गमगीन हुए, बल्कि आस-पड़ोस में भी उसके जाने का गम छा गया।
आज केक काटना था पार्थ को
23 जनवरी को पार्थ का जन्मदिन था। इसको लेकर घर में पार्टी की तैयारियां की जा रही थीं। पार्थ के पिता मोहित ने बताया कि पार्थ ने ऑपरेशन से पहले ही कहा था कि जन्मदिन पर मुझे क्या दोगे। रोते हुए मोहित ने कहा कि पार्थ ने जन्मदिन पर अजीब तोहफा दिया है, वह उन्हें जिंदगी भर के लिए आंखों में आंसू दे गया।
अपने कलेजे के टुकड़े को लिए बैठा रहा मोहित
जिस समय अस्पताल के बाहर पार्थ की मौत से गुस्साए परिजनों का हंगामा चल रहा था, उस दौरान पिता अपने कलेजे के टुकड़े पार्थ के शव को गोद में लिए अस्पताल की सीढ़ियों पर गुमसुम बैठे थे। पास में पार्थ की मां भी बैठी थी और भी गुमसुम थी। दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन गोद में अपने मासूस का शव और दोनों के चेहरे पर खामोशी बहुत कुछ बोल रही थी और आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
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पोते का शव देख दादी का संयम दे गया जवाब
पार्थ का शव देखकर उसकी दादी का संयम जवाब दे गया और वे बेकाबू हो रही थीं। कभी वह अस्पताल में रखे गमले तोड़ रही थीं तो कभी बंद किए गए अस्पताल के दरवाजे को जोर-जोर से थपथपा रही थीं। उन्होंने वहां टूटी फैंसी लाइट को उठाकर अस्पताल की तरफ भी फेंका। इसके विपरीत पार्थ के दादा भी पोते का शव देख बदहवास इधर-उधर दौड़ रहे थे। कभी वे पुलिस से जवाब मांग रहे थे तो कभी न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे।
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आज केक काटना था पार्थ को
23 जनवरी को पार्थ का जन्मदिन था। इसको लेकर घर में पार्टी की तैयारियां की जा रही थीं। पार्थ के पिता मोहित ने बताया कि पार्थ ने ऑपरेशन से पहले ही कहा था कि जन्मदिन पर मुझे क्या दोगे। रोते हुए मोहित ने कहा कि पार्थ ने जन्मदिन पर अजीब तोहफा दिया है, वह उन्हें जिंदगी भर के लिए आंखों में आंसू दे गया।
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अपने कलेजे के टुकड़े को लिए बैठा रहा मोहित
जिस समय अस्पताल के बाहर पार्थ की मौत से गुस्साए परिजनों का हंगामा चल रहा था, उस दौरान पिता अपने कलेजे के टुकड़े पार्थ के शव को गोद में लिए अस्पताल की सीढ़ियों पर गुमसुम बैठे थे। पास में पार्थ की मां भी बैठी थी और भी गुमसुम थी। दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन गोद में अपने मासूस का शव और दोनों के चेहरे पर खामोशी बहुत कुछ बोल रही थी और आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
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पोते का शव देख दादी का संयम दे गया जवाब
पार्थ का शव देखकर उसकी दादी का संयम जवाब दे गया और वे बेकाबू हो रही थीं। कभी वह अस्पताल में रखे गमले तोड़ रही थीं तो कभी बंद किए गए अस्पताल के दरवाजे को जोर-जोर से थपथपा रही थीं। उन्होंने वहां टूटी फैंसी लाइट को उठाकर अस्पताल की तरफ भी फेंका। इसके विपरीत पार्थ के दादा भी पोते का शव देख बदहवास इधर-उधर दौड़ रहे थे। कभी वे पुलिस से जवाब मांग रहे थे तो कभी न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे।

बेटे शव को लेकर गमगीन बैठे माता-पिता।- फोटो : Hisar

बच्चे के शव को लेकर बैठा उसका पिता मोहित वधवा व विलाप करती मृतक की बहन। - फोटो : Hisar

7 वर्षीय पार्थ अपने मम्मी-पापा व छोटे भाई के साथ। फाइल फोटो- फोटो : Hisar