{"_id":"5a3ff9564f1c1bc5668b6fc2","slug":"131514142038-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपके घर के पास कूड़ा उठाने निगम की गाड़ी आई या नहीं जीपीएस बताएगा लोकेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपके घर के पास कूड़ा उठाने निगम की गाड़ी आई या नहीं जीपीएस बताएगा लोकेशन
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
आपके घर के पास कूड़ा उठाने नगर निगम की गाड़ी आ रही है या नहीं, इसकी जानकारी अब निगम अधिकारियों को मिल जाएगी। क्योंकि नगर निगम ने अपने कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवाने की प्लानिंग की है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां गलियों में आपके घर के सामने जा रही हैं या नहीं। अथवा समय पर जा रही हैं, इसकी पूरी जानकारी जीपीएस से मिल जाएगी।
29 वाहनों में लगवाई जाएगा जीपीएस सिस्टम
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निगम के 29 वाहनों में यह जीपीएस लगवाया जाएगा। इनमें नौ ट्रैक्टर, सात टाटा एस, छह आयशर लोडिंग, चार ट्रैक्टर नए खरीदे जाने हैं। इनका टेंडर हो चुका है। दो जेसीबी और एक रोड स्वीपिंग मशीन शामिल हैं।
बीएसएनएल सहित कई कंपनियों से मांगा एस्टिमेट
निगम अधिकारियों ने बताया कि बीएसएनएल सहित कई कंपनियों से जीपीएस को लेकर एस्टिमेट मांगा गया है। बीएसएनएल का जीपीएस काफी महंगा बताया जा रहा है। अन्य कंपनियों से जो जीपीएस लगवाने की बात चल रही है, वो साढ़े पांच हजार से लेकर साढ़े छह हजार के बीच का प्रति वाहन का खर्च है।
विज्ञापन
पहले भी लगवाए गए थे जीपीएस, नहीं हुए मेंटेन
नगर निगम ने सालों पहले भी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवाया था, लेकिन मेंटेनेंस ठीक तरह से नहीं किए जाने से वे फेल हो गए। अधिकारियों का कहना है कि जीपीएस स्वच्छता रैंकिंग बढ़ाने में मदद करेगा। क्योंकि पिछले साल वाहनों पर जीपीएस न होने के कारण भी नंबर काटे गए थे।
वाहन कितना चला ये भी पता चलेगा
निगम अधिकारियों का कहना है कि जीपीएस लगवाए जाने के बाद कई तरह के काम में पारदर्शिता आ जाएगी। उनका कहना है कि जो कर्मचारी शहर में कुछ स्थानों से कचरा उठाने के बाद बाकी जगह छोड़ देते थे या फिर वह अगले दिन काम पूरा करता थे, ऐसे कर्मचारियों के लिए अब मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि लोकेशन से पता चलता रहेगा कि आखिर गाड़ी कहां-कहां पहुंची है। कितने किलोमीटर दूरी तय की, इसका भी पता लग जाएगा।
ई-रिक्शा की टेंडर कंडीशन में भी डाला जाएगा जीपीएस
शहर के 20 वार्डों में भेजी जाने वाली ई-रिक्शा में भी जीपीएस सिस्टम लगे होने की टेंडर में कंडीशन डाली जाएगी। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो 29 वाहनों के अलावा फिर 40 वाहनों में भी जीपीएस सिस्टम लगवाने पड़ेंगे।
कचरा उठाने वाले वाहनों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए जीपीएस लगवाया जा रहा है। करीब 29 वाहनों में जीपीएस लगेगा। ई-रिक्शा के टेंडर में जीपीएस समेत वाहन उपलब्ध करवाने की कंडीशन होगी।
- सुभाष, सीएसआई नगर निगम
विज्ञापन
हिसार।
आपके घर के पास कूड़ा उठाने नगर निगम की गाड़ी आ रही है या नहीं, इसकी जानकारी अब निगम अधिकारियों को मिल जाएगी। क्योंकि नगर निगम ने अपने कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवाने की प्लानिंग की है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां गलियों में आपके घर के सामने जा रही हैं या नहीं। अथवा समय पर जा रही हैं, इसकी पूरी जानकारी जीपीएस से मिल जाएगी।
29 वाहनों में लगवाई जाएगा जीपीएस सिस्टम
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि निगम के 29 वाहनों में यह जीपीएस लगवाया जाएगा। इनमें नौ ट्रैक्टर, सात टाटा एस, छह आयशर लोडिंग, चार ट्रैक्टर नए खरीदे जाने हैं। इनका टेंडर हो चुका है। दो जेसीबी और एक रोड स्वीपिंग मशीन शामिल हैं।
विज्ञापन
बीएसएनएल सहित कई कंपनियों से मांगा एस्टिमेट
निगम अधिकारियों ने बताया कि बीएसएनएल सहित कई कंपनियों से जीपीएस को लेकर एस्टिमेट मांगा गया है। बीएसएनएल का जीपीएस काफी महंगा बताया जा रहा है। अन्य कंपनियों से जो जीपीएस लगवाने की बात चल रही है, वो साढ़े पांच हजार से लेकर साढ़े छह हजार के बीच का प्रति वाहन का खर्च है।
विज्ञापन
पहले भी लगवाए गए थे जीपीएस, नहीं हुए मेंटेन
नगर निगम ने सालों पहले भी वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगवाया था, लेकिन मेंटेनेंस ठीक तरह से नहीं किए जाने से वे फेल हो गए। अधिकारियों का कहना है कि जीपीएस स्वच्छता रैंकिंग बढ़ाने में मदद करेगा। क्योंकि पिछले साल वाहनों पर जीपीएस न होने के कारण भी नंबर काटे गए थे।
वाहन कितना चला ये भी पता चलेगा
निगम अधिकारियों का कहना है कि जीपीएस लगवाए जाने के बाद कई तरह के काम में पारदर्शिता आ जाएगी। उनका कहना है कि जो कर्मचारी शहर में कुछ स्थानों से कचरा उठाने के बाद बाकी जगह छोड़ देते थे या फिर वह अगले दिन काम पूरा करता थे, ऐसे कर्मचारियों के लिए अब मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि लोकेशन से पता चलता रहेगा कि आखिर गाड़ी कहां-कहां पहुंची है। कितने किलोमीटर दूरी तय की, इसका भी पता लग जाएगा।
ई-रिक्शा की टेंडर कंडीशन में भी डाला जाएगा जीपीएस
शहर के 20 वार्डों में भेजी जाने वाली ई-रिक्शा में भी जीपीएस सिस्टम लगे होने की टेंडर में कंडीशन डाली जाएगी। अगर ऐसा संभव नहीं हो पाया तो 29 वाहनों के अलावा फिर 40 वाहनों में भी जीपीएस सिस्टम लगवाने पड़ेंगे।
कचरा उठाने वाले वाहनों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए जीपीएस लगवाया जा रहा है। करीब 29 वाहनों में जीपीएस लगेगा। ई-रिक्शा के टेंडर में जीपीएस समेत वाहन उपलब्ध करवाने की कंडीशन होगी।
- सुभाष, सीएसआई नगर निगम