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Hisar News: जिले में 651 किसानों ने 1127 एकड़ में शुरू की जैविक खेती, 103 ने लिया प्रशिक्षण, अच्छा हो रहा मुनाफा

Fri, 22 Dec 2023 10:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Fri, 22 Dec 2023 10:15 PM IST
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651 farmers started organic farming in 1127 acres in the district, 103 took training, getting good profits
हिसार।
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जिले के किसानों में जैविक खेती का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिले के 651 किसानों ने जैविक खेती के लिए पंजीकरण करवाया हैैै। जिले में करीब 1127 एकड़ में किसान जैविक खेती कर रहे हैं। कृषि विभाग ने इन किसानों को सत्यापित करा कर प्रशिक्षण शुरु कर दिया है। जिसमें अब तक 103 किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।प्रशिक्षण लेने के लिए 399 किसान अपनी सहमति जता चुके हैं। जैविक खेती से तैयार फसलों के किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। किसान अपने परिवार के खाने के लिए बिना उर्वरक, बिना कीटनाशकों का प्रयोग किए गेहूं, चना, सरसों, मूंग, बाजरा, जौ, धान आदि उगा रहे हैं। जीरो बजट खेती के तहत फसल में गोबर की खाद, जीवा अमृत, नीम का छिडकाव किया जाता है। किसान दिवस पर जिले के चुनिंदा प्रगतिशील किसानों से बातचीत की। किसानों ने जैविक खेती को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

पैदावर भले ही कम लेकिन खाने में मजेदार..
गांव किशनगढ़ के प्रगतिशील किसान कुलदीप ने बताया कि मैं 6 साल से 2 एकड़ में जैविक खेती करता हूं। इसमें मैंने अमरूद,मौसमी और सब्जी की फसल लगा रखी हैं। पैदावर कम है लेकिन खाने में मजेदार है। पौधों की नर्सरी भी लगा रखी है। सब्जी व फल मंडी में भी बेचते है तब अच्छी कीमत मिलती है। दिल्ली में नेशनल अवाॅर्ड भी मिला है। चौ चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय से भी अवाॅर्ड मिला है।
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फसलों की कीमत अच्छी मिलती है
गांव सीसवाल निवासी प्रगतिशील किसान मनोहरलाल ने बताया कि मैं 7-8 साल से जैविक खेती करता हूं। दो एकड चपल कदू व दो एकड में तरबूज की फसल लगाता हूं। चौ चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से प्रोत्साहित होकर जैविक खेती शुरू की थी। फसल को बिमारियों से बचाने के लिए जीवा अमृत और नीम का छिड़काव किया जाता है। मुख्यमंत्री की ओर से 1 लाख की प्रोत्साहन राशि दी गई थी।
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नर्सरी में तैयार कर बेचते है पौधे
गांव मोहब्तपुर निवासी प्रगतिशील किसान भीखु ने बताया कि में 3 एकड में जैविक खेती करता हूं। 2 एकड में देशी गेंहू जिसकी कीमत 5500 प्रति क्विटंल बिकती है। जिसमें 100 प्रतिशत शुद्धता होती है। पौधों की नर्सरी तैयार कर रहे है। 5 साल से जैविक खेती कर रहा हूं। जैविक खेती मध्यप्रदेश के बहबलपुर और कुरूक्षेत्र से ट्रेनिंग की है।

देश भर में स्ट्रॉबेरी के लिए प्रसिद्ध स्याहड़वा
गांव स्याहड़वा प्रगतिशील किसान सुभाष मुंदलिया ने बताया कि मैं पिछले 9 सालों से स्ट्रॉबेरी की खेती करता हूं। पहली बार जब फसल उगाई थी तब इसके बारे में इतनी जानकारी नहीं थी। शुरूआत में प्रति एकड पर 4 से 5 लाख खर्च आता है। दूसरी बार फसल लगाएं तो खर्च आधा और मुनाफा दोगुना हो जाता है। पिछली बार 12 का मुनाफा कमाया था अबकी बार ज्यादा की उम्मीद है। हमारे गांव की स्ट्रॉबेरी पूरे देश में प्रसिद्ध है।
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