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अंतिम सुनवाई में नहीं पहुंचे प्रॉपर्टी टैक्स के 51 डिफॉल्टर, अब प्रॉपर्टी होगी सील
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हिसार। नगर निगम प्रशासन प्रॉपर्टी टैक्स के 51 बड़े डिफॉल्टरों की प्रॉपर्टी सील करेगा। निगम ने 80 डिफॉल्टरों को अपना पक्ष रखने के लिए सोमवार को निगम कार्यालय में बुलाया था, जिनमें से 29 ही पहुंचे। अब निगम ने अपना पक्ष न रखने वालों की प्रॉपर्टी सील करने का फैसला किया है। वहीं, निगम की तरफ से 100 और बड़े डिफॉल्टरों को नोटिस भेजे जाएंगे।
बता दें कि निगम प्रशासन ने जून में 100 बड़े डिफॉल्टरों को नोटिस थमाए थे। इन डिफॉल्टरों पर प्रॉपर्टी टैक्स के करीब 40 करोड़ रुपये बकाया है। इन नोटिस के माध्यम से इन्हें एक माह में बकाया टैक्स जमा करवाने या नोटिस का जवाब देने को कहा था, मगर इस समयावधि में सिर्फ दो डिफॉल्टरों ने ही 42 लाख रुपये बकाया टैक्स के रूप में जमा करवाया। जबकि 18 अन्य ने अपना पक्ष रखा था। इसके बाद निगम ने बाकी बचे 80 डिफॉल्टरों को 8 अगस्त को निगम कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा था।
सुनवाई के लिए तीन कमेटिया का किया गया था गठन
नगर निगम की तरफ से डिफॉल्टरों की सुनवाई को लेकर अतिरिक्त निगमायुक्त डॉ. प्रदीप हुड्डा, संयुक्त आयुक्त बेलिना व उप निगमायुक्त विरेंद्र सहारण के नेतृत्व में कमेटियों का गठन किया गया। मगर शाम 5 बजे तक इन कमेटियों के सामने 29 डिफॉल्टरों ने प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखा। इनमें से कुछ ने बकाया टैक्स जमा करवाने की बात भी कही। इस मौके पर सचिव संजय शर्मा सहित हाउस टैक्स शाखा के कर्मचारी मौजूद रहे।
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100 डिफॉल्टरों में मंदिर, धर्मशाला व अस्पताल शामिल
निगम प्रशासन के अनुसार इन 100 डिफॉल्टरों में तीन मंदिर, पांच धर्मशालाएं, चार इंडस्ट्री, एक पेट्रोल पंप, एक कांप्लेक्स, एक अस्पताल, एक बैंक शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो वैसे मंदिर व धर्मशाला का प्रॉपर्टी टैक्स माफ होता है, लेकिन इनमें दुकानें भी हैं, जिनका व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हो रहा है।
मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह में 3 करोड़ रुपये आया टैक्स
मौजूदा वित्त वर्ष के चार माह पूरे हो चुके हैं और अभी तक निगम प्रशासन के पास प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 3 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में निगम प्रशासन ने 22 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 24 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, जबकि 8.87 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए थे। बता दें कि प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है।
निगम को प्रॉपर्टी सील करने का भी अधिकार
अब कोई प्रॉपर्टी टैक्स धारक टैक्स नहीं जमा करवाता है तो निगम प्रशासन उसकी प्रॉपर्टी को सील भी कर सकता है। हालांकि जब से यह नियम लागू हुआ है, तब से आज तक निगम प्रशासन ने कोई भी प्रॉपर्टी सील नहीं की है, जबकि निगम प्रशासन का करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है।
प्रॉपर्टी टैक्स के 100 बड़े बकायेदारों को नोटिस भेजे थे। इनमें से 51 ने टैक्स जमा कराया न ही जवाब प्रस्तुत किया। अब इनकी प्रॉपर्टी सील की कार्रवाई की जाएगी। निगम 100 और बड़े बकायेदारों को भी जल्द ही नोटिस भेजेगा। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, नगर निगम
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बता दें कि निगम प्रशासन ने जून में 100 बड़े डिफॉल्टरों को नोटिस थमाए थे। इन डिफॉल्टरों पर प्रॉपर्टी टैक्स के करीब 40 करोड़ रुपये बकाया है। इन नोटिस के माध्यम से इन्हें एक माह में बकाया टैक्स जमा करवाने या नोटिस का जवाब देने को कहा था, मगर इस समयावधि में सिर्फ दो डिफॉल्टरों ने ही 42 लाख रुपये बकाया टैक्स के रूप में जमा करवाया। जबकि 18 अन्य ने अपना पक्ष रखा था। इसके बाद निगम ने बाकी बचे 80 डिफॉल्टरों को 8 अगस्त को निगम कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा था।
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सुनवाई के लिए तीन कमेटिया का किया गया था गठन
नगर निगम की तरफ से डिफॉल्टरों की सुनवाई को लेकर अतिरिक्त निगमायुक्त डॉ. प्रदीप हुड्डा, संयुक्त आयुक्त बेलिना व उप निगमायुक्त विरेंद्र सहारण के नेतृत्व में कमेटियों का गठन किया गया। मगर शाम 5 बजे तक इन कमेटियों के सामने 29 डिफॉल्टरों ने प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखा। इनमें से कुछ ने बकाया टैक्स जमा करवाने की बात भी कही। इस मौके पर सचिव संजय शर्मा सहित हाउस टैक्स शाखा के कर्मचारी मौजूद रहे।
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100 डिफॉल्टरों में मंदिर, धर्मशाला व अस्पताल शामिल
निगम प्रशासन के अनुसार इन 100 डिफॉल्टरों में तीन मंदिर, पांच धर्मशालाएं, चार इंडस्ट्री, एक पेट्रोल पंप, एक कांप्लेक्स, एक अस्पताल, एक बैंक शामिल हैं। अधिकारियों की मानें तो वैसे मंदिर व धर्मशाला का प्रॉपर्टी टैक्स माफ होता है, लेकिन इनमें दुकानें भी हैं, जिनका व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल हो रहा है।
मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती चार माह में 3 करोड़ रुपये आया टैक्स
मौजूदा वित्त वर्ष के चार माह पूरे हो चुके हैं और अभी तक निगम प्रशासन के पास प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 3 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में निगम प्रशासन ने 22 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं पिछले वित्त वर्ष में निगम ने 24 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, जबकि 8.87 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए थे। बता दें कि प्रॉपर्टी टैक्स नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत है।
निगम को प्रॉपर्टी सील करने का भी अधिकार
अब कोई प्रॉपर्टी टैक्स धारक टैक्स नहीं जमा करवाता है तो निगम प्रशासन उसकी प्रॉपर्टी को सील भी कर सकता है। हालांकि जब से यह नियम लागू हुआ है, तब से आज तक निगम प्रशासन ने कोई भी प्रॉपर्टी सील नहीं की है, जबकि निगम प्रशासन का करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है।
प्रॉपर्टी टैक्स के 100 बड़े बकायेदारों को नोटिस भेजे थे। इनमें से 51 ने टैक्स जमा कराया न ही जवाब प्रस्तुत किया। अब इनकी प्रॉपर्टी सील की कार्रवाई की जाएगी। निगम 100 और बड़े बकायेदारों को भी जल्द ही नोटिस भेजेगा। - डॉ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, नगर निगम