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शहर में चल रहे पीजी और कोचिंग सेंटरों के लिए मापदंड तय करेगा निगम प्रशासन
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हिसार। शहर में चल रहे पीजी और कोचिंग सेंटरों के लिए अब नगर निगम प्रशासन मापदंड तय करेगा। जो पीजी या कोचिंग सेंटर इन मापदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उनके संचालन पर रोक लगाई जाएगी। इन मापदंडों को तय करने के लिए हाउस की बैठक में एजेंडा रखा जाएगा। उसके बाद मेयर और पार्षदों के साथ चर्चा करके प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
सोमवार को शहर के रिहायशी इलाकों में चल रही पीजी को लेकर कुछ शहरवासियों ने मेयर गौतम सरदाना को अपनी शिकायत सौंपी। उन्होंने धड़ल्ले से चल रही पीजी बंद करवाने की मांग की और उनके लिए मापदंड तय करने का आह्वान किया।
फायर एनओसी तक नहीं लेते कोचिंग सेंटर संचालक
शहर में चल रहे कोचिंग सेंटरों के संचालक फायर एनओसी तक नहीं लेते हैं। जमकर नियमों का उल्लंघन होता है। कई कोचिंग सेंटर तो बेसमेंट में चलते हैं। ऐसे में अगर सूरत जैसा हादसा हो जाए तो बड़ी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है। विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की मारामारी के कारण जगह-जगह कोचिंग सेंटर खुल चुके हैं। कॉमर्शियल मार्केट्स हों या रिहायशी एरिया हर जगह कोचिंग सेंटर खुले हुए हैं, जिनमें हजारों बच्चों का रोजाना आवागमन होता है।
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गली-गली में चल रहे पीजी
इसी तरह गली गली में पीजी खोले जा रहे हैं। नगर निगम के नियमों के मुताबिक पीजी खोलने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है और साथ ही कई मापदंड पूरे करने होते हैं। मगर अधिकतर पीजी संचालक अपनी मनमर्जी से संचालन कर रहे हैं। हालत ऐसी है कि जिन एरिया में कोचिंग सेंटरों पर बच्चों का आना-जाना लगा रहता है, उस एरिया में जिस घर में भी चार कमरे खाली हों, वहीं पीजी खोल दिए जाते हैं। एक कमरे में तीन से चार विद्यार्थियों को ठहराया जाता है, जिनसे महीने के 4 से लेकर 6 हजार रुपये तक वसूल किए जाते हैं।
शहर में जगह जगह खुले पीजी और कोचिंग सेंटरों के लिए मापदंड तय किए जाएंगे, ताकि सुरक्षा प्रबंध पूरे मिलें। इसके लिए हाउस की अगली बैठक में एजेंडा रखा जाएगा। मेयर व पार्षदों से पूछकर मापदंड तय करेंगे, ताकि पीजी व कोचिंग सेंटरों संचालकों की जवाबदेही तय हो सके।
डॉ. पीके हुड्डा, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर, नगर निगम
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सोमवार को शहर के रिहायशी इलाकों में चल रही पीजी को लेकर कुछ शहरवासियों ने मेयर गौतम सरदाना को अपनी शिकायत सौंपी। उन्होंने धड़ल्ले से चल रही पीजी बंद करवाने की मांग की और उनके लिए मापदंड तय करने का आह्वान किया।
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फायर एनओसी तक नहीं लेते कोचिंग सेंटर संचालक
शहर में चल रहे कोचिंग सेंटरों के संचालक फायर एनओसी तक नहीं लेते हैं। जमकर नियमों का उल्लंघन होता है। कई कोचिंग सेंटर तो बेसमेंट में चलते हैं। ऐसे में अगर सूरत जैसा हादसा हो जाए तो बड़ी भयानक स्थिति पैदा हो सकती है। विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की मारामारी के कारण जगह-जगह कोचिंग सेंटर खुल चुके हैं। कॉमर्शियल मार्केट्स हों या रिहायशी एरिया हर जगह कोचिंग सेंटर खुले हुए हैं, जिनमें हजारों बच्चों का रोजाना आवागमन होता है।
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गली-गली में चल रहे पीजी
इसी तरह गली गली में पीजी खोले जा रहे हैं। नगर निगम के नियमों के मुताबिक पीजी खोलने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है और साथ ही कई मापदंड पूरे करने होते हैं। मगर अधिकतर पीजी संचालक अपनी मनमर्जी से संचालन कर रहे हैं। हालत ऐसी है कि जिन एरिया में कोचिंग सेंटरों पर बच्चों का आना-जाना लगा रहता है, उस एरिया में जिस घर में भी चार कमरे खाली हों, वहीं पीजी खोल दिए जाते हैं। एक कमरे में तीन से चार विद्यार्थियों को ठहराया जाता है, जिनसे महीने के 4 से लेकर 6 हजार रुपये तक वसूल किए जाते हैं।
शहर में जगह जगह खुले पीजी और कोचिंग सेंटरों के लिए मापदंड तय किए जाएंगे, ताकि सुरक्षा प्रबंध पूरे मिलें। इसके लिए हाउस की अगली बैठक में एजेंडा रखा जाएगा। मेयर व पार्षदों से पूछकर मापदंड तय करेंगे, ताकि पीजी व कोचिंग सेंटरों संचालकों की जवाबदेही तय हो सके।
डॉ. पीके हुड्डा, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर, नगर निगम