{"_id":"599897534f1c1b5a188b472f","slug":"111503172435-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिवानी नगर पालिका चेयरमैन का इस्तीफा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिवानी नगर पालिका चेयरमैन का इस्तीफा
Updated Sun, 20 Aug 2017 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
सिवानी मंडी।
भाजपा समर्थित नगर पालिका चेयरमैन नरेश केडिया ने अधिकारियों के अभाव में शहर में ठप पड़े विकास कार्यों से आहत होकर शनिवार को करीब 7 माह के अपने कार्यकाल से पूर्व अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 14 करोड़ की ग्रांट उपलब्ध होने के बावजूद पालिका में सचिव, एमई, जेई, लेखाकार, क्लर्क से लेकर कई पद खाली होने की वजह से शहर में विकास का पहिया थम गया है।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपी दलाल के खेमे से जुड़े प्रधान नरेश केडिया ने आरोप भी लगाया कि शहर में उनकी छवि को खराब करने के लिए सरकार ने ग्रांट तो दे दी लेकिन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की। नगर पालिका सिवानी में लंबे समय से सचिव, एमई, जेई, लेखाकार, क्लर्क सहित कई पद रिक्त पड़े है। करीब दो साल पहले रिक्त पड़े पदों को नपा प्रधान समेत शहर के पार्षदों ने आमरण अनशन शुरू किया तो नपा को अधिकारी मिल गए थे लेकिन कुछ समय बाद ही पहले सचिव और फिर एमई व जेई के पद एक बार फिर रिक्त हो गए। नगर पालिका में उधार के अधिकारियों से करीब साल भर से काम चलाया जा रहा था। नगर पालिका के खाते में फिलहाल 14 करोड़ रुपये की राशि है और ढाई करोड़ रुपये अभी खाते में आने बाकी है। प्रधान ने इस्तीफे की घोषणा कर न केवल शहर की राजनीति को गरमा दिया बल्कि सरकार के समान विकास के नारे पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
मंत्रियों से लेकर सांसद तक से मिले..
नगर पालिका में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर नपा प्रधान ने स्थानीय शहरी निकाय मंत्री कविता जैन, सांसद धर्मवीर, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपी दलाल, वरिष्ठ नेता राजीव जैन तक से कई बार मिल चुके है।
विज्ञापन
आहत होकर उठाया कदम.........
शहर में ठप पड़े विकास कार्यों से आहत होने पर उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब इस पद पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देंगे। अपने इस कदम पर भविष्य में भी कायम रहेंगे। इस्तीफा उपायुक्त भिवानी को मेल कर भेज दिया है। सोमवार को वे व्यक्तिगत रूप से भी उपायुक्त भिवानी से मिलेंगे।
क्षेत्र के इतिहास में पहला इस्तीफा
सिवानी में नगर पालिका के गठन के बाद क्षेत्र के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी नगर पालिका प्रधान ने अपने कार्यकाल से पहले इस्तीफा दिया हो।नपा के चुनाव में अभी करीब 7 माह का समय बाकी है।
नपा प्रधान के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले व्यापार मंडल के प्रधान सुशील सिंगला ने इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि अपने घोटालों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नपा प्रधान ने यह कदम उठाया है। उन्हें अगर शहर के विकास से इतना ही लगाव था तो अधिकारियों के पद तो एक साल से खाली पड़े है और प्रधान को उस समय अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए था।
अब आगे क्या
बिना अधिकारियों के चल रही नगर पालिका को अगर जल्द ही अधिकारी नहीं मिलते है तो सरकार की तो किरकरी होगी ही साथ ही विपक्ष को भी सरकार के खिलाफ घर बैठे मुद्दा मिल जाएगा। नियमानुसार 7 दिन के अंतराल में अगर प्रधान अपना इस्तीफा वापस नहीं लेते है तो उनका इस्तीफा मंजूर माना जाता है।
- अधिकारियों की कमी से ठप विकास कार्यों से आहत भाजपा के नपा प्रधान ने डीसी को भेजा इस्तीफा
- कहा छवि खराब करने के लिए ग्रांट तो मिली लेकिन अधिकारी नहीं मिले
विज्ञापन
सिवानी मंडी।
भाजपा समर्थित नगर पालिका चेयरमैन नरेश केडिया ने अधिकारियों के अभाव में शहर में ठप पड़े विकास कार्यों से आहत होकर शनिवार को करीब 7 माह के अपने कार्यकाल से पूर्व अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 14 करोड़ की ग्रांट उपलब्ध होने के बावजूद पालिका में सचिव, एमई, जेई, लेखाकार, क्लर्क से लेकर कई पद खाली होने की वजह से शहर में विकास का पहिया थम गया है।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपी दलाल के खेमे से जुड़े प्रधान नरेश केडिया ने आरोप भी लगाया कि शहर में उनकी छवि को खराब करने के लिए सरकार ने ग्रांट तो दे दी लेकिन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की। नगर पालिका सिवानी में लंबे समय से सचिव, एमई, जेई, लेखाकार, क्लर्क सहित कई पद रिक्त पड़े है। करीब दो साल पहले रिक्त पड़े पदों को नपा प्रधान समेत शहर के पार्षदों ने आमरण अनशन शुरू किया तो नपा को अधिकारी मिल गए थे लेकिन कुछ समय बाद ही पहले सचिव और फिर एमई व जेई के पद एक बार फिर रिक्त हो गए। नगर पालिका में उधार के अधिकारियों से करीब साल भर से काम चलाया जा रहा था। नगर पालिका के खाते में फिलहाल 14 करोड़ रुपये की राशि है और ढाई करोड़ रुपये अभी खाते में आने बाकी है। प्रधान ने इस्तीफे की घोषणा कर न केवल शहर की राजनीति को गरमा दिया बल्कि सरकार के समान विकास के नारे पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
विज्ञापन
मंत्रियों से लेकर सांसद तक से मिले..
नगर पालिका में अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर नपा प्रधान ने स्थानीय शहरी निकाय मंत्री कविता जैन, सांसद धर्मवीर, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपी दलाल, वरिष्ठ नेता राजीव जैन तक से कई बार मिल चुके है।
विज्ञापन
आहत होकर उठाया कदम.........
शहर में ठप पड़े विकास कार्यों से आहत होने पर उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब इस पद पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देंगे। अपने इस कदम पर भविष्य में भी कायम रहेंगे। इस्तीफा उपायुक्त भिवानी को मेल कर भेज दिया है। सोमवार को वे व्यक्तिगत रूप से भी उपायुक्त भिवानी से मिलेंगे।
क्षेत्र के इतिहास में पहला इस्तीफा
सिवानी में नगर पालिका के गठन के बाद क्षेत्र के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी नगर पालिका प्रधान ने अपने कार्यकाल से पहले इस्तीफा दिया हो।नपा के चुनाव में अभी करीब 7 माह का समय बाकी है।
नपा प्रधान के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले व्यापार मंडल के प्रधान सुशील सिंगला ने इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि अपने घोटालों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नपा प्रधान ने यह कदम उठाया है। उन्हें अगर शहर के विकास से इतना ही लगाव था तो अधिकारियों के पद तो एक साल से खाली पड़े है और प्रधान को उस समय अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए था।
अब आगे क्या
बिना अधिकारियों के चल रही नगर पालिका को अगर जल्द ही अधिकारी नहीं मिलते है तो सरकार की तो किरकरी होगी ही साथ ही विपक्ष को भी सरकार के खिलाफ घर बैठे मुद्दा मिल जाएगा। नियमानुसार 7 दिन के अंतराल में अगर प्रधान अपना इस्तीफा वापस नहीं लेते है तो उनका इस्तीफा मंजूर माना जाता है।
- अधिकारियों की कमी से ठप विकास कार्यों से आहत भाजपा के नपा प्रधान ने डीसी को भेजा इस्तीफा
- कहा छवि खराब करने के लिए ग्रांट तो मिली लेकिन अधिकारी नहीं मिले