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सीएम साहब! बेसहारा पशुओं से शहर को कब मिलेगी आजादी
Updated Wed, 15 Aug 2018 01:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। देश 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जबकि शहर को लाख प्रयासों के बाद अभी तक लावारिस पशुओं से मुक्ति नहीं मिली है। सोमवार रात को सड़कों पर दौड़ते लावारिस पशुओं के चक्कर में एक जान और चली गई। गांव धांसू निवासी 50 वर्षीय कपूर सिंह की बाइक लावारिस पशुओं को बचाने के चक्कर में डिवाइडर से टकरा गई। इससे बैलेंस बिगड़ गया और लोहे की ग्रिल का एक एरिया कपूर सिंह के चेहरे के निचले हिस्से में धंस गया। दो युवकों ने सरियों में फंसे उनके चेहरे को निकाल कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इससे पहले भी शहर में लावारिस पशुओं के कारण कई हादसे हो चुके हैं। स्ट्रे कैटल फ्री शहर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। लावारिस पशुओं का स्थायी समाधान न नगर निगम करवा पा रहा है, न ही जिला प्रशासन।
प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे कपूर सिंह
गांव धांसू निवासी 50 वर्षीय कपूर सिंह प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे। सोमवार रात को कपूर सिंह विकास नगर में ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम में रात की रखवाली कर रहे थे। करीब दो बजे उनके पास कंपनी के मुख्य ऑफिस से फोन आया। फोन आने के बाद कपूर सिंह अपनी बाइक पर इंडस्ट्रियल एरिया जा रहा था। जब वह तलाकी गेट से 20 कदम आगे सेवक सभा अस्पताल के पास पहुंचे तो सड़क पर अचानक से गायों का झुंड आ गया। इसी झुंड से बचने के चक्कर में उनका बैलेंस बिगड़ गया और वह सड़क के बीच में लगी लोहे की ग्रिल से टकरा गए। टक्कर लगते ही एक सरिया उनके गले में घुस गया। इससे काफी देर तक कपूर सिंह वहीं पर लटकते रहे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो बाइक सवार युवकों ने उनको ग्रिल में फंसा देखा। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए उनके गले से सरिया निकालकर नीचे उतारा और गंभीर हालात में उन्हें नागरिक अस्पताल लेकर गए। ज्यादा खून बह जाने से उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
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फिर सामने आई पोस्टमार्टम में लापरवाही
नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम को लेकर एक सप्ताह में लापरवाही का तीसरा बड़ा मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम करवाने के लिए परिजनों व पुलिस को फिर से लंबा इंतजार करना पड़ा। सोमवार को अलग-अलग मामलों में पोस्टमार्टम करवाने आए परिजनों ने बताया कि वह सुबह से पोस्टमार्टम होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दोपहर के दो बजे तक भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने भी बताया कि उन्होंने दस बजे से पहले ही केस से संबंधित सभी कागजात अस्पताल में जमा करवा दिए थे, लेकिन उसके पांच घंटे बाद तक भी डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम नहीं किया।
सीएमओ साहब! कब बनवाएंगे व्यवस्था
बदहाल स्थिति यह है कि डॉक्टर समय पर पोस्टमार्टम करने नहीं आते हैं। हर बार मामला सीएमओ डॉ. दयानंद के संज्ञान में लाया जाता है। हर बार सीएमओ लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन अभी तक एक भी मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिसकर्मी सोमवार को भी यही पूछते रहे कि पता नहीं सीएमओ साहब पोस्टमार्टम संबंधी बदहाल व्यवस्था को कब सुधरवाएंगे।
हिसार। देश 71वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, जबकि शहर को लाख प्रयासों के बाद अभी तक लावारिस पशुओं से मुक्ति नहीं मिली है। सोमवार रात को सड़कों पर दौड़ते लावारिस पशुओं के चक्कर में एक जान और चली गई। गांव धांसू निवासी 50 वर्षीय कपूर सिंह की बाइक लावारिस पशुओं को बचाने के चक्कर में डिवाइडर से टकरा गई। इससे बैलेंस बिगड़ गया और लोहे की ग्रिल का एक एरिया कपूर सिंह के चेहरे के निचले हिस्से में धंस गया। दो युवकों ने सरियों में फंसे उनके चेहरे को निकाल कर उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इससे पहले भी शहर में लावारिस पशुओं के कारण कई हादसे हो चुके हैं। स्ट्रे कैटल फ्री शहर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। लावारिस पशुओं का स्थायी समाधान न नगर निगम करवा पा रहा है, न ही जिला प्रशासन।
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प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे कपूर सिंह
गांव धांसू निवासी 50 वर्षीय कपूर सिंह प्राइवेट कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे। सोमवार रात को कपूर सिंह विकास नगर में ट्रांसपोर्ट कंपनी के गोदाम में रात की रखवाली कर रहे थे। करीब दो बजे उनके पास कंपनी के मुख्य ऑफिस से फोन आया। फोन आने के बाद कपूर सिंह अपनी बाइक पर इंडस्ट्रियल एरिया जा रहा था। जब वह तलाकी गेट से 20 कदम आगे सेवक सभा अस्पताल के पास पहुंचे तो सड़क पर अचानक से गायों का झुंड आ गया। इसी झुंड से बचने के चक्कर में उनका बैलेंस बिगड़ गया और वह सड़क के बीच में लगी लोहे की ग्रिल से टकरा गए। टक्कर लगते ही एक सरिया उनके गले में घुस गया। इससे काफी देर तक कपूर सिंह वहीं पर लटकते रहे। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो बाइक सवार युवकों ने उनको ग्रिल में फंसा देखा। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए उनके गले से सरिया निकालकर नीचे उतारा और गंभीर हालात में उन्हें नागरिक अस्पताल लेकर गए। ज्यादा खून बह जाने से उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
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फिर सामने आई पोस्टमार्टम में लापरवाही
नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम को लेकर एक सप्ताह में लापरवाही का तीसरा बड़ा मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम करवाने के लिए परिजनों व पुलिस को फिर से लंबा इंतजार करना पड़ा। सोमवार को अलग-अलग मामलों में पोस्टमार्टम करवाने आए परिजनों ने बताया कि वह सुबह से पोस्टमार्टम होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दोपहर के दो बजे तक भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने भी बताया कि उन्होंने दस बजे से पहले ही केस से संबंधित सभी कागजात अस्पताल में जमा करवा दिए थे, लेकिन उसके पांच घंटे बाद तक भी डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम नहीं किया।
सीएमओ साहब! कब बनवाएंगे व्यवस्था
बदहाल स्थिति यह है कि डॉक्टर समय पर पोस्टमार्टम करने नहीं आते हैं। हर बार मामला सीएमओ डॉ. दयानंद के संज्ञान में लाया जाता है। हर बार सीएमओ लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन अभी तक एक भी मामले में कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिसकर्मी सोमवार को भी यही पूछते रहे कि पता नहीं सीएमओ साहब पोस्टमार्टम संबंधी बदहाल व्यवस्था को कब सुधरवाएंगे।