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3 प्रतिशत एडवांस है डब्ल्यूएच 1270 किस्म का अनाज, कुपोषण से बचाएगा
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हिसार। बच्चों में बढ़ते कुपोषण व गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने अनाज में खास किस्म की वैरायटी तैयार की है। विशेष वैरायटी डब्ल्यूएच 1270 किस्म का अनाज, जिसमें 37.9 पीपीएम आयरन और 37.8 पीपीएम जिंक है। यह सामान्य अनाज से तीन प्रतिशत गुुणवत्ता वाला और स्वास्थ्यवर्धक है। यह बात रविवार को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति बीआर कांबोज ने कही।
बेरोजगारी है प्रमुुख समस्या, युवा हस्तकला में बने निपुण
एचएयू के कुलपति बीआर कंबोज ने बताया कि आजकल बेरोजगारी प्रमुख समस्या है। इसलिए युवाओं को हस्तकला में निपुण कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान व इंद्र चक्रवती ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं जिसमें बागवानी, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, पशुपालन, मुर्गीपालन, खुम्ब उत्पादन, मत्स्य पालन, केंचुआ खाद उत्पादन का व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल कर किसान छोटी जोत होते हुए भी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं।
हर जिले में पांच प्रशिक्षण केंद्र में होंगे कार्यक्रम
एचएयू के कुलपति बीआर कांबोज ने बताया कि आने वाले दिनों में प्रति जिले में 5 प्रोजेक्टों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग केवल अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग से जुड़ी महिलाओं के लिए होगी। जिसमें पशुपालन, नर्सरी, मधुमक्खी, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी फार्मिगं, फल व सब्जी की ट्रेनिंग करवाई जाएगी।
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अभी तक 46 ट्रेनिंग पूरी, 2075 युवा उठा चुके हैं लाभ
इस साल सायना नेहवाल संस्थान की ओर से अभी तक 46 प्रशिक्षण आयोजित कर 2075 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। मार्च माह तक कुल 77 प्रशिक्षण आयोजित कर 3105 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिए जाने की उम्मीद है। भविष्य में भी इसी प्रकार आत्मनिर्भर बनने की दिशा में युवाओं और किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और नए-नए प्रशिक्षण भी शुरू किए जाएंगे ताकि वे हर क्षेत्र में अपने को स्थापित कर सकें। कार्यक्रम में ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा, सह-निदेशक(प्रशिक्षण) डॉ. अशोक गोदारा, मीडिया सलाहकार डॉ. संदीप आर्य मौजूद रहे।
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बेरोजगारी है प्रमुुख समस्या, युवा हस्तकला में बने निपुण
एचएयू के कुलपति बीआर कंबोज ने बताया कि आजकल बेरोजगारी प्रमुख समस्या है। इसलिए युवाओं को हस्तकला में निपुण कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके लिए सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान व इंद्र चक्रवती ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं जिसमें बागवानी, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, पशुपालन, मुर्गीपालन, खुम्ब उत्पादन, मत्स्य पालन, केंचुआ खाद उत्पादन का व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल कर किसान छोटी जोत होते हुए भी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं।
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हर जिले में पांच प्रशिक्षण केंद्र में होंगे कार्यक्रम
एचएयू के कुलपति बीआर कांबोज ने बताया कि आने वाले दिनों में प्रति जिले में 5 प्रोजेक्टों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग केवल अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग से जुड़ी महिलाओं के लिए होगी। जिसमें पशुपालन, नर्सरी, मधुमक्खी, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी फार्मिगं, फल व सब्जी की ट्रेनिंग करवाई जाएगी।
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अभी तक 46 ट्रेनिंग पूरी, 2075 युवा उठा चुके हैं लाभ
इस साल सायना नेहवाल संस्थान की ओर से अभी तक 46 प्रशिक्षण आयोजित कर 2075 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। मार्च माह तक कुल 77 प्रशिक्षण आयोजित कर 3105 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिए जाने की उम्मीद है। भविष्य में भी इसी प्रकार आत्मनिर्भर बनने की दिशा में युवाओं और किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और नए-नए प्रशिक्षण भी शुरू किए जाएंगे ताकि वे हर क्षेत्र में अपने को स्थापित कर सकें। कार्यक्रम में ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा, सह-निदेशक(प्रशिक्षण) डॉ. अशोक गोदारा, मीडिया सलाहकार डॉ. संदीप आर्य मौजूद रहे।